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जरूरी है खेलों का टीवी पर दिखना: हिना सिद्धू

 

स्टल शूटर हिना सिद्धू ने हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स 2022, बर्मिंघम की खेलों की सूची से शूटिंग को हटाए जाने पर असंतोष व्यक्त किया। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि देर-सवेर सब कुछ ठीक हो ही जाएगा। हालांकि हिना ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की तारीफ की कि उन्होंने विभिन्न मसलों को सुलझाने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी। वह कहती हैं, ‘कॉमनवेल्थ गेम्स एक बड़ा आयोजन है। जब यहां होने वाली शूटिंग की प्रतिस्पर्धाओं में हमारे यहां के खिलाड़ी जीतते हैं, तो उससे देश में इस खेल को बढ़ावा मिलता है। इस खेल को शामिल न किया जाना दिल तोड़ने वाला है।’

सुनने में आया है कि ब्रिटिश सरकार, भारत की नाराजगी को देखते हुए कोई बीच का रास्ता तलाशने की कोशिश कर रही है। हिना कहती हैं, ‘इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन शूटिंग को शामिल करवाने के लिए लगातार लॉबीइंग कर रही है। उम्मीदें अभी बाकी हैं। इस तरह किसी एक खेल को हटा देना ठीक नहीं है। हालांकि मैं यह भी नहीं चाहती कि शूटिंग को शामिल करने के लिए किसी और खेल को हटा दिया जाए।  मुझे उम्मीद है कि चीजें पहले से बेहतर होंगी।’ बताते चलें कि हिना पहली भारतीय शूटर हैं, जिन्होंने साल 2013 के इंटरनेशनल शूटिंग स्पोट्र्स फेडरेशन वल्र्ड कप में गोल्ड मेडल जीता था। 

शूटिंग को बढ़ावा दिए जाने की हिमायती हिना कहती हैं, ‘क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों से जुड़ी सबसे अच्छी बात यह है कि इनका प्रसारण टीवी पर दिन भर किया जाता है। वहीं शूटिंग जैसे खेलों के मामले में ऐसा प्राय: नहीं होता। हालांकि अब सुधार हो रहा है। फिर भी अभी एक लंबा रास्ता तय किया जाना है। होना यह चाहिए कि जब हमारे खिलाड़ी कॉमनवेल्थ जैसी बड़ी प्रतिस्पर्धाओं में खेल रहे हों, मेडल जीत रहे हों, तो उन खेलों का और खिलाड़ियों की उपलब्धियों का पूरा प्रसारण हो। इससे खेलों को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलती है।’ 

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क्या हिना को लगता है कि टीवी कवरेज के अलावा खिलाड़ियों पर बनने वाली फिल्मों से भी युवा पीढ़ी को प्रेरित किया जा सकता है? वह कहती हैं, ‘जब भी कोई खिलाड़ी किसी बड़े इवेंट में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो न सिर्फ युवा बल्कि उनके अभिभावक भी उस खेल में रुचि लेते हैं। जहां तक फिल्मों का सवाल है, उनसे भी अच्छी मदद मिलती है। मुझे फिल्म ‘सांड़ की आंख’ का टीजर अच्छा लगा। पर फिल्म की रिलीज तक मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूंगी। खेलों पर बनने वाली फिल्मों में खास सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। साल 2016 की फिल्म दंगल देखते हुए मुझे बहुत मजा आया था। इसे देखने पर ही मुझे कुश्ती के बारे में ऐसी-ऐसी बातें पता चलीं, जिनके बारे में मुझे कुछ नहीं पता था। किसी स्पोट्र्स फिल्म को ऐसे ही बनाया जाना चाहिए। फिल्म खिलाड़ी और खेल, दोनों पर केंद्रित होनी चाहिए। तभी वह लोगों का ध्यान खींच पाएगी।’ क्या कभी उनके पास उनकी जिंदगी पर बायोपिक बनाने का अभी तक कोई प्रस्ताव आया है?  वह कहती हैं, ‘नहीं। जब तक ऐसे किसी प्रस्ताव पर बात पक्की न हो जाए, मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगी।

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  • Web Title:heena sidhu says that it is important to show sports on television