‘मजबूत मंशा के अभाव में भी डाइंग डिक्लेरेशन…’; SC ने पलटा हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला

Jan 16, 2026 12:10 pm ISTPraveen Sharma नई दिल्ली, भाषा
share Share
Follow Us on

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी मामले में व्यक्ति का मृत्यु-पूर्व विश्वसनीय और भरोसेमंद अंतिम बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) मौजूद है, तो मकसद के ठोस सबूत न होने पर भी यह अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता।

‘मजबूत मंशा के अभाव में भी डाइंग डिक्लेरेशन…’; SC ने पलटा हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी मामले में व्यक्ति का मृत्यु-पूर्व विश्वसनीय और भरोसेमंद अंतिम बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) मौजूद है, तो मकसद के ठोस सबूत न होने पर भी यह अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने चमन लाल को अपनी पत्नी सरो देवी पर केरोसिन डालकर आग लगाने के मामले में बरी किए जाने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। बेंच ने कहा कि मकसद का महत्व मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामलों में होता है।

निचली अदालत का फैसले बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें चमन लाल को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मृत्यु पूर्व अंतिम बयान पर संदेह जताते हुए उसे बरी किया गया था।

हाईकोर्ट ने मृत्यु-पूर्व अंतिम बयान पर दो कारणों से संदेह जताया था– पहला, बयान दर्ज किए जाने के समय में कथित असंगति; और दूसरा यह संदेह कि क्या चंबा जिले के तहसीलदार-सह-कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने स्वयं यह बयान दर्ज किया या केवल इसे लिखवाया।

हाईकोर्ट के दोनों संदेह टिकाऊ नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा उठाए गए दोनों संदेह टिकाऊ नहीं हैं। बेंच ने कहा, ‘‘परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामलों में मकसद का महत्व प्रमुख होता है। जहां मृत्यु-पूर्व विश्वसनीय और भरोसेमंद अंतिम बयान के रूप में प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद है, वहां मकसद के ठोस प्रमाण का अभाव अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता।’’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य दिखाते हैं कि प्रतिवादी ने पत्नी के साथ लगातार झगड़े किए। उसे अपमानित किया और उसके लिए “कंजरी” (बुरे चरित्र की महिला) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए दुर्व्यवहार किया और बार-बार ससुराल से निकालने की धमकी दी।

डाइंग डिक्लेरेशन में वैवाहिक कलह और दुर्व्यवहार का उल्लेख

बेंच की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस महादेवन ने कहा कि मृत्यु-पूर्व अंतिम बयान में लगातार वैवाहिक कलह और दुर्व्यवहार का उल्लेख है, जो अपराध के लिए संभावित पृष्ठभूमि प्रदान करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “किसी भी स्थिति में, अभियोजन पक्ष को मकसद को बिल्कुल सटीक रूप से साबित करने की जरूरत नहीं है। मकसद को पूरी तरह साबित न कर पाने से विश्वसनीय और ठोस मामले की ताकत कम नहीं हो जाती।”

सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर संतोष जताया कि सारो देवी का मृत्यु-पूर्व अंतिम बयान स्वैच्छिक, सच्चा और विश्वसनीय है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 7 दिसंबर 2009 को चमन लाल ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रामपुर गांव में अपने घर पर सरो देवी पर कथित रूप से केरोसिन छिड़कर उन्हें आग लगा दी थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर रूप से झुलस जाने के कारण उनकी मौत हो गई।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

;;;