
हिमाचल प्रदेश के 47 शहरी निकायों की कमान अफसरों के हाथ, ईओ और सचिव बने प्रशासक
हिमाचल प्रदेश में जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद 47 शहरी निकायों की कमान अब अफसरों के हाथ सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने इन सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश में जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद 47 शहरी निकायों की कमान अब अफसरों के हाथ सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने इन सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। शहरी विकास विभाग की ओर से शनिवार शाम जारी अधिसूचना के अनुसार नगर परिषदों में कार्यकारी अधिकारी (ईओ) और नगर पंचायतों में सचिव को प्रशासक बनाया गया है। ये प्रशासक तत्काल प्रभाव से अपने-अपने निकायों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे।
सरकार के आदेशों के तहत प्रशासकों को एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक के विकासात्मक कार्यों को मंजूरी देने की प्रशासनिक शक्ति दी गई है ताकि शहरी निकायों में विकास कार्य और रोजमर्रा की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और केवल प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रखने के लिए की गई है।
जिन 47 शहरी निकायों में प्रशासक लगाए गए हैं, उनमें नगर परिषद बिलासपुर, श्री नैना देवी जी, घुमारवीं, चंबा, डलहौजी, सुजानपुर-टिहरा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, कुल्लू, मनाली, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंदरनगर, नेरचौक, रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, नाहन, पांवटा साहिब, नालागढ़, परवाणू, संतोषगढ़ और मेहतपुर-बसदेहड़ा शामिल हैं। इसके अलावा नगर पंचायत तलई, चुवाड़ी, नादौन, भोटा, शाहपुर, भुंतर, बंजार, रिवालसर, करसोग, सुन्नी, नारकंडा, चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, राजगढ़, अर्की, दाड़लाघाट-चौक, गगरेट और टाहलीवाल में भी यही व्यवस्था लागू की गई है।
दरअसल, इन सभी शहरी निकायों के निर्वाचित बोर्ड का पांच साल का कार्यकाल 18 जनवरी को पूरा हो चुका था। इसके बाद से ये निकाय जनप्रतिनिधियों के बिना ही संचालित हो रहे थे। राज्य सरकार ने आपदा की स्थिति का हवाला देते हुए पंचायतों और शहरी निकायों के चुनाव कुछ समय के लिए टालने का निर्णय लिया था, जिसके कारण राज्य निर्वाचन आयोग तय समय पर चुनाव नहीं करवा सका।
प्रदेश में कुल 74 शहरी निकाय हैं। इनमें से 47 का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जबकि शिमला नगर निगम को छोड़कर बाकी शहरी निकायों का कार्यकाल मार्च और अप्रैल में पूरा होना है। इस बीच हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराने के निर्देश दे चुका है। सरकार का कहना है कि अदालत के आदेशों के तहत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक शहरी प्रशासन और विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए, इसी उद्देश्य से प्रशासकों की यह व्यवस्था लागू की गई है।
रिपोर्ट : यूके शर्मा

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Subodh Kumar Mishraलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




