हिमाचल : शिमला के बोइलेउगंज थाने के क्रिमिनल रिकॉर्ड में बड़ी हेराफेरी का खुलासा
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में आपराधिक रिकॉर्ड के दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। शुरुआती जांच से पता चला है कि बोइलेउगंज थाना में 71 गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ी फाइलें कथित तौर पर सालों तक दबाकर रखी गईं।

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में आपराधिक रिकॉर्ड के दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। शुरुआती जांच से पता चला है कि बोइलेउगंज थाना में 71 गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ी फाइलें कथित तौर पर सालों तक दबाकर रखी गईं। यह मामला हाल ही में तब सामने आया, जब एक पुलिस अधिकारी ने अपने प्रमोशन के फायदे न मिलने के बारे में शिकायत दर्ज कराई।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 71 केस फाइलें नहीं मिल रही हैं। इनमें राजिंदर भान की प्रमोशन से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल थे, जो हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल के दौरान शिमला पुलिस अधीक्षक (एसपी) मुख्यालय से रिटायर हुए थे।
देरी के आधार पर अधिकतर मामले खारिज
कानूनी तौर पर तय समय सीमा के अंदर आरोपपत्र दायर नहीं करने के कारण इनमें से अधिकतर मामलों को अदालत ने बहुत ज्यादा देरी के आधार पर खारिज कर दिया। कथित तौर पर दबाए गए मामलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून, अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत गंभीर अपराध, साथ ही मारपीट से जुड़े अपराध के रिकॉर्ड शामिल हैं।
जांच के दौरान, पुलिस अधिकारियों ने थाने के अंदर एक बॉक्स से कई केस फाइलें बरामद कीं, जो पहले के दावों के उलट थीं कि रिकॉर्ड अदालत को भेज दिए गए हैं। यह मामला सबसे पहले 2021 में एक सरकारी कर्मचारी की शिकायत के बाद सामने आया था, लेकिन उस समय कोई खास कार्रवाई नहीं की गई थी।
2023 में विभागीय जांच को बनाई गई कमेटी
वर्ष 2023 में जब यह मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा तो एक विभागीय कमेटी बनाई गई और औपचारिक जांच शुरू की गई। जांच में कई आपराधिक मामलों में बड़े पैमाने पर लापरवाही का पता चला। वरिष्ठ अधिकारी यह देखकर हैरान रह गए कि जिन फाइलों को आधिकारिक तौर पर ‘कोर्ट भेजा गया’ के रूप में दर्ज किया गया था, वे वास्तव में कभी न्यायपालिका तक नहीं पहुंचीं, जिससे स्टेशन पर आंतरिक जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन के बारे में गंभीर सवाल उठे।
जांच के बाद पुलिस अधिकारियों ने जल्दबाजी में प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी कीं और पेंडिंग चार्जशीट दायर कीं। हालांकि, कोर्ट ने बिना वजह सालों की देरी पर कड़ी नाराजगी जताई और अधिकांश आरोपपत्र को खारिज कर दिया।
मामला फिलहाल डीजीपी के पास लंबित
शिमला के पूर्व पुलिस प्रमुख संजीव गांधी ने कहा कि यह मामला फिलहाल पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पास लंबित है, जिनकी मंजूरी रिकॉर्ड छिपाने में लापरवाह पाए गए अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि अनिवार्य मंजूरी मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इस बीच, जांच जारी रहने के कारण संबंधित अवधि के दौरान बोइलेउगंज थाना में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिकाओं और इरादों की बारीकी से जांच की जा रही है।
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Praveen Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


