
हिमाचल में इस मॉनसून 130 बार लैंडस्लाइड, 46 बार बादल फटे, 355 लोगों की मौत; 3787 करोड़ का नुकसान
अब तक प्रदेश में 130 भूस्खलन, 95 फ्लैश फ्लड और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन 3787 करोड़ रुपये लगाया है।
हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून में बारिश-भूस्खलन के चलते अब तक 355 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं और 416 घायल हुए हैं। मॉनसून सीजन के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला भी लगातार जारी रहा है। अब तक प्रदेश में 130 भूस्खलन, 95 फ्लैश फ्लड और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन 3787 करोड़ रुपये लगाया है।

जानिए कहां कितनी मौत हुई हैं?
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक जिला वार आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा 58 लोगों की मौत मंडी जिले में हुई है। कांगड़ा में 50, चंबा में 43, शिमला में 38, कुल्लू में 31, किन्नौर में 28, सोलन में 25, उना में 21, बिलासपुर और सिरमौर में 18-18, हमीरपुर में 16 और लाहौल-स्पीति में 9 लोगों की जान गई है। इसके अलावा बरसात के कहर से 3136 पशु और 25 हजार से ज्यादा पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो चुकी है।
अब तक 3787 करोड़ के नुकसान का अनुमान
प्रदेश में हुई लगातार भारी बारिश और भूस्खलनों से हजारों घर जमींदोज हो गए हैं। अब तक 5194 कच्चे-पक्के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 1012 पूरी तरह ढह गए। 447 दुकानें और 4510 पशुशालाएं भी धराशायी हो गई हैं। राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन 3787 करोड़ रुपये लगाया है। इसमें अकेले लोक निर्माण विभाग को 2252 करोड़, जलशक्ति विभाग को 1238 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 139 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
4 नेशनल हाइवे व 1208 सड़कें ठप
राज्य में सड़कों और यातायात व्यवस्था की हालत बदतर बनी हुई है। गुरुवार शाम तक चार नेशनल हाइवे और 1208 अन्य सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध रहीं। बंद पड़े नेशनल हाइवे में किन्नौर का एनएच-05, कुल्लू का एनएच-03 और एनएच-305, लाहौल-स्पीति का एनएच-505 और मंडी का एनएच-03 शामिल हैं। अकेले मंडी जिले में 287 सड़कें बंद हैं, जबकि कुल्लू में 230, शिमला में 211, चंबा में 192 और कांगड़ा में 41 सड़कें यातायात के लिए ठप हैं।
1885 ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं
बारिश से बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है। प्रदेश में 1885 ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 999 ट्रांसफार्मर कुल्लू में, 259 शिमला में, 307 मंडी में, 130 सिरमौर में और 136 सोलन में बंद पड़े हैं। इसी तरह 824 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें 348 शिमला, 187 चंबा, 93 सिरमौर और 78 मंडी में ठप हैं।
130 भूस्खलन, 45 बार बादल फट चुके
मॉनसून सीजन के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला भी लगातार जारी रहा है। अब तक प्रदेश में 130 भूस्खलन, 95 फ्लैश फ्लड और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। लाहौल-स्पीति में सबसे ज्यादा 26 बार भूस्खलन और 56 बार फ्लैश फ्लड की घटनाएं हुई हैं, जबकि मंडी जिला बादल फटने की 19 घटनाओं के साथ सबसे आगे रहा है।
रिपोर्ट : यूके शर्मा

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