हिमाचल में तेल डीलर्स का विरोध, सेस लगाने के फैसले को बताया गलत; किस बात का डर?
हिमाचल प्रदेश के पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने तेल पर राज्य सरकार की ओर से लगाए गए सेस का विरोध किया है। उन्होंने इससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई है।

हिमाचल प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि इस कदम से हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री कम हो जाएगी। शनिवार शाम को हुई एसोसिएशन की एक बैठक में अध्यक्ष सुकुमार सिंह चंदेल ने कहा कि जब हिमाचल में वैट दर पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम थी तब हिमाचल में तेल की कुल बिक्री 1.2 मिलियन किलोलीटर थी। अब यह घटकर 9 लाख किलोलीटर रह गई है।
बिक्री में और गिरावट आने का डर
हिमाचल प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में टैक्स बढ़ने से हिमाचल में ईंधन की बिक्री पहले ही कम हो गई है। अब राज्य सरकार की ओर से लगाए गए इस नए सेस से तेल की बिक्री में और गिरावट आएगी। डीलर्स को डर है कि लोग दूसरे राज्यों से सस्ता ईंधन खरीदना शुरू कर देंगे जिससे सूबे के तेल कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
आंकड़ों के हवाले जताई चिंता
हिमाचल प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुकुमार सिंह चंदेल ने कहा कि जब हिमाचल में वैट की दर पड़ोसी राज्यों से कम थी तब राज्य में कुल बिक्री 12 लाख किलोलीटर थी लेकिन 2025 तक यह घटकर 9 लाख किलोलीटर रह गई है। ऐसे में यदि राज्य सरकार की ओर से अब सेस भी लगा दिया जाता है तो हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री और भी तेजी से कम हो जाएगी।
भारी आर्थिक नुकसान की आशंका
सुकुमार सिंह चंदेल ने आगे कहा कि ऑपरेटर दूसरे राज्यों से पेट्रोल और डीजल खरीदना शुरू कर देंगे जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान होगा। सरकार के पास अनाथों और विधवाओं जैसे लाभार्थियों के बारे में कोई स्पष्ट आंकड़े नहीं हैं। साथ ही जमा हुए पैसों के इस्तेमाल के लिए भी कोई ठोस योजना भी नहीं है। एसोसिएशन की शिमला यूनिट मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मिलकर अपना पक्ष रखेगी। हम व्यापार, कानूनी पहलुओं और राजस्व से जुड़े मुद्दों पर बात करेंगे।
अदालत जाने की चेतावनी
एसोसिएशन की बैठक में सदस्यों ने पेट्रोल और डीजल पर नया सेस लगाने के सरकार के फैसले को राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत नुकसानदायक बताया। सदस्यों ने कहा कि बिना योजना के नियमों में बदलाव करना गलत होगा। इससे व्यापार पड़ोसी राज्यों में चला जाएगा और हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान होगा। एसोसिएशन अब कानूनी सलाह ले रही है। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत से हल नहीं निकला तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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