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दक्षिण की फिल्में ही नहीं निर्देशक भी बन रहे बॉलीवुड का हिस्सा

sandeep reddy vanga directs shahid kapoor on the set of kabir singh

बॉलीवुड में दक्षिण की हिट फिल्मों के रीमेक खूब पसंद किए जा रहे हैं। इनमे से ज्यादातर फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस में अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अब सिर्फ रीमेक बनाने का ही नहीं, मूल दक्षिण भारतीय फिल्म के निर्देशक से ही हिंदी फिल्म का भी निर्देशन करवाने का चलन जोरों पर है। 

हाल ही में आई बॉलीवुड फिल्म ‘कबीर सिंह‘ का निर्देशन संदीप रेड्डी वांगा ने किया है, जिन्होंने साल 2017 में आई तेलुगू फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ का निर्देशन किया था। ‘कबीर सिंह’, ‘अर्जुन रेड्डी’ का ही रीमेक थी। इसके अलावा, अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘लक्ष्मी बम’, हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘मुन्नी 2: कंचना’ का रीमेक है, जिसका निर्देशन राघव लॉरेंस ने किया था। साल 2010 में आई देवा कट्टा की निर्देशित तेलुगू फिल्म ‘प्रस्थानम’ का रीमेक भी देवा कट्टा के निर्देशन में बन रहा है, जिसमें लीड रोल में संजय दत्त हैं।

देवा कहते हैं कि उसी निर्देशक द्वारा रीमेक बनाने के फायदे और नुकसान दोनों हैं।  वह जानता है कि कहानी का मूल भाव क्या है। निर्माता भूषण कुमार, जो कबीर सिंह के सह-निर्माता रहे हैं कहते हैं कि पहले लोग हिंदी फिल्म में दक्षिण के निर्देशकों को लेने से बचते थे। सबको लगता था कि उनका नजरिया अलग होता है। लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। मूल फिल्म की सफलता के बाद, जब वही निर्देशक फिल्म का रीमेक बनाता है, तो वह किरदारों में सटीक भाव लाने में कामयाब रहता है। इससे निर्देशक उन चीजों में भी बदलाव कर सकता है, जो वह मूल फिल्म में नहीं कर सका था। 
 

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  • Web Title:Not only south indian films but directors also becoming the part of Bollywood