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विक्रमादित्य के नौकरशाहों पर बयान से हिमाचल में सियासी घमासान, बचाव में उतरे शिक्षा मंत्री

विक्रमादित्य के नौकरशाहों पर बयान से हिमाचल में सियासी घमासान, बचाव में उतरे शिक्षा मंत्री

संक्षेप:

हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह की बाहरी राज्यों के नौकरशाहों को लेकर की गई टिप्पणी ने मचे सियासी घमासान के बीच अब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर विक्रमादित्य सिंह के बचाव में सामने आए हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह एक कुशल और प्रभावी मंत्री हैं।

Jan 16, 2026 02:21 pm ISTPraveen Sharma लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री विक्रमादित्य सिंह की बाहरी राज्यों के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणी ने राज्य की सियासत और अफसरशाही दोनों में हलचल मचा दी है। इस बयान को लेकर जहां एक ओर नौकरशाही खुलकर सामने आ गई है, वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के भीतर भी मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। इस पूरे विवाद में अब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में सामने आए हैं, जबकि इससे पहले सरकार के तीन मंत्री उनके बयान पर आपत्ति जता चुके हैं।

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रोहित ठाकुर बोले- कुशल मंत्री हैं विक्रमादित्य, सीएम दूर करें संशय

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह एक कुशल और प्रभावी मंत्री हैं। उनका कहना है कि अगर किसी मंत्री के मन में किसी मुद्दे को लेकर कोई बात या संशय है तो उसका स्पष्ट होना जरूरी है। रोहित ठाकुर ने इस पूरे विवाद को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया है कि वह सरकार के मुखिया होने के नाते स्वयं इस मामले को स्पष्ट करें, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।

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रोहित ठाकुर ने यह भी कहा कि हिमाचल के विकास में न सिर्फ प्रदेश के अधिकारियों बल्कि बाहर से आए अधिकारियों का भी अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में काम करने वाले अधिकारी सकारात्मक या नकारात्मक सोच के हो सकते हैं और यह जरूरी नहीं कि नकारात्मक सोच केवल बाहर से आए लोगों में ही हो।

विक्रमादित्य सिंह के विरोध में तीन मंत्री

इससे पहले विक्रमादित्य सिंह की टिप्पणी पर सरकार के तीन मंत्री सार्वजनिक रूप से असहमति जता चुके हैं। इनमें ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, राजस्व व बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी और शहरी विकास मंत्री राजेश धर्माणी शामिल हैं। इन मंत्रियों का कहना है कि अधिकारियों को उनके मूल राज्य के आधार पर निशाना बनाना उचित नहीं है और इससे प्रशासनिक तंत्र पर गलत संदेश जाता है।

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क्या है पूरा मामला

इस पूरे विवाद की शुरुआत लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। इस पोस्ट में उन्होंने यूपी और बिहार के कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि ऐसे अधिकारी “हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं” और उन्हें प्रदेश के हितों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा था कि ऐसे अधिकारियों से समय रहते निपटने की जरूरत है, वरना हिमाचल के हित प्रभावित होंगे।

इस पोस्ट के सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में असहजता फैल गई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश में कार्यरत आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की शीर्ष संस्थाओं आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन और आईपीएस एसोसिएशन ने अलग-अलग सार्वजनिक बयान जारी कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

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अफसर संगठनों का कड़ा विरोध

आईपीएस एसोसिएशन ने कहा कि मंत्री का बयान हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अनावश्यक और कृत्रिम विभाजन पैदा करता है। एसोसिएशन ने याद दिलाया कि अखिल भारतीय सेवाएं संविधान द्वारा स्थापित हैं और उनका उद्देश्य पूरे देश में निष्पक्ष और एकीकृत प्रशासन देना है। केवल मूल राज्य के आधार पर अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाना गलत और हतोत्साहित करने वाला है।

आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी चिंता जताते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को आलोचना का अधिकार है, लेकिन अधिकारियों को क्षेत्रीय पहचान के आधार पर चिन्हित करना अखिल भारतीय सेवाओं की मूल भावना के खिलाफ है। दोनों संगठनों ने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।

विक्रमादित्य सिंह का आईपीएस एसोसिएशन पर पलटवार, कहा-नहीं चाहिए सुरक्षा

अफसर संगठनों के विरोध के बाद विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि अफसरशाही शासक बनने का प्रयास न करे और उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। आईपीएस एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसी आईपीएस अधिकारी की ड्यूटी न लगाने की मांग पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल के लोग इतने कमजोर नहीं हैं कि उन्हें सुरक्षा की जरूरत पड़े। वह बिना पुलिस सुरक्षा के रह सकते हैं और प्रदेश की जनता का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

छह बार सीएम रहे वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं विक्रमादित्य सिंह

विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार में लोक निर्माण मंत्री हैं। 38 वर्षीय विक्रमादित्य सिंह हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं। वीरभद्र सिंह का वर्ष 2021 में 87 साल की आयु में निधन हुआ था। विक्रमादित्य सिंह की मां प्रतिभा सिंह पूर्व सांसद और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रह चुकी हैं, हालांकि लगभग दो महीने पहले उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी जगह नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की गई। विक्रमादित्य सिंह दूसरी बार विधायक बने हैं और कांग्रेस में उन्हें एक प्रमुख युवा नेता के रूप में देखा जाता है।

रिपोर्ट : यूके शर्मा

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लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें

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