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हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति, सुक्खू सरकार ने उठाए ये कदम

हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति के मद्देनज़र जल शक्ति विभाग ने जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। इसके तहत कई हैंडपंप को एक्टिव किया गया है। और भी कदम उठाए गए हैं।

हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति, सुक्खू सरकार ने उठाए ये कदम
drought-like situation in himachal pradesh sukhu government took these steps
Mohammad Azamवार्ता,शिमलाThu, 20 Jun 2024 06:37 PM
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हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति के मद्देनज़र जल शक्ति विभाग ने जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। इसके तहत वर्ष 2024-25 के दौरान धर्मशाला और नूरपुर के सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में 14 हैंडपम्प सक्रिय किए हैं। वहीं जहां पेयजल आपूर्ति का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है वहां टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। शिमला, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में पानी के लिए टैंकर तैनात किए जा रहे हैं।

विभाग की ओर से गुरुवार को जारी प्रैस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों से कम बारिश और कम हिमपात के कारण प्रदेश लगातार सूखे का सामना करना पड़े रहा है। इसके कारण गर्मियों के दिनों में जल स्रोतों का स्तर भी कम हो रहा है। स्रोत रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं। मई के तीसरे सप्ताह से ही प्रदेश में सूखे की स्थिति शुरू हो गई थी जिसके कारण 3933 बस्तियों को आपूर्ति करने वाली 1315 योजनाएं और लगभग चार लाख 56 हज़ार की आबादी प्रभावित हुई है। वहीं 15 जून तक की चरम अवधि के दौराना 6537 बस्तियों को जलापूर्ति करने वाली 1797 योजनाएं और आठ लाख 88 हज़ार की आबादी प्रभावित हुई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों को नामित किया है जो सूखे की स्थिति उत्पन्न होने की सूरत में जिला प्रशासन से तालमेल करेंगे और स्थिति की निगरानी करेंगे। इस दौरान आपात स्थिति को छोड़कर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। विभाग ने स्थिति में सुधार आने तक पानी के नये कनेक्शनों पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया है। मौजूदा जलापूर्ति योजनाओं से निर्माण कार्य भी प्रतिबंधित कर दिये गए हैं उल्लंघन करने पर कनेक्शन काटने का भी प्रावधान किया गया है।

पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त भण्डारण, टैंकों, तालाबों और बावड़ियों की सफाई सुनिश्चित की गई है। एचडीपीई, रबड़ की पाइप बिछाकर सूखे और कम जल स्तर वाले स्रोतों के संवर्धन के लिए उपाय किए जा रहे हैं। पेयजल के दुरूपयोग को रोकने के लिए रेडियो, टी.वी. और प्रिंट मिडिया पर जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं और गैर घरेलू उपयोग के लिए रसोई और बाथरूम से निकलने वाले पानी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति के लिए नियंत्रित वितरण के साथ-साथ आवश्यकतानुसार व्यस्ततम घंटों में बिजली विभाग से पंपिंग प्रतिबन्धों में ढील देने का आग्रह किया गया है। विभाग का मानना है कि शीघ्र ही संकट की इस स्थिति से उबर जाएंगे, लेकिन तब तक जनता से सहयोग की अपील की गई है।