हिमाचल प्रदेश में इस दिन से फिर करवट लेगा मॉनसून, किन जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट?
हिमाचल प्रदेश में मॉनसून 18 जून से एक बार फिर करवट लेगा। इसके वजह से कई जिलो में 23 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ने का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बारिश थमने से प्रदेश के मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में गर्मी और उमस बढ़ गई है। सबसे अधिक असर ऊना में देखने को मिला, जहां गुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक रहा।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 2.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंडी में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री, सुंदरनगर में 34.7 डिग्री, कांगड़ा में 34.5 डिग्री, भुंतर में 34 डिग्री, मनाली में 28.2 डिग्री और शिमला में 25.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आज मौसम साफ रहा और राजधानी शिमला में दिनभर धूप खिली रही। बीते 24 घंटों के दौरान केवल शिमला जिले के सराहन में 7.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई। अब मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं रहेगी और 18 जुलाई से मॉनसून एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है।
कहां-कहां येलो अलर्ट?
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 19 से 23 जुलाई के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। विभाग के अनुसार 18 जुलाई को मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला और सिरमौर जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। 19 जुलाई को चंबा, शिमला, मंडी और कांगड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसी दिन हमीरपुर, सिरमौर, सोलन, ऊना, बिलासपुर और कुल्लू में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है। 20 जुलाई को चंबा, कुल्लू, शिमला, मंडी और कांगड़ा में फिर भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि हमीरपुर, सिरमौर, सोलन, ऊना, बिलासपुर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। 21 से 23 जुलाई तक राज्य के मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा। वहीं निचले और मैदानी इलाकों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी रहेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान भूस्खलन, अचानक बाढ़, चट्टानें गिरने, सड़कें बंद होने और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
18 जुलाई से करवट लेगा मॉनसून
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से मॉनसून कमजोर पड़ा हुआ था, लेकिन 18 जुलाई से इसकी सक्रियता फिर बढ़ने की संभावना है। उनके अनुसार 18 से 23 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। उन्होंने लोगों से मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियों पर नजर रखने, नदी-नालों के पास नहीं जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभागों को भी संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी सतर्कता रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में मॉनसून 30 जून को पहुंचा था और अब तक सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। इस मॉनसून में किन्नौर में बादल फटने, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
50 सड़कें भूस्खलन के वजह से हैं बंद
उधर, पिछले दिनों हुए भूस्खलन का असर अभी भी प्रदेश की सड़कों पर बना हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार वीरवार शाम तक प्रदेश में भूस्खलन के कारण 50 सड़कें बंद थीं। इनमें सबसे अधिक 28 सड़कें कुल्लू जिले में बंद हैं। मंडी में 13, कांगड़ा में 4, शिमला और ऊना में 2-2 और सिरमौर में एक सड़क यातायात के लिए बाधित है। इसके अलावा चार बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप हैं। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में भारी बारिश शुरू होने के बाद भूस्खलन और सड़कें बंद होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट : यूके शर्मा


