हिमाचल में गलत काम करने पर एक और पुलिसकर्मी की नौकरी गई, अबतक 12 वर्दीवालों को निकाला जा चुका

Jan 23, 2026 10:56 pm ISTSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, शिमला, हिमाचल प्रदेश
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पुलिस विभाग द्वारा जारी उस प्रेस नोट को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया, जिसमें कहा गया था कि 'शिमला SP संजीव कुमार गांधी की नाक के नीचे ट्रैफिक कांस्टेबल ड्रग तस्करी में शामिल था।' इस वाक्य को बाद में प्रेस नोट से हटा दिया गया।

हिमाचल में गलत काम करने पर एक और पुलिसकर्मी की नौकरी गई, अबतक 12 वर्दीवालों को निकाला जा चुका

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने बेहद सख्त कार्रवाई करते हुए चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के मामले में शामिल अपने एक ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल को शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया। एक दिन पहले जब वह दो अन्य लोगों के साथ शिमला आ रहा था तो उसके पास से चिट्टा बरामद हुआ था। जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था, वहीं अब नौकरी से भी निकाल दिया गया। इस कार्रवाई के साथ ही राज्य में हेरोइन से जुड़े मामलों में शामिल होने के कारण बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मियों की कुल संख्या अब तक 12 हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार (22 जनवरी) की सुबह करीब 2:30 बजे शोगी बैरियर पर रूटीन नाका चेकिंग के दौरान चंडीगढ़ से शिमला की तरफ आ रही एक गाड़ी को रोका गया। इस दौरान उसमें तीन लोग सवार थे, जिनकी पहचान राहुल कुमार, गौरव और विकास के रूप में हुई। जब उनकी और गाड़ी की सघन तलाशी ली गई तो इन लोगों के पास से 9.480 ग्राम 'चिट्टा' बरामद हुआ।

आगे की जांच में पता चला कि राहुल कुमार हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत था और घटना के समय शिमला में ट्रैफिक पुलिस में तैनात था। इस संबंध में, NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एक FIR दर्ज की गई, और आरोपी राहुल कुमार और गौरव को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

इस बारे में ANI से बात करते हुए, हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने कहा, 'हम अब तक ऐसे 12 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर चुके हैं, जो हेरोइन तस्करी के मामलों में शामिल पाए गए थे। हिमाचल प्रदेश पुलिस में न तो चिट्टा तस्करों के लिए कोई जगह है और न ही इसे बढ़ावा देने वालों के लिए जगह है।'

अधिकारियों ने बताया कि अपराध की गंभीरता, पुलिस विभाग की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव, और बल के भीतर अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए, आरोपी कांस्टेबल राहुल कुमार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

इस बीच, पुलिस विभाग द्वारा जारी उस प्रेस नोट को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया, जिसमें कहा गया था कि 'शिमला SP संजीव कुमार गांधी की नाक के नीचे ट्रैफिक कांस्टेबल ड्रग तस्करी में शामिल था।' इस वाक्य को बाद में प्रेस नोट से हटा दिया गया।

इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए, DGP अशोक तिवारी ने ANI को बताया कि किसी ने गलत जानकारी डालकर शरारत की थी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए जांच शुरू की जाएगी, और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद, पुलिस विभाग ने औपचारिक रूप से प्रेस नोट से विवादास्पद वाक्य हटा दिया।

उधर शिमला जिले के पुलिस सुपरिटेंडेंट संजीव कुमार गांधी ने कहा, 'पुलिस ने ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई है। जो कोई भी नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में शामिल पाया जाएगा, तो उस व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा, फिर चाहे वह पुलिसकर्मी ही क्यों ना हो।' आगे उन्होंने कहा, 'जो भी चिट्टा सप्लाई के सिलसिले में शामिल मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'

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