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मंडी लोकसभा सीट पर कैसे आसान हुई कंगना की राह, विरासत की सियासत पर कौन से इलाके पड़े भारी?

कंगना रनौत ने बुशहर रियासत के राजा विक्रमादित्य को चुनावी जंग में पराजित कर दिया। कंगना रनौत ने 5,37022 मत प्राप्त किए जबकि विक्रमादित्य ने 462267 वोट हासिल किए। जानें कैसे आसान हुई कंगना की राह...

मंडी लोकसभा सीट पर कैसे आसान हुई कंगना की राह, विरासत की सियासत पर कौन से इलाके पड़े भारी?
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Krishna Singhलाइव हिन्दुस्तान,शिमलाTue, 04 Jun 2024 08:39 PM
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सिनेमा के पर्दे पर राजनेत्रियों के किरदार अदा करने वाली सिने अभिनेत्री एवं मंडी की बेटी सियासत की जमीन पर भी जीत का परचम फहराया है। बॉलीवुड की क्वीन के नाम से मशहूर कंगना ने बुशहर रियासत के राजा विक्रमादित्य को विरासत की जंग में पराजित कर दिया। अठाहरवीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कंगना रनौत ने 5,37022 मत प्राप्त किए जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी व लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने 462267 मत प्राप्त किए  और वे कंगना से 74755 मतों के अंतर से चुनाव हार गए। 

चारों लोकसभा सीटों पर तीसरी बार क्लीन स्विप
भाजपा ने प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर भगवा परचम फहराकर इतिहास को तीसरी बार दोहराया है। इसके बावजूद मंडी के चुनावी मैदान कंगना के आने और कंगना के विवादित बयानों से प्रदेश की सबसे बड़ी संसदीय सीट देश भर में हॉट सीट बन गई थी। मंडी संसदीय सीट अपने आपमें कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। लोकसभा उपचुनाव में भी यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह यहां से उस समय सांसद बनी थी।

कांग्रेस का गढ़ रही है मंडी सीट 
मंडी संसदीय सीट बीते बीस चुनावों में कांग्रेस चौदह बार और भाजपा पांच बार तथा जनता पार्टी एक बार जीत का परचम फहरा चुकी है। अब कंगना की जीत से भाजपा ने जहां जीत का छक्का लगाया है। वहीं कंगना मंडी की 21वीं सांसद बन गई है। यही नहीं राजकुमारी अमृत कौर और प्रतिभा सिंह के बाद कंगना तीसरी महिला सांसद बन गई, जबकि भाजपा की ओर से पहली महिला सांसद बनने का गौरव कंगना ने हासिल किया है।

अपने ही गढ़ में पिछड़े विक्रमादित्य
2021 में मंडी सीट पर हुए लोकसभा उप चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह को किनौर, रामपुर, लाहुल-स्पीति, आनी, बंजार, मनाली, कुल्लू के अलावा मंडी जिला के करसोग और नाचन विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी। जिसकी वजह से मंडी के सराज, जोगिंद्रनगर, सदर, द्रंग, सुंदरनगर और सरकाघाट की बढ़त भी भाजपा के प्रत्याशी ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर की जीत की पटकथा नहीं लिख पाई थी। मगर इस बार विक्रमादित्य सिंह अपने ही गढ़ में पिछड़ गए ।

केवल चार विधानसभा क्षेत्रों में ही बढ़त ले पाए विक्रमादित्य
विक्रमादित्य सिंह मंडी संसदीय क्षेत्र की 17 में से मात्र चार विधान सभा क्षेत्रों में ही बढ़त ले पाए। जबकि शेष 13 हलकों में कंगना को बढ़त मिली। मंडी जिला की सभी नौ सीटों पर कंगना को मिली बढ़त ने उनकी राह आसान बना दी। हालांकि, विक्रमादित्य को सबसे अधिक 21437 मतों की बढ़त शिमला जिला स्थित उनके पैतृक निवास रामपुर हल्के में मिली है।

सियासी चक्रव्यूह में घिरे विक्रमादित्य
इसके अलावा किनौर से 8562, कुल्लू जिला के आनी से 8328 और लाहुल-स्पीति से 6876 मतों की बढ़त मिली है। इसके अलावा भरमौर, बंजार, कुल्लू, मनाली, करसोग और नाचन में कांग्रेस को बढ़त नहीं मिल पाई है, जिसकी वजह से विक्रमादित्य सिंह सियासी चक्रव्यूह में घिर गए।

जयराम बनें कंगना की जीत के सारथी
पूर्व सीएम जयराम ठाकुर के लिए मंडी संसदीय सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई थी। हाई कमान ने कंगना को टिकट देकर जीत की सारी जिम्मेदारी जयराम ठाकुर के कंधों पर डाल दी थी। एक समय तो यह चुनाव विक्रमादित्य बनाम जयराम ठाकुर बन गया था।

इन इलाकों ने जीत में निभाई बड़ी भूमिका
जयराम ठाकुर का मंडी संसदीय क्षेत्र में खासा प्रभाव है। यहां 17 में से 12 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। जबकि मंडी जिला की नौ सीटों पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में कंगना की जीत में मंडी जिला के जोगिंद्रनगर से 19402, सदर मंडी से 15515, सराज से 14698 अैर सरकाघाट से 13647 की बढ़त ने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा कंगना को मंडी जिला के बल्ह से 9742 और सुंदरनगर से 8994 की लीड मिली। 

रिपोर्ट : यूके शर्मा