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आज हिमाचल का बजट पेश करेंगे सीएम सुक्खू, लोकसभा चुनाव से पहले क्यों माना जा रहा अहम?

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज बजट पेश करेंगे। इस बार बजट का आकार 55 हजार करोड़ रह सकता है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए बजट में कई लोकलुभावन वादे भी किए जा सकते हैं।

आज हिमाचल का बजट पेश करेंगे सीएम सुक्खू, लोकसभा चुनाव से पहले क्यों माना जा रहा अहम?
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,शिमलाSat, 17 Feb 2024 10:42 AM
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज (शनिवार) को विधानसभा में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपना बजट प्रस्तुत करेंगे। इस बार बजट का आकार 55 हजार करोड़ रह सकता है। वर्ष 2023-24 में मुख्यमंत्री ने 53 हजार 413 करोड़ का बजट पेश किया था। इस बार का बजट भी कर मुक्त हो सकता है। मुख्यमंत्री के तौर पर सुखविंदर सिंह सुक्खू का यह दूसरा बजट होगा। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री लोकलुभावना बजट ला सकते हैं। 

मुख्यमंत्री की कोशिश हर वर्ग को खुश करने की होगी। बजट में नई योजनाओं की घोषणा हो सकती है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री बजट में नए प्रावधान कर सकते हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए उनके लंबित मंहगाई भत्ते की घोषणा हो सकती है। वहीं कर्मचारियों के वेतन आयोग से संबंधित वित्तीय अदायगी को निपटाने का भी एलान हो सकता है। मुख्यमंत्री श्रमिक वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर दिहाड़ी को बढ़ाने की घोषणा भी कर सकते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। 

सरकारी व निजी क्षेत्र में नौकरियों के एलान की भी संभावना है। सुक्खू सरकार ने हिमाचल को वर्ष 2026 तक ग्रीन स्टेट एंड ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में इस दिशा में बजट में नई घोषणाएं होने की उम्मीद है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को भी विशेष महत्व दे रही है, ऐसे में इसके लिए बजट में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ौतरी हो सकती है। इसके अलावा पशुपालन, कृषि, बागवानी और रोजगार सृजन पर भी बजट में फोकस रह सकता है। अपने पहले बजट में मुख्यमंत्री ने 10 में से चार गारंटियों पर मुहर लगाई थी। 

ऐसे में दूसरे बजट में मुख्यमंत्री शेष कुछ गारंटियों को पूरा करने का एलान कर सकते हैं। 300 यूनिट निशुल्क बिजली, दो रुपये किलो में गोबर और 10 लीटर दूध की गारंटी पूरा करने का लोगों को इंतज़ार है।  राज्य सरकार के सामने इस समय सबसे कठिन स्थिति प्रदेश को बढ़ते कर्ज के मायाजाल से बाहर निकालना है, ऐसे में बजट में अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ने की झलक देखने को मिल सकती है। 

सरकार को विकास कार्य के लिए धनराशि जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। राज्य सरकार पर कर्ज का बोझ करीब 90 हजार करोड़ हो गया है। हर बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन व पेंशन और ऋण व ब्याज अदायगी पर खर्च होता है। पिछले साल आई आपदा ने हिमाचल के आधारभूत ढांचे को हिला कर रख दिया है। मुख्यमंत्री बजट में खर्च कम करने संबंधी फैसले भी ले सकते हैं।

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