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कैंपस के करामाती जुगाड़

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दाखिले की दौड़भाग के बाद अब वक्त है कॉलेज के रंग में रंगने का। कॉलेज में नई चीजों का अनुभव करें, दोस्त बनाएं, लेकिन इन सबके बीच सही और गलत के अंतर को कैसे समझें, बता रहे हैं आपके सीनियर्स

फैशन, इलेक्शन, बेहतर लाइफस्टाइल, विभिन्न सोसाइटी और लाजवाब फेस्ट- दिल्ली यूनिवर्सिटी को पढ़ाई के साथ इन सबके लिए भी जाना जाता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ने वाले बॉलीवुड के एक्टर हों या सिंगर, ये कलाकार यहां की सोसाइटीज और अन्य चीजों का हिस्सा जरूर रहे हैं। अपने कॉलेज के पहले साल से ही आप भी इनका हिस्सा बन सकते हैं। पढ़ाई से अलग दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक ओर भी दुनिया है, जो कुछ नया तलाशने और व्यक्तित्व को निखारने में आपकी मदद करती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ सीनियर्स, फ्रेशर्स को बता रहे हैं कि कैसे कॉलेज में अपनी नई शुरुआत करें। सबसे अलग और बेहतर दिखने की कोशिश में गलत चीजों का चुनाव करने से बचें।  

सिगरेट पीना कूल नहीं 
हंसराज कॉलेज में पढ़ने वाले आदित्य सिंह हंसते हुए मजाक करते हैं, ‘अगर आपके सीनियर्स ने आपको हॉस्टल में बीयर पीते हुए देख लिया या हॉस्टल में बीयर देख ली, तो वे आपसे यह सब ले लेंगे और अपना खुद का ठेका खोल लेंगे।’ लेकिन आदित्य फ्रेशर्स को सलाह भी देते हैं, ‘बीयर और सिगरेट का इस्तेमाल लोगों के सामने कूल बनने के लिए न करें। हॉस्टल में रोजाना चेकिंग होती है। अगर इस दौरान कोई नशीली चीजों के साथ पकड़ा जाता है, तो उस पर सख्त एक्शन लिया जाता है। जिसका असर उस छात्र के भविष्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए इस प्रकार की हानिकारक चीजों से बचें और कॉलेज के दिनों को बेफिक्र हो कर जिएं।’

कॉलेज का नया साल हो कुछ खास
इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स (आईएचई) से ग्रेजुएशन करने वाली याशिका गर्ग कहती हैं, ‘पहला साल कुछ नया करने, नई चीजों को ढूंढ़ने और नए अनुभवों को महसूस करने का साल होता है। मैं और मेरे कॉलेज के दोस्त भी अपने पहले साल के दौरान कॉलेज के आस-पास के लोकप्रिय खाने के ठिकानों, जैसे शांति निकेतन और चंपा गली जाते थे। इसके साथ ही फेशर्स को कॉलेज की सोसाइटी और यूनियन का हिस्सा बनना चाहिए और हर साल होने वाले फेस्ट का पूरा लुत्फ उठाना चाहिए। अपने जीवन के हर पल को खूबसूरती के साथ संजोने के लिए कॉलेज लाइफ खुलकर एंजॉय करें।’

किसी और की तरह न बनें
दौलत राम कॉलेज की रिया शर्मा हंसते हुए कहती हैं, ‘किसी और की तरह बनने की कोशिश बिल्कुल मत करें। मुझे याद है, मेरी क्लास में एक लड़की फुल मेकअप करके आई। और पूरे डिपार्टमेंट में से किसी ने भी उसे नहीं पहचाना। यह घटना मुझे पूरी तरह फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ (1998) की तरह लग रही थी।’ वह कहती हैं,‘मैं यह नहीं कह रही हूं कि आपको ऐसे तैयार नहीं होना चाहिए। पर, ऐसा तब करें जब यह आपको सूट करता हो। किसी और की तरह बनने की कोशिश न करें। जो आप पर सबसे अच्छा लगता है, वह ही आपका सबसे बेहतर रूप है।’

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  • Web Title:Campus jugad in DU