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‘आर्टिकल 15’ में दबंग पुलिसवाले की भूमिका निभाने वाले आयुष्मान खुराना बोले- खुश हूं, संतुष्ट भी

हाल ही में रिलीज हुई आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘आर्टिकल 15’ को जहां लोगों ने हाथोहाथ लिया, वहीं इसने अच्छा पैसा भी कमाया। यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। देखा जाए तो साल 2018 आयुष्मान खुराना के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। जहां इस साल उनकी फिल्म ‘अंधाधुन’ को अप्रत्याशित सफलता मिली, वहीं फिल्म ‘बधाई हो’ को उसके बोल्ड विषय के लिए जमकर सराहा गया। अब जातिगत असमानताओं और जाति आधारित अपराधों पर आधारित फिल्म ‘आर्टिकल 15’ में उन्होंने एक दबंग पुलिसवाले की भूमिका को दमदार तरीके से निभाया। पेश हैं आयुष्मान से एक रोचक बातचीत के कुछ चुनिंदा हिस्से।

हर कोई कह रहा है कि ‘आर्टिकल 15’ आपके अब तक के करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। क्या इसकी वजह इसका महत्वपूर्ण विषय है? क्या आपको लगता है कि इस तरह की फिल्म में काम करने का नतीजा अच्छा रहता है? 

यह सच है कि मैं अपने करियर में जिस तरह का जोखिम उठाता रहा हूं, उसका फायदा मुझे मिला है। मैं सिर्फ अपने दिल की सुनता हूं। इस फिल्म में काम करने के पीछे सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी एक बड़ी वजह थी। मेरे दिल में इस फिल्म से व्यावसायिक मुनाफा कमाने की कोई चाहत नहीं थी। हालांकि मुझे इस बात की खुशी है कि यह फिल्म व्यावसायिक मोर्चे पर भी बेहद शानदार प्रदर्शन कर रही है। इस फिल्म का सफल होना दिखाता है कि अब दर्शक परिपक्व हो चुके हैं और वे कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जिससे उनमें नए विचारों का संचार हो। 

आपको अब बॉलीवुड के ऐसे एक्टर्स की फेहरिस्त में शामिल कर लिया गया है, जिनका फिल्म में होना ही उसकी सफलता की गारंटी माना जाता है। इस पर कैसा महसूस करते हैं? 

ईमानदारी से बताऊं तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं, मैं फिल्मों की व्यावसायिक सफलता के बारे में कभी नहीं सोचता हूं। मैं सिर्फ फिल्म के कथानक के बारे में सोचता हूं। मुझे कथानक की समझ है। मुझे आर्थिक मसलों की समझ नहीं है। पर मुझे ऐसा लगता है कि अगर कथानक अच्छा हो, तो वह आर्थिक रूप से भी मुनाफे का सौदा साबित होता है और आज के जमाने में तो फिल्म के कथानक और आर्थिक सफलता का सीधा संबंध है। मुझे लगता है कि अब लोगों को मेरी कीमत समझ में आ गई है। मैंने खुद को साबित कर दिया है। इससे मुझे भविष्य में और भी विविधतापूर्ण किरदार चुनने का आत्मविश्वास भी मिला है। 

परदे पर पुलिसवाले का किरदार निभाना बहुत सारे कलाकारों का सपना होता है। क्या आपके साथ भी ऐसा ही था?

हां, मैं मानता हूं कि पुलिसवाले का किरदार निभाना बहुत सारे कलाकारों का सपना होता है। मैं भी यह किरदार निभाना चाहता था, पर फिल्मी नहीं, वास्तविक तरीके से।  फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं लखनऊ और आसपास के इलाकों के कुछ आईपीएस अधिकारियों से मिला था। मैं उनके ऑफिस में बैठता था और इस बात पर गौर करता था कि वहां क्या चल रहा है। ऐसा करना मेरे लिए फायदेमंद साबित हुआ। साथ ही मैं दिल्ली के एक आईपीएस अधिकारी से भी मिला जिसने मेरी काफी मदद की।

चूंकि आपने ज्यादा ऐसी फिल्मों मे काम किया है, जो मुख्यधारा से अलग हटकर रही हैं, क्या आपको लगता है कि अब कोई फिल्मकार आपसे विशुद्ध व्यावसायिक फिल्मों के  लिए भी संपर्क करेगा? 

विशुद्ध व्यावसायिक फिल्मों के प्रस्ताव मेरे पास आते रहते हैं। पर मुझे पसंद ही ऐसी फिल्में आती हैं, जो कुछ अलग हटकर होती हैं। अगर मैं किसी विशुद्ध व्यावसायिक फिल्म में भी काम करूंगा, तब भी मैं यह चाहूंगा कि उसमें कुछ अलग हो। अगर ऐसा नहीं होता है, तो मैं उसमें काम नहीं करूंगा। इसलिए मुझे लगता है कि जिस तरह की फिल्में करके मैंने अपनी साख बनाई है, उनमें काम करना मुझे जारी रखना चाहिए। 

पिछला साल जहां आपके लिए व्यावसायिक सफलता लेकर आया, वहीं व्यक्तिगत जिंदगी में कुछ मुश्किलें भी लाया। आपकी पत्नी ताहिरा को कैंसर होने की बात भी सामने आई। काम के साथ-साथ ताहिरा को समय देना कितना मुश्किल था?

वह समय काफी कठिन रहा। ताहिरा मेरी ऊर्जा का स्रोत हैं। उनकी बीमारी के वक्त मैं हर समय उनके साथ रहना चाहता था, पर उन्होंने मुझ पर दबाव डाला कि मैं अपने काम पर भी पर्याप्त ध्यान देता रहूं।

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  • Web Title:I am happy and satisfied says Ayushma Khurana