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दो ट्रेलर यानी डबल धमाल

बॉलीवुड फिल्मों के प्रचार पर इन दिनों जरूरत से ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है। जहां तकरीबन एक साल पहले तक टीजर फिल्मों को लेकर एक रहस्यमय आकर्षण पैदा करते थे, वहीं अब ये आम हो चले हैं। एक तयशुदा फॉर्मूला बन गया है- पहले टीजर लॉन्च होगा, फिर ट्रेलर, फिर गाने... और अब सेकंड ट्रेलर भी इस श्रेणी में जुड़ गया है। ‘छिछोरे’, ‘सोनचिरैया’, ‘मिशन मंगल’ और ‘खानदानी शफाखाना’- इन सभी फिल्मों के दो ट्रेलर जारी किए गए थे। 
यूं हुआ आगाज
फिल्म ‘मिशन मंगल’ का निर्देशन करने वाले जगन शक्ति समझाते हैं, ‘जब आप किसी फिल्म का पहला ट्रेलर लॉन्च करते हैं, तो वह उसके मुख्य आइडिये के बारे में बताता है। इसके बाद दूसरा ट्रेलर किरदारों की झलक देता है। कई बार ये दोनों काम सिर्फ एक ट्रेलर के जरिये करना संभव नहीं होता। एक साइंस फिल्म में आप दर्शकों को यह जरूर बताना चाहेंगे कि यह फिल्म सिर्फ साइंस के ही नहीं, बल्कि किरदारों के आपसी हंसी-मजाक के बारे में भी है। फिल्म की रिलीज तक उसे लेकर उत्सुकता बनाए रखनी होती है।’
पर क्या दो-दो ट्रेलर लॉन्च करने पर दर्शकों को जरूरत से ज्यादा सामग्री पहले ही दिखा देने का खतरा नहीं होता? फिल्म ‘खानदानी शफाखाना’ के निर्माता भूषण कुमार को ऐसा नहीं लगता। वह कहते हैं, ‘हर फिल्म के साथ ऐसा नहीं होता। कई बार फिल्म मेकर फिल्म का ट्रेलर तक लॉन्च नहीं करते। फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ के मामले में पहले एक म्यूजिक टीजर आया था, उसके बाद टीजर और फिर ट्रेलर सिर्फ एक हफ्ते पहले आया था।’ 
ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। वह कहते हैं, ‘ऐसा पहले भी होता रहा है, पर यह आम नहीं था। आजकल फिल्म मेकर सिर्फ टीवी पर आने वाले प्रोमो पर ही निर्भर नहीं हैं। वे फिल्म से जुड़ी उत्सुकता जगाने के लिए हर संभव तरीका आजमाते हैं। आखिर इस पर उनकी फिल्म का मुनाफा टिका होता है।’ 

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  • Web Title:Double trailer double dhamal