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Hindi News हिमाचल प्रदेशमहिलाओं से पेशाबघर यूज करने के लिए पैसे लेना 'गंभीर मामला' : HC ने दी अवमानना कार्रवाई की चेतावनी

महिलाओं से पेशाबघर यूज करने के लिए पैसे लेना 'गंभीर मामला' : HC ने दी अवमानना कार्रवाई की चेतावनी

हाईकोर्ट ने शिमला नगर निगम और सुलभ इंटरनेशनल को उन आरोपों पर अवमानना ​​कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि महिलाओं से मुफ्त पेशाबघर का इस्तेमाल करने के लिए 5 रुपये लिए जा रहे हैं।

महिलाओं से पेशाबघर यूज करने के लिए पैसे लेना 'गंभीर मामला' : HC ने दी अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
public toilet shutterstock symbolic image
Praveen Sharmaशिमला। लाइव हिन्दुस्तानTue, 25 Jun 2024 11:34 AM
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महिलाओं से पेशाबघर के इस्तेमाल के लिए फीस लिए जाने को 'गंभीर मामला' बताया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में शिमला नगर निगम (एसएमसी) और सुलभ इंटरनेशनल को उन आरोपों पर अवमानना ​​कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि महिलाओं से मुफ्त पेशाबघर का इस्तेमाल करने के लिए 5 रुपये लिए जा रहे हैं।

जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुशील कुकरेजा की बेंच ने एसएमसी और सुलभ इंटरनेशनल को सार्वजनिक शौचालयों के मुफ्त उपयोग के संबंध में कोर्ट द्वारा पारित आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए यह टिप्पणी की। इस मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने कहा, "हमारे संज्ञान में यह बात लाई गई है कि इस हाईकोर्ट के आदेशों तथा सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन द्वारा दिए गए इस वचन के बावजूद कि महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए पेशाबघर निःशुल्क हैं, फिर भी शौचालयों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं से लूट के तौर पर कम से कम 5 रुपये वसूले जा रहे हैं। यह वास्तव में एक गंभीर मामला है।"

डिवीजन बेंच ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव तथा परवानू-शिमला हाईवे पर सुविधाएं स्थापित करने से संबंधित एक स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। 

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को इस आशय का प्रिंट तथा स्थानीय केबल नेटवर्क सहित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार करने का भी निर्देश दिया।

परवानू और शिमला के बीच सड़क किनारे सुविधाएं विकसित करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास विचाराधीन है। इसलिए, हाईकोर्ट ने मामले में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, के सचिव के माध्यम से पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल किया।

राज्य सरकार के अच्छे कार्यों की प्रशंसा

इसके अलावा, यह देखते हुए कि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के बागवानी विंग ने हाईवे पर डंपिंग साइट के सौंदर्यीकरण का सराहनीय कार्य किया है, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में इसे स्वतंत्र रूप से पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में जारी किए गए कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने में विभिन्न राज्य अधिकारियों द्वारा किए गए सराहनीय कार्य के लिए भी अपनी प्रशंसा भी की।