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मेरे जीने की उम्मीद है थिएटर : नसीरुद्दीन 

happy birthday Naseeruddin Shah

बात साल 1978 की है। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी ने एक थिएटर कंपनी शुरू करने के बारे में सोचा। दोनों ने अपनी पसंदीदा कहानियों का मंचन करने के लिए ‘मोटली थिएटर’ नामक थिएटर कंपनी शुरू की। एक साल बाद जुलाई 1979 में पहली बार ‘मोटली थिएटर’ में सैम्युएल बेकेट के नाटक ‘वेटिंग फॉर गोडोट’ पर आधारित प्रस्तुति का मंचन किया गया। आज चार दशक बीतने के बाद जब कंपनी के 42 नाटकों का मंचन हो चुका है, तो इस मौके पर नसीर कहते हैं कि उनके लिए यह किसी ख्वाब के पूरा होने से कम नहीं है।

‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि हम लंबे समय तक इसे आगे ले जा पाएंगे। मुझे यकीन नहीं था कि मैं अपने दम पर एक थिएटर कंपनी चला पाऊंगा, क्योंकि इसके  लिए संगठन की आवश्यकता थी। मेरे लिए तो यह तक सुनिश्चित नहीं था कि मैं आगे नाटकों में काम करना जारी रख पाऊंगा या नहीं। मुझे बस इतना पता है कि मुझे स्टेज से प्यार था। वहां होना और नाटक के सदस्यों के साथ सामंजस्य बनाकर पूरी प्रस्तुति देना एक कमाल का अनुभव होता था। मैंने अन्य लोगों के नाटकों में भी काम किया है। इससे  ज्यादा खुशी मुझे किसी और चीज से नहीं मिलती थी। यही वजह है कि बेन और मुझे यह अहसास हुआ कि हमें खुद अपने लिए नाटक बनाते रहना चाहिए।’ 

शुरुआत में मुंबई में प्रदर्शन करना नामुमकिन था, लेकिन पृथ्वी थिएटर ने चीजों को बदल दिया। प्रतिष्ठित थिएटर के बारे में बात करते हुए नसीर कहते हैं, ‘पृथ्वी थिएटर हमारे लिए एक वरदान की तरह था, क्योंकि हम अब नियमित रूप से नाटक करने के बारे में सोच सकते थे। मैं मोटली थिएटर के  अभी तक बने रहने का श्रेय पृथ्वी को देता हूं, क्योंकि यह दुनिया का एकमात्र ऐसा थिएटर है, जो मुनाफा कमाने के लिए नहीं बनाया गया था। एक समय ऐसा भी था, जब मैं व्यावसायिक फिल्मों में बहुत व्यस्त था। लेकिन रंगमंच मेरे लिए जीने की एक उम्मीद की तरह था। मुझे डर था कि कहीं मैं रूटीन फिल्में करने वाला एक औसत दर्जे का अभिनेता बनकर न रह जाऊं। मैंने अपने करियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया है, जिनमें से 150 फिल्मों में काम करने की वजह से मैं शर्मिंदा महसूस करता हूं। लेकिन मैं इससे इनकार नहीं कर सकता कि वे फिल्में मेरी ही पसंद थीं। साथ ही मुझे इस बात पर भी फख्र्र है कि मैंने कभी भी रंगमंच को अपनी प्राथमिकताओं में नीचे नहीं किया। कई बार ऐसा भी हुआ, जब मैं सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक फिल्म सेट पर रहने के बाद रात 9 बजे पृथ्वी थिएटर में नाटक करने के लिए जाता था।’

पिछले चार दशकों में ‘मोटली थिएटर’ ने ‘डियर लायर’, ‘इस्मत आपा के नाम’, ‘मंटो...इस्मत हाजिर है’ और ‘आइंस्टीन’ जैसे कई बेहतरीन नाटकों का निर्माण कर चुका है। नसीर कहते हैं,‘नाटककार-निर्देशक सत्यदेव दुबे और अब्राहिम अलकाजी ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। मैं दुबे जी का दिल से आभारी हूं। वह एक अच्छे अभिनेता नहीं थे, लेकिन अभिनय के बारे में बहुत कुछ जानते थे। अलकाजी प्रभावशाली चीजें करने में विश्वास करते थे, जबकि दुबे जी सादगी पसंद प्रस्तुतियों में विश्वास करते थे।’ नसीर आगे कहते हैं,‘मैंने यही सीखा है कि संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी कभी मत बनने दो, हो सके तो इसे अपनी ताकत बनाओ।’ 


 

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  • Web Title:Naseeruddin says theater is my hope for life