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फास्ट फूड है बीमारियों की जड़

fast food

मेडिसिन के पिता कहे जाने वाले हिपोक्रेटीज ने कहा था,‘लेट दि फूड भी दाइ मेडिसिन’ यानी भोजन को ही तुम्हारी दवा बनने दो । लेकिन निश्चित रूप से जब उन्होंने भोजन की बात की होगी, तो ‘फास्ट फूड’ का जिक्र नहीं किया होगा। वह भी जानते होंगे कि ‘फास्ट फूड’ खाने से स्वास्थ्य बनेगा नहीं, बल्कि बिगड़ेगा। इसके बाद अलग से दवा की जरूरत पड़ ही सकती है। आज महानगरों में तेजी से बढ़ रहे फास्ट फूड पॉइंट्स की वजह से हमारा स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है। हम स्वाद के लालच में अपने स्वास्थ्य को हानि पहुंचा रहे हैं। हमें मालूम है कि वह हमें नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन हम उसके आगे मजबूर हैं।

सीधे तौर पर कहें, तो हम इसे बीमारियों के लिए जिम्मेदार मान सकते हैं। बर्गर, पिज्जा, ग्रिल्ड सैंडविच, चिकन रोल्स, केक, पेस्ट्रीज, फ्रेंच फ्राइज, ब्राउनीज, पाव भाजी, समोसा आदि में मैदे, चीनी और हाइड्रोजेनेटेड फैट की उच्च मात्रा होती है। लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन, हमें अस्वस्थ बनाता है। ज्यादा फास्ट फूड खाने वाले बच्चे कुपोषित हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें अपने विकास के समय ज्यादा पोषक तत्वों की जरूरत होती है)। अगर शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते, तो वह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रभाव डालता है और इससे बच्चे सर्दी-खांसी, एलर्जी, अस्थमा, शरीर में छाले, फुंसियों जैसी अन्य बीमारियों की पकड़ में आ जाते हैं।

शरीर में कैसे प्रवेश करते हैं जहरीले तत्व
डिब्बाबंद संतरे, टमाटर या अनन्नास का जूस और सॉफ्ट ड्रिंक्स आमतौर पर जिस तरह की धातु के डिब्बे में पैक होते हैं, वह हानिकारक होती है और वह शरीर में जहर बनाने का काम करती है। मोनोसोडियम ग्लूटमेट एक अन्य शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन है, जो लैबोरेटरी सेल कल्चर में मात्र 90 सेकेंड के संपर्क के बाद नसों में सूजन का कारण बन सकता है। इसे ‘चाइनीज रेस्तरां सिंड्रोम’ के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जिसमें एमएसजी के प्रति संवेदनशील लोग सिरदर्द, सूजन और कभी-कभी चाइनीज खाना खाने के बाद हाथ-पैरों के सुन्न हो जाने का अनुभव करते हैं। कुछ लोग इसके सेवन के बाद बहुत असहज महसूस करते हैं, जबकि दूसरों को यह प्रभावित नहीं करता।

कैफीनयुक्त सॉफ्ट ड्रिंक्स भी हानिकारक होते हैं। कैफीन युक्त पेय पदार्थों का ज्यादा सेवन करने वाले बच्चों में सक्रियता, सीखने की क्षमता में कमी, एकाग्रता की समस्याएं और उनके मिजाज में भी गिरावट देखी जा सकती है। चीनी के ज्यादा उपयोग से मोटापा, अटेंशन डेफिसिट डिसॉर्डर (एडीडी), हाइपरएक्टिविटी और अपक्षयी रोग जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और अन्य कई बीमारियों का खतरा रहता है। इसके अलावा, बच्चे वही खाते हैं, जो वह टीवी पर विज्ञापनों में देखते हैं। इनके जरिए उन तक गलत संदेश पहुंचता है। इन विज्ञापनों में आने वाले ज्यादातर लोग छरहरे होते हैं। बच्चे जब टीवी पर यह विज्ञापन देखते हैं, तो उन्हें यह संदेश मिलता है कि आप कुछ भी खाओ, तो भी छरहरे ही रहोगे। यह रवैया उन्हें इस तरह के फास्ट फूड खाने का आदी बनाता है और तभी असली समस्या शुरू होती है। अगर आप हमेशा स्वस्थ भोजन करते हैं, तो ही कभी-कभार इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना स्वीकार्य हो सकता है। हमें यह समझना चाहिए कि स्वास्थ्य हमारी सबसे कीमती वस्तु है और स्वस्थ भोजन उन सबसे महत्वपूर्ण तोहफों में से एक है, जो आप खुद को दे सकते हैं।

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  • Web Title:Fast food is the root of diseases