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हिमाचल में हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा, युवाओं और बच्चों के लिए भी बड़े ऐलान

सुक्खू सरकार ने सोमवार को जिला सिरमौर के ट्रांसगिरी क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के संबंध में अधिसूचना जारी की। सुक्खू सरकार ने नए साल के पहले दिन सोमवार कई बड़े फैसले लिए।

हिमाचल में हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा, युवाओं और बच्चों के लिए भी बड़े ऐलान
Krishna Singhलाइव हिंदुस्तान,शिमलाMon, 01 Jan 2024 10:59 PM
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हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने नए साल के पहले दिन सोमवार कई बड़े फैसले लिए। सुक्खू सरकार ने सोमवार को जिला सिरमौर के ट्रांसगिरी क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के संबंध में अधिसूचना जारी की। यही नहीं सुक्खू सरकार (Himachal Pradesh CM Sukhvinder Singh Sukhu Govt) ने सोमवार को ही कैबिनेट की बैठक में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए योजना लाने का निर्णय लिया। साथ ही सरकार ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण में सौर ऊर्जा योजना को मंजूरी प्रदान कर दी। 

केंद्र की मुहर के बाद लिया फैसला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नए साल के पहले दिन सोमवार को कैबिनेट बैठक के बाद सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मिलने के 10 घंटे के भीतर कैबिनेट ने हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने का फैसला लिया है। हम 3 जनवरी को नाहन का दौरा कर वहां के लोगों से इस विषय पर बात करेंगे। हाटी समुदाय लंबे समय से जनजातीय दर्जा दिए जाने की मांग कर रहा था।

हाटी समुदाय को जनजाति दर्जा देने को लेकर अधिसूचना जारी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का था। केंद्र से आई अधिसूचना में त्रुटि के कारण प्रदेश सरकार हिमाचल में केंद्र की अधिसूचना को लागू नहीं कर पा रही थी। ऐसे में प्रदेश सरकार ने केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद जैसे ही केंद्र से स्पष्टीकरण आया तो प्रदेश सरकार ने बिना देरी के हाटी समुदाय को जनजाति दर्जा देने को लेकर अधिसूचना जारी कर दी।

1967 से चल रहा था संघर्ष
बता दें कि ट्रांसगिरी क्षेत्र में हाटी समुदाय के लोग 1967 से उत्तराखंड के जौनसार बाबर को जनजाति दर्जा मिलने के बाद से संघर्षरत थे। लगातार कई वर्षों तक संघर्ष के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने हाटी समुदाय की मांग को 14 सितंबर 2022 को अपनी मंजूरी दी थी। उसके बाद केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को इस बिल को लोकसभा से पारित करवाया। उसके बाद यह बिल राज्यसभा से भी पारित हो गया। राज्यसभा से पारित होने के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसे राष्ट्रपति के लिए भेजा गया था। 9 दिनों में ही राष्ट्रपति ने विधेयक पर लगाई मुहर लगा दी थी।

हाटी समुदाय की स्थिति
हाटी समुदाय में करीब 2 लाख लोग 4 विधानसभा क्षेत्र शिलाई, श्रीरेणुकाजी, पच्छाद तथा पांवटा साहिब में रहते हैं। जिला सिरमौर की कुल 269 पंचायतों में से ट्रांसगिरी में 154 पंचायतें आती हैं। इन 154 पंचायतों की 14 जातियों तथा उप जातियों को एसटी संशोधित विधेयक में शामिल किया गया है।

दिव्यांग बच्चों को बेहतरीन शिक्षा योजना को मंजूरी
सुक्खू सरकार ने नए साल के पहले दिन बुलाई गई कैबिनेट बैठक में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए योजना लाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई है, जिससे यह बच्चे शिक्षा से वंचित न रहें। स्कूली शिक्षा के साथ ही उच्चतम शिक्षा की ओर भी सरकार इन्हें सुविधाएं मुहैया कराएगी। प्रदेश सरकार का दिव्यांग बच्चों को अत्याधुनिक शिक्षा मुहैया करवाने पर जोर रहेगा।

युवाओं को सोलर पावर प्रोजेक्ट लगाने पर इक्विटी देगी सरकार
नए साल की पहली कैबिनेट बैठक में सुक्खू सरकार ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण में सौर ऊर्जा योजना को मंजूरी दी। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को अपनी जमीन पर सोलर पावर प्रोजेक्ट लगाने को सरकार मदद करेगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि इस योजना से तीन बीघा या अधिक की जमीन पर यदि युवा सोलर पावर प्रोजेक्ट लगाते हैं तो सरकार सिर्फ प्रोजेक्ट को लगाने के लिए केवल 10 फीसदी सिक्योरिटी मनी लेगी और युवाओं को प्रतिमाह 20 हजार से 1 लाख तक की आय भी सुनिश्चित होगी। 

40 हजार से लेकर एक लाख तक की आमदनी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह योजना 100 किलोवाट से 500 किलोवाट तक क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं (एसपीपी) को स्थापित करने पर केंद्रित है। योजना के तहत प्रतिभागियों को तीन बीघा भूमि पर 100 किलोवाट क्षमता की परियोजना स्थापित करने के लिए 25 वर्षों तक लगभग 20,000 रुपये मासिक आय और क्रमशः पांच और दस बीघा भूमि में स्थापित की जाने वाली 200 किलोवाट और 500 किलोवाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए 40,000 रुपये व एक लाख प्रतिमाह मासिक आय प्राप्त होगी।
 
बैंक कर्ज उपलब्ध कराने में मदद
ऊर्जा परियोजनाओं (एसपीपी) को स्थापित करने पर केंद्रित है। यह योजना राज्य के अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मील पत्थर साबित होगी। यह योजना 21 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं को उद्यमशीलता के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ कौशल विकास को प्रोत्साहित करेगी। योजना के तहत, वित्तपोषण में राज्य सरकार द्वारा 70 प्रतिशत बैंक कर्ज उपलब्ध कराने में सहायता और राज्य सरकार द्वारा 30 प्रतिशत इक्विटी प्रदान की जाएगी। सौर ऊर्जा डेवलपर को केवल 10 प्रतिशत जमानत राशि जमा करवानी होगी। यह जमानत राशि 25 वर्षों के उपरान्त डेवलपर को वापिस कर दी जाएगी।

8 जनवरी से 12 फरवरी तक सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Himachal Pradesh CM Sukhvinder Singh Sukhu) ने बताया कि कैबिनेट ने 8 जनवरी से पूरे राज्य में ‘सरकार गांव के द्वार’ शुरू करने को भी स्वीकृति प्रदान की। इस दौरान 12 फरवरी तक गांवों के समूहों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ संवाद किया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि 8 जनवरी से 12 फरवरी तक सरकार के सभी विधायक, चुनाव में रहे प्रत्याशी और मंत्री सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के तहत गांव गांव जाकर सरकार की 1 साल की योजनाओं की जानकारी देंगे और समस्याओं का भी निपटारा करेंगे।

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