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दिल्ली से मेरा रिश्ता है दिल का: राजशेखर

आपने करीब आठ साल पहले ‘तनु वेड्स मनु’ से अपना सफर शुरू किया था और अब तक करीब दस फिल्मों के लिए ही गाने लिखे हैं। इसकी कोई खास वजह?

मैं चलताऊ किस्म का काम नहीं करना चाहता। मैंने अब तक जितनी फिल्में ‘तनु वेड्स मनु’, ‘तनु वेड्स मनु रिटन्र्स’, ‘हिचकी’, ‘तुम्बाड’ आदि के लिए लिखा है, वे सब थोड़ी अलग तरह की फिल्में हैं। ऐसा काम करके मुझे रचनात्मक संतोष मिलता है। इसलिए गिनती थोड़ी कम है।

आपके गीतों में कई भाषाओं के शब्द मिलते हैं। अवधी से लेकर, पंजाबी, हरियाणवी, पुरबिया तक। कहां से लाते हैं ये शब्दावली?

मैं हिंदी साहित्य का छात्र रहा हूं। शब्दों और गीतों के भाव के मामले में मुझे साहित्य की पढ़ाई का बहुत लाभ मिला। दरअसल, साहित्य आपके अंदर संवेदना जगाता है। साहित्य से भाषा के साथ संवेदना के स्तर पर भी मदद मिलती है। ‘तनु वेड्स मनु’ में मैंने अवधी, पंजाबी, हरियाणवी का प्रयोग किया। ‘तुम्बाड’ की भाषा अलग है। इसमें छंद था। काव्यात्मकता थी। काफी सोच-विचार के बाद इसके र्शीषक गीत ‘कन कन कनक’ को लिखा।

एक तरफ तो आप ‘कन कन कनक’ जैसी भाषा लिख रहे हैं और दूसरी तरफ ‘पासवर्ड सारे तुझे बताऊंगा’ जैसी नई पीढ़ी की भाषा भी...
नई पीढ़ी को ध्यान में रखना जरूरी है। समय के साथ बदलते रहना जरूरी है। आज के समय का प्रतिबिंब भी आज के गानों में आना चाहिए। नए जमाने का मुहावरा गढ़ना चाहिए। मेरी कोशिश रहती है कि अपनी जड़ों को याद रखते हुए नए जमाने का मुहावरा गढ़ सकूं।

बिहार की पृष्ठभूमि में बन रही किसी फिल्म (जबरिया जोड़ी) में आपने पहली बार गाना लिखा है। अनुभव कैसा रहा?
इसमें एक ही गाना ‘मच्छरदानी’ वैसा है, जिसमें पुरबिया झलक है। एक गाना ‘किं होदा प्यार’ पंजाबी है। आजकल पंजाबी गीत गरम मसाले की तरह हैं, जिसके बिना काम नहीं चलता।
अपने दिल्ली कनेक्शन के बारे में बताइए।

दिल्ली तो दिल का शहर है मेरे लिए। एक मोहब्बत का रिश्ता है। मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा दिल्ली में बीता है। अभी भी दो दिन के लिए आता हूं, लेकिन 10 दिन रुक जाता हूं। खाने के मामले में कोई जोड़ नहीं है दिल्ली का। कैंपस का वातावरण, दोस्त, नाटक वगैरह बहुत खूबसूरत एहसास हैं मेरे दिल में दिल्ली के। 

शुरू से ही गीतकार बनना चाहते थे या ये ख्याल दिल्ली आने के बाद आपके मन में आया?
ईमानदारी से कहूं, तो कुछ पता नहीं था, कुछ तय नहीं किया था कि कहां जाना है। जिधर-जिधर रास्ते मुड़ते गए, मैं भी मुड़ गया। दिल्ली आया, तो नाटक करने लगा। नाटक से फिल्म के बारे में पता लगा और संयोग से गीत लिखने का मौका मिल गया। हां, कविता और संगीत में मन हमेशा रमता था। जिधर हवा ले चले, चले जाएंगे। जिसमें मन रमता है, वही करता हूं।
अगले प्रोजेक्ट कौन-से हैं?
‘सांड की आंख’ में गीत लिखा है। इसके अलावा चार फिल्मों में और गीत लिख रहा हूं। उनके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता। निर्देशन की भी इच्छा है और जल्दी ही इस पर काम शुरू करूंगा।।

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  • Web Title:My relationship with Delhi is from heart says lyricist raj shekhar