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Himachal Election: भाजपा के लिए फतेहपुर सीट बनी चुनौती, बागी बिगाड़ सकते हैं खेल

फतेहपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास भाजपा के लिए मुफीद नहीं रहा है। इस बार भी बागियों के पोस्टर वार को लेकर यह सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। जानें इस सीट पर क्या बन रहे समीकरण...

Himachal Election: भाजपा के लिए फतेहपुर सीट बनी चुनौती, बागी बिगाड़ सकते हैं खेल
Krishna Singhपीटीआई ,फतेहपुरTue, 08 Nov 2022 04:41 PM

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है, वैसे वैसे चुनावी वार-पलटवार तीखा होता जा रहा है। मौजूदा वक्त में कांगड़ा जिले की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर स्थित फतेहपुर विधानसभा सीट चर्चा के केंद्र में है। इस विधानसभा क्षेत्र को पोस्टर वार, विवादित वीडियो क्लिप और भाजपा की 'अंदरूनी खींचतान' ने हॉट सीट बना दिया है। फतेहपुर जो अपने पोंग बांध और वेटलैंड के लिए जाना जाता है, जहां साइबेरिया और उत्तरी चीन से प्रवासी पक्षी आते हैं, यहां भाजपा के टिकट पर राकेश पठानिया भी माइग्रेटेड उम्मीदवार के तौर पर सामने आए हैं। 

नूरपुर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके भाजपा उम्मीदवार राकेश पठानिया के मैदान में आने के बाद से फतेहपुर विधानसभा सीट राजनीतिक आकर्षण का केंद्र बन गई है। भाजपा की ओर से पठानिया को माइग्रेटेड उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतारे जाने से पूर्व राज्यसभा सांसद कृपाल परमार काफी निराश हैं। पठानिया का कम से कम 15 पंचायत क्षेत्रों में दबदबा है, जो परिसीमन से पहले उनके नूरपुर निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा थे।

फतेहपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट दावेदारों में परमार सबसे आगे चल रहे थे। लेकिन, भाजपा ने बगावती रुख के चलते परमार को चार अन्य बागियों के साथ छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। वैसे इस सीट पर भाजपा का रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है। कांगड़ा (Kangra) जिले के तहत आने वाली इस सीट पर 2012 से कांग्रेस जीतती रही है। साल 2021 के उपचुनाव में भी यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। अब पठानिया और परमार के बीच पोस्टर वार को लेकर यह सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर कृपाल परमार छाए हुए हैं। 

दरअसल, कांग्रेस की ओर से हाल ही में ट्विटर पर एक वीडियो क्लिप जारी किया गया था। इसमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी की आवाज परमार के साथ एक कॉल में सुनी गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इसमें पूर्व भाजपा नेता पर भावनात्मक रूप से चुनाव नहीं लड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करने के लिए "अपनी शक्ति का दुरुपयोग" कर रहे हैं। हालांकि परमार ने इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। 

परमार के करीबी सहयोगी ने कहा कि वीडियो क्लिप 30 अक्टूबर की है। परमार ने इतना जरूर कहा कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 1,284 वोटों के कम अंतर से हारने के बाद भी उन्हें राज्य भाजपा नेतृत्व द्वारा दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा- उम्मीद थी कि मुझे 2021 के उप-चुनाव में टिकट दिया जाएगा, लेकिन पार्टी ने तब मुझे नजरअंदाज किया। अब एकबार फिर ऐसा किया गया है। मैं चुनाव नहीं लड़ने पर विचार कर रहा था लेकिन पार्टी ने पठानिया माइग्रेटेड उम्मीदवार के तौर चुनावी समर में उतार दिया। हालांकि पठानिया ने पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह के दावों का खंडन किया। 

इस सीट पर 2021 के उप-चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले बलदेव ठाकुर को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। भाजपा के राकेश पठानिया ने कहा कि मेरे द्वारा किए गए काम ही मेरी पहचान हैं। मैंने नूरपुर को एक खेल शहर के रूप में विकसित किया है। फतेहपुर में एक भी खेल का मैदान नहीं है। मैं फतेहपुर में खेल के पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं प्रदान करूंगा। हालांकि कांग्रेस के गढ़ में भाजपा के लिए चुनौतियां बड़ी हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर एक बार फ‍िर से मौजूदा व‍िधायक भवानी स‍िंह पठान‍िया को मैदान में उतारा है।