हिमाचल में राजपूत सीएम, ब्राह्मण डिप्टी सीएम; क्या है कांग्रेस की रणनीति

लाइव हिंदुस्तान, शिमला
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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए सुखबीर सिंह सुक्खू का नाम फाइनल कर दिया है जो कि राजपूत हैं। वहीं मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाया गया है। इसके पीछे हिमाचल का वोटबैंक वजह है

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हिमाचल प्रदेश में काफी उलझन के बाद कांग्रेस  आलाकमान ने साफ कर दिया है कि राज्य में पार्टी के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू अगले मुख्यमंत्री होंगे। वहीं एक ब्राह्मण चेहरे मुकेश अग्निहोत्री को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।  हिमाचल प्रदेश में ज्यादातर मुख्यमंत्री की कुर्सी ठाकुरों के पास ही रही है। शांता कुमार इकलौते ब्राह्मण नेता थे जो मुख्यमंत्री की कुर्सी तक दो बार पहुंचे थे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में राजपूत और ब्राह्मण वोटर ही सबसे ज्यादा हैं। 

हिमाचल में क्या है जातीय समीकरण
विधानसभा चुनाव में  68 सीटों में से 17 सीटें एससी और एसटी के लिए रिजर्व थीं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही 28-28 ऐसे उम्मीदवार उतारे थे जो या तो ब्राह्मण थे या तो ठाकुर। राज्य में सबसे ज्यादा राजपूत और ब्राह्मण हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक 70 लाख की जनसंख्या में 51 फीसदी सवर्ण ही हैं। इसमें ब्राह्मण और राजपूत आते हैं। इस 51 फीसदी में  33 फीसदी आबादी राजपूतों की है और 18 फीसदी ब्राह्मण हैं।

मुख्यमंत्री क्यों नहीं बना ब्राह्मण चेहरा
राज्य में राजपूतों की आबादी ब्राह्मणों से करीब तीन गुनी ज्यादा है। ऐसे में कांग्रेस सवर्ण वर्ग को साधना तो चाहती है लेकिन आबादी के अनुपात को भी ध्यान में रखती है। खास बात यह भी है कि 2024 के चुनाव के लिहाज से भी राजपूत वोटों को ध्यान में रखना जरूरी था। दूसरी बात  यह है कि राज्य में प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग हो रही थी। प्रतिभा सिंह के समर्थक कांग्रेस दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे और सुखबीर सिंह सुक्खू का विरोध कर रहे थे। हालांकि प्रतिभा सिंह और सुक्खू दोनों ही राजपूत हैं। ऐसे में विरोध इतना ज्यादा नहीं हुआ। अगर राजपूत चेहरा छोड़कर किसी  ब्राह्णण को सीएम बनाया जाता तो यह विरोध ज्यादा बढ़ सकता था। 

क्या है मुख्यमंत्रियों का इतिहास
1977 (तब की जनसंघ) और 1990 में शांता कुमार दो बार भाजपा के मुख्यमंत्री बने। लेकिन वह दोनों ही  बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 1990 में वह सीएम बने लेकिन ढाई साल के बाद ही बाबरी विध्वंस के बाद हिमाचल की सरकार बर्खास्त कर दी गई। 1993 में फिर से चुनाव हुआ और फिर कांग्रेस सत्ता में आ गई और वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। 1998 में एक बार फिर भाजपा ने पंडित सुखराम की पार्टी के सहारे सत्ता में वापसी की लेकिन मुख्यमंत्री राजपूत चेहरे प्रेम कुमार धूमल को बनाया गया। हिमाचल के रिवाज के मुताबिक 2003 में कांग्रेस फिर जीत गई और कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया। 

2008 में भाजपा ने भी राजपूत चेहरे प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री बनाया। 2012 में फिर वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने। 2017 में प्रेम कुमार धूमल अपनी हीसीट पर चुनाव हार गए और इसके बाद जयराम ठाकुर के हिमाचल की बागडोर थमा दी गई। इस बार फिर से सुखबीर सिंह सुक्खू जो कि एक राजपूत चेहरा हैं हिमाचल के मुख्यमंत्री बन गए हैं। 2024 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी कांग्रेस अपना वोट बैंक साधे रहना चाहती है। ऐसे में आंतरिक विरोध, जातिगत समीकरण और 2024 के चुनाव तीनों बातों को ध्यान में रखत हुए कांग्रेस ने सीएम के तौर पर राजपूत नेता और डिप्टी सीएम के तौर पर ब्राह्मण चेहरे का चयन किया है।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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