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कंगना से हार पर बोले विक्रमादित्य, लड़ना नहीं चाहता था चुनाव, सोनिया गांधी की वजह से उतरा

हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की कंगना रनौत से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। उन्होंने कभी टिकट की मांग नहीं की।

कंगना से हार पर बोले विक्रमादित्य, लड़ना नहीं चाहता था चुनाव, सोनिया गांधी की वजह से उतरा
kangana ranaut mandi seat ahead by 31 thousand votes against vikramaditya singh
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,शिमलाSat, 08 Jun 2024 05:27 PM
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हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की कंगना रनौत से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। उन्होंने कभी टिकट की मांग नहीं की। उन्हें चुनाव लड़ाने का फैसला पार्टी की सीनियर नेता सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिया। उन्होंने कहा कि आपको मंडी से चुनाव लड़ना है। एक इंटरव्यू में विक्रमादित्य सिंह ने अपनी हार पर कई सवालों के जवाब दिए।

जब विक्रमादित्य सिंह से पूछा गया कि इस सीट का प्रतिनिधत्व आपके पिता और माता ने की है। आप अपनी हार को कितना बड़ा झटका मानते हैं। इस पर विक्रमादित्य का कहना था कि यह एक ऐसा अनुभव है जो लंबी अवधि में मेरी मदद करेगा। वह एक योद्धा हैं, जो युद्ध के मैदान से नहीं भागता। जीतना और हारना खेल का हिस्सा है। हमारा वोट शेयर कई गुना बढ़ने के बावजूद वह हार गए। यह हार कोई झटका नहीं है। वह सिर्फ 34 साल का हैं और उन्हें बहुत आगे जाना है। यहां तक ​​कि उनके माता-पिता आदरणीय वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह को भी इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वे भी तीन-तीन बार जीते।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वह लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। उन्होंने कभी टिकट की मांग नहीं की। लेकिन, पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी महासचिव प्रियंका गांघी वाड्रा ने कहा कि उन्हें मंडी से चुनाव लड़ना चाहिए। उनके कहने पर ही वह चुनाव लड़ने के लिए राजी हुए। हालांकि कांग्रेस उनकी मां प्रतिभा सिंह को यहां से चुनाव लड़ाना चाहती थी, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी ने युवा चेहरे के रूप में विक्रमादित्य सिंह को यहां से लड़ने के लिए राजी किया। 

अपने चुनाव अभियान का जिक्र करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा,  'मैंने कांग्रेस की विचारधारा नहीं छोड़ी है। मैं राम मंदिर अभिषेक समारोह में भाग लेने इसलिए गया था, क्योंकि इसमें मेरे दिवंगत पिता ने योगदान दिया था। चुनाव अभियान के दौरान हमने जो अनुसरण किया वह कोई प्रचार शैली नहीं थी, बल्कि सनातन संस्कृति का पालन करने वाले हिमाचल के लगभग 97 प्रतिशत लोगों की भावना थी। मेरा मानना ​​है कि इससे मुझे फायदा हुआ। जय श्री राम और हिंदुत्व भाजपा के ट्रेडमार्क नहीं हैं।'

कंगना को लेकर दिए गए शुद्धिकरण वाले बयान पर विक्रमादित्य ने कहा कि वह (कंगना रनौत) गोमांस खाने के बारे में खुद एक बार स्वीकार कर चुकी थीं। शुद्धिकरण का उल्लेख हमारे शास्त्रों में मिलता है। मुझे नहीं पता कि वह क्या सोचती है, लेकिन मैंने पूरे अभियान के दौरान कभी भी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघी। मैंने उन्हें पूरा सम्मान दिया।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा, 'मैं अपनी हार की जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन पार्टी भी मायने रखती है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग मुद्दों पर लड़े जाते हैं। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने मेरे प्रचार में काफी समय दिया। यहां तक ​​कि वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी दो रैलियां और रोड शो किए। कहा कि पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने इस सीट को प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया था। उन्होंने 'मंडी की बेटी' आदि नारों से इसे क्षेत्रीय रंग दे दिया। पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दौरों से बीजेपी को मदद मिली। मुझे अकेले ही इनसे निपटना पड़ा।'

जब उनसे पूछा गया कि वह कंगना को क्या संदेश चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना एक बात है, लेकिन चौबीसों घंटे वहां रहना दूसरी बात है। अब वह निर्वाचित हो गई हैं तो उन्हें वहां समय देना होगा। वह मंडी को कितना समय देती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। मैंने मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई दी। उन्हें व्यक्तिगत रूप से शुभकामनाएं देना अभी बाकी है।