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रात-रात भर एनएसडी में रिहर्सल करता था: तुषार पांडे

फिल्म ‘रंग दे बसंती’ (2006) में एक बेहद ही छोटे से किरदार को निभाने वाले अभिनेता तुषार पांडे जल्द ही नितेश तिवारी के निर्देेशन में बनी फिल्म ‘छिछोरे’ में एक महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। तुषार हालांकि इससे पहले फिल्म ‘पिंक’ और ‘हम चार’ में भी नजर आ चुके हैं। फिल्म ‘छिछोरे’ के अनुभव पर बात करते हुए तुषार कहते हैं कि उन्हें यह फिल्म करते हुए बहुत मजा आया। बकौल तुषार,‘हम सभी ने पहले एक-दूसरे के साथ काम नहीं किया था। लेकिन शूटिंग से पहले हम सारे लोगों की इतनी अच्छी दोस्ती हो गई थी कि लगा ही नहीं कि हम लोग पहली बार एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। शूट के दौरान मजाक-मस्ती सब चलती रहती थी। शूटिंग खत्म होने के बाद सुशांत (सिंह)के घर में बैठ जाते थे। शूट से आने के बाद सब साथ में खाना खाते थे, तो एक रोज की परंपरा सी बन गई थी। नितेश सर ने बहुत अच्छा माहौल बना दिया था, यह सब तभी संभव हुआ। फिल्म में क्योंकि हमने दो एज ग्रुप दिखाए हैं, तो पहले एक की शूटिंग की और फिर एक-दो महीने का ब्रेक लिया, जिसमें हमने वजन बढ़ाया और तमाम तैयारियां कीं और तब आगे की शूटिंग की। मेरे लिए यह सबसे अच्छा अनुभव था।’ 
इस फिल्म में काम करके उनके कॉलेज के दिनों की यादें फिर ताजा हो गईं। तुषार बताते हैं कि उनका बचपन दिल्ली में ही गुजरा है और वह दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़े हैं। कॉलेज में अपने दिनों को याद करते हुए तुषार बताते हैं,‘कमला नगर में एक मशहूर चाचा के छोले भटूरे की दुकान है। वहां दोपहर 12-01 बजे तक छोले भटूरे खत्म हो जाया करते थे, हम जब भी कॉलेज में अपनी क्लास में होते, तो यही सोचते रहते थे कि 12 बजे से पहले कैसे वहां पहुंचें। एक-दो लोगों की बाइक लेकर या कॉलेज का गेट कूदकर वहां जाते थे और छोल-भटूरे और लस्सी का आनंद लेते थे। मैं कॉलेज के दिनों से ही थियेटर करता था, तो मेरे लिए कॉलेज का थियेटर दूसरे घर जैसा था। दिन-रात वहीं रहते थे। खाने के लिए वही छोले-भटूरे होते थे और बस ऐसे ही मैंने अपने कॉलेज के दिनों को मजे से जिया है।’ 
अभिनेता तुषार पांडे की थियेटर में दिलचस्पी उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) ले आई, जहां उन्होंने एक्टिंग की बारीकियों को सीखा। एनएसडी के दिनों को याद करते हुए तुषार कहते हैं कि वह बेहतरीन पलों में से एक थे, जहां उन्हें एक बेहतर एक्सपोजर मिला। वह बताते हैं, ‘इंडिया गेट चूंकि एनएसडी के पास ही है, तो हम सारे दोस्त वहां भी खूब जाया करते थे। एक-दो बार तो हमारी एनएसडी की क्लासेज ही इंडिया गेट के मैदान में हुआ करती थीं। आज भी मुझे जब भी मौका मिलता है मैं दिल्ली चला आता हूं। दिल्ली बहुत खूबसूरत और जिंदादिल है। मेरे माता-पिता यहीं रहते हैं। मुझे दिल्ली बहुत पसंद है, क्योंकि यहां से ढेरों यादें जुड़ी हैं।’

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  • Web Title:raat raat bhar enesadee mein riharsal karata tha tushaar paande