ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News हिमाचल प्रदेशसभी जानते हैं कि तिब्बत चीन का हिस्सा कतई नहीं, अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के चीफ का अटैक

सभी जानते हैं कि तिब्बत चीन का हिस्सा कतई नहीं, अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के चीफ का अटैक

अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष माइकल मैककॉल ने बुधवार को कहा कि सभी जानते हैं कि तिब्बत चीन का हिस्सा नहीं है। तिब्बती लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार है। जानें उन्होंने क्या कहा...

सभी जानते हैं कि तिब्बत चीन का हिस्सा कतई नहीं, अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के चीफ का अटैक
tibetan spiritual leader dalai lama with former us house of representatives speaker nancy pelosi
Krishna Singhभाषा,शिमलाWed, 19 Jun 2024 07:08 PM
ऐप पर पढ़ें

अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष माइकल मैककॉल ने बुधवार को कहा कि तिब्बती लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार है। तिब्बतियों की एक अनूठी संस्कृति और धर्म है। उन्हें अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने में सक्षम होना चाहिए। धर्मशाला में तिब्बतियों के धार्मिक गुरु दलाई लामा से मुलाकात करने वाले अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मैककॉल ने कहा कि यही कारण है कि हम चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की अवहेलना करते हुए यहां पहुंचे हैं।

माइकल मैककॉल ने धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा कि सीसीपी द्वारा हिंसा किये जाने और दलाई लामा को घर से जबरन निकाले जाने के बावजूद वह (तिब्बती धर्मगुरु) सहिष्णुता, शांति और क्षमा का उपदेश देना जारी रखे हुए हैं। लोकतंत्र में लोग स्वतंत्र होते हैं, जबकि वे (तिब्बती) निरंकुश शासन के तहत गुलाम हैं।

मैककॉल ने कहा कि तिब्बती लोगों का एक अलग धर्म, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान है तथा उन्हें अपने भविष्य के बारे में अपनी राय रखने का अधिकार होना चाहिए। आपको अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने में सक्षम होना चाहिए और यही कारण है कि हम आज सीसीपी की चेतावनी की अवहेलना करते हुए यहां आए हैं।

माइकल मैककॉल ने कहा कि हमारे प्रतिनिधिमंडल को सीसीपी से एक पत्र मिला, जिसमें हमें यहां न आने की चेतावनी दी गई थी। उन्होंने अपना झूठा दावा दोहराया कि तिब्बत 13वीं शताब्दी से चीन का हिस्सा है, लेकिन सीसीपी की चेतावनियों से प्रभावित हुए बिना हम आज यहां हैं। दलाई लामा, तिब्बत के लोग और अमेरिका, सभी जानते हैं कि तिब्बत, चीन का हिस्सा कतई नहीं है।

मैककॉल ने कहा कि इस यात्रा का समय इससे बेहतर नहीं हो सकता था, क्योंकि पिछले हफ्ते प्रतिनिधि सभा और अमेरिकी कांग्रेस ने तिब्बत (विवाद) समाधान विधेयक पारित किया था। इसमें स्पष्ट किया गया है कि तिब्बत की अपनी अनूठी संस्कृति, भाषा और धर्म है। तिब्बत को आत्मनिर्णय का अधिकार है। आने वाले दिनों में इस विधयेक पर हस्ताक्षर होगा। इस विधेयक में तिब्बत के बारे में सीसीपी के दुष्प्रचार को आक्रामक रूप से चुनौती देने की जरूरत है।

मैककॉल ने कहा कि सीसीपी तिब्बती संस्कृति को खत्म करने और तिब्बती लोगों को जबरन अपने नियंत्रण में लाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। भारतवासियों की दयालुता के कारण ही परम पावन दलाई लामा और उनके लोग यहां स्वतंत्र रूप से रह पाए और मुकदमे के भय के बिना अपने धर्म का पालन कर पाए। मुझे अब भी उम्मीद है कि एक दिन दलाई लामा और उनके लोग शांतिपूर्वक तिब्बत वापस लौटेंगे।

दलाई लामा से मिलने और चर्चा करने वाले प्रतिनिधिमंडल में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की पूर्व अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी और सांसद मैरिएनेट मिलर, ग्रेगरी मीक्स, निकोल मैलियोटाकिस, जिम मैकगवर्न और एमी बेरा शामिल थे। मैककॉल ने दलाई लामा को एक उपहार भेंट करते हुए कहा कि आपमें से कई लोगों की तरह, मैं भी चाहता हूं कि यह बैठक आपके गृह देश तिब्बत में हो, लेकिन 65 साल पहले चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा तिब्बत पर कब्जा किये जाने और हजारों तिब्बतियों का कत्लेआम करने के बाद आपको भागने पर मजबूर होना पड़ा था।