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दिल्ली के बाद अब हिमाचल में भी जल संकट, हफ्ते में केवल 1 दिन मिल रहा पानी; होटलों में हाहाकार

Shimla water crisis: होटलों में भी पानी की किल्लत खड़ी हो गई है। होटलों में पानी के टैंकरों की डिमांड बढ़ गई है। हालात यह है कि लोगों को पीने के लिए भी दुकानों से पानी खरीदना पड रहा है।

दिल्ली के बाद अब हिमाचल में भी जल संकट, हफ्ते में केवल 1 दिन मिल रहा पानी; होटलों में हाहाकार
Devesh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,शिमलाTue, 18 Jun 2024 11:23 AM
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देश की राजधानी दिल्ली के बाद अब हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रचंड गर्मी और लंबे समय से बादलों के न बरसने से जल संकट पैदा हो गया है। शहर में हफ्ते में केवल एक बार ही पानी की आपूर्ति हो रही है। कई वार्डों में चौथे व पांचवें दिन कुछ समय के लिए ही पानी छोड़ा जा रहा है। जल संकट को देखते हुए नगर निगम प्रशासन टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है। टैंकरों से पानी भरने के लिए लोगों की लंबी लाइनें लग रहीं हैं।

होटलों में भी पानी की किल्लत
पीक पर चल रहे टूरिस्ट सीजन के बीच होटलों में भी पानी की किल्लत खड़ी हो गई है। होटलों में पानी के टैंकरों की डिमांड बढ़ गई है। हालात यह है कि लोगों को पीने के लिए भी दुकानों से पानी खरीदना पड़ रहा है। इसके अलावा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की बावड़ियां पर लोगों की भीड़ जमा होना शुरू हो गई है।

छह साल बाद ऐसी दिक्कत
शिमला शहर में यूं तो हर साल गर्मियों में पानी की किल्लत खड़ी हो जाती है। लेकिन इस बार छह साल पहले की तरह जलसंकट के हालात बने हैं। वर्ष 2018 के मई महीने में जलसंकट से यहां स्थिति विकराल हुई थी और पानी के लिए लोगों को तरसना पड़ा था।

पानी क्यों हुआ कम
इस बार समर सीजन में पेयजल स्त्रोतों के सूखने से शिमला में जल संकट की स्थिति खड़ी हुई है। दरअसल शहर को पानी की आपूर्ति करने वाली परियोजनाओं में बहुत कम पानी रह गया है। शहर को रोजाना करीब 45 एमएलडी पानी की जरूरत रहती है। जबकि इन परियोजनाओं से महज 20 से 25 एमएलडी पानी मिल रहा है। शिमला शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में भी पानी को लेकर हाहाकार मचा है। कई जगह 10 दिन से पानी नहीं आ रहा है और लोगों को नहाने व शौचालय जाने तक के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है।

शिमला में पानी का जिम्मा संभालने वाली कम्पनी जल प्रबंधन निगम शहरवासियों को पानी की बचत करने की सलाह दे रही है। कम्पनी द्वारा शहर में तीन दिन बाद पानी की आपूर्ति का दावा किया जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पेयजल कम्पनी के मुताबिक शहर की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना गिरी से पानी का स्तर घटने से पानी की दिक्कत आ रही है। गिरी पेयजल परियोजना से शहर के लिए पानी की आपूर्ति 16 एमएलडी से घटकर 8 से 10 एमएलडी रह गई है। सभी पेयजल परियोजनाओं से शहर को औसतन 25 एमएलडी पानी आ रहा है, जो सामान्य से 20 एमएलडी कम है।

शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि शिमला में पानी की समस्या चल रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को तीसरे व चौथे दिन पानी दिया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भयंकर गर्मी के कारण जल परियोजनाओं में पानी का स्तर कम हो गया है। उनके मुताबिक अगले साल तक सतलुज से शिमला में पानी आ जायेगा तो पानी की समस्या काफी हद तक कम हों जाएगी। इसके अलावा शिमला के शौचालय में भी पीने का ही पानी उपयोग में लाया जाता है। इस पर भी निगम अलग से पाइप बिछाने की योजना बना रहा है। शिमला में टैंकरों से भी पानी की सप्लाई की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द बारिश होगी और पानी के संकट से निजात मिलेगी।

शिमला सहित प्रदेश में पानी की कमी को लेकर डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सभी अधिकारी व कर्मचारियों को फील्ड में उतार दिया गया है और सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आईपीएच की 10067 स्कीमें है जिनमें से 1767 स्कीमों का पानी गर्मी के कारण काफी निचले स्तर पर चल रही है बावजूद इसके पानी की नियमित बहाली सुनिश्चित की जा रही है। टैंकर के माध्यम से भी लोगों को पानी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है ताकि लोगों को ज्यादा दिक्कतें न हो।

रिपोर्ट- यूके शर्मा