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बिना नाच-गाने की फिल्मों का चलन

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डांस और गाने हमेशा से ही बॉलीवुड फिल्मों का एक अहम हिस्सा रहे हैं। ये हर मर्ज की दवा हैं- चाहे कहानी में एक ब्रेक देना हो या कहानी को आगे बढ़ाना हो। पर पिछले कुछ सालों से इनका इस्तेमाल कम हुआ है। साल 2013 की फिल्म ‘लंचबॉक्स’, साल 2018 की फिल्म ‘मिसिंग’ और इस साल की ‘केसरी’, ‘फोटोग्राफ’, ‘आर्टिकल 15’ जैसी फिल्मों में कोई विशेष डांस नंबर नहीं थे। इससे लगता है कि अब फिल्म मेकर किस्सागोई की खूबसूरती को ही आजमाने पर जोर दे रहे हैं। 
कंपोजर सलीम मर्चेंट इस बारे में कहते हैं, ‘पहले हिंदी फिल्मों के गाने विशेष किस्म के भाव जगाने के लिए इस्तेमाल होते थे। पर जिस तरह की फिल्में अब बन रही हैं, उन्हें इनकी जरूरत नहीं है।’ 

फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ की स्क्रीनप्ले लेखिका कनिका ढिल्लन का मानना है कि हर किस्म की फिल्मों का अपना दर्शकवर्ग होता है। वह कहती हैं, ‘गानों वाली फिल्में और बिन गानों वाली फिल्में- दोनों ही दो अलग-अलग किस्म की किस्सागोई के रूप हैं। ये दोनों ही रूप एकसाथ अपना अस्तित्व बनाए रख सकते हैं। हालांकि यह अच्छी बात है कि अब हमें हर फिल्म में जबरदस्ती गाने ठूसने नहीं पड़ते।’

इधर बहुत सारी फिल्मों को बिना नाच-गाने वाली फिल्में बनाने के लिए तारीफ मिली। इनमें कहानी को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे  तरीके आजमाए गए। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों को नाच-गाने वाली फिल्में पसंद हैं, क्या उनकी पसंद का ख्याल रखा जाएगा? फिल्म निर्देशक श्री नारायण सिंह बॉलीवुड इंडस्ट्री में आ रहे इस बदलाव को महसूस करते हैं। वह कहते हैं, ‘आजकल फिल्म मेकर ऐसे विषय उठाते हैं, जो समसामयिक हों। ऐसी फिल्मों में नाच-गाने का स्कोप कम ही होता है।’

तो क्या यह मान लेना चाहिए कि अब फिल्म मेकर्स को ज्यादा गानों की जरूरत नहीं है? क्या अब कंपोजर्स के लिए काम की कमी होने वाली है? निर्माता भूषण कुमार जिनकी म्यूजिक कंपनी तीन दशक पुरानी है, इस बारे में कहते हैं, ‘नाच-गानों का दौर कभी नहीं जाने वाला। किसी फिल्म के गाने जितने लोकप्रिय होते हैं, दर्शकों के मन में सिनेमाहॉल जाकर उस फिल्म को देखने की इच्छा भी उतनी ही ज्यादा होती है।’ 

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‘आर्टिकल 15’ के निर्देशक अनुभव सिन्हा कहते हैं, ‘आजकल नाच-गानों वाली और बिना नाच-गानों वाली- दोनों ही तरह की फिल्में चल रही हैं। हालांकि  नाच-गाने हर तरह की फिल्म के लिए जरूरी नहीं होते। जैसे, आर्टिकल 15 जैसी फिल्म की नाच-गाने के साथ कल्पना भी नहीं की जा सकती।’

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  • Web Title:films cant be made without music and dance