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पुलिस वर्दी में रील बनाई तो सुक्खू सरकार लेगी ऐक्शन, सस्पेंशन तय, SOP भी आ गई

पुलिस वर्दी में रील बनाई तो सुक्खू सरकार लेगी ऐक्शन, सस्पेंशन तय, SOP भी आ गई

संक्षेप:

नए निर्देशों के अनुसार कोई भी पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से सरकारी नीतियों, पुलिस मुख्यालय या सरकार द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय, चल रहे मामलों, कानून-व्यवस्था की स्थिति या आधिकारिक कार्यों पर टिप्पणी नहीं करेगा। 

Dec 09, 2025 10:49 am ISTUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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सोशल मीडिया पर पुलिस वर्दी के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़ी अनुशासनहीनता को रोकने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस नई एसओपी के तहत अब कोई भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी वर्दी पहनकर मनोरंजन, निजी प्रचार, धार्मिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रकृति की रील, वीडियो, फोटो, स्टोरी या पोस्ट किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं कर सकेगा। इसमें Facebook, Instagram, YouTube, X (Twitter), WhatsApp, Telegram और अन्य सभी सोशल मीडिया माध्यम शामिल हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पुलिसकर्मी वर्दी का उपयोग केवल अपने आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान करेंगे और किसी भी प्रकार की सोशल मीडिया गतिविधि के लिए वर्दी पहनने की अनुमति नहीं होगी।

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पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वर्दी में सोशल मीडिया पर रील बनाना, वीडियो रिकॉर्ड करना, फोटो शूट करना या निजी या प्रचारात्मक कंटेंट पोस्ट करना सख्त रूप से प्रतिबंधित है और ऐसा करना वर्दी की गरिमा और पुलिस सेवा की संस्थागत मर्यादा के खिलाफ माना जाएगा। पुलिस विभाग ने चेतावनी दी है कि इस एसओपी का उल्लंघन गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा और दोषी पाए जाने पर विभागीय जांच, निलंबन, वार्षिक वेतनवृद्धि रोकना, पदावनति, सेवा से हटाना और यदि आवश्यक हुआ तो आपराधिक अभियोजन तक की कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

नए निर्देशों के अनुसार कोई भी पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से सरकारी नीतियों, पुलिस मुख्यालय या सरकार द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय, चल रहे मामलों, कानून-व्यवस्था की स्थिति या आधिकारिक कार्यों पर टिप्पणी नहीं करेगा और न ही किसी संवेदनशील अथवा गोपनीय जानकारी का खुलासा करेगा। केवल अधिकृत अधिकारी ही पुलिस विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर प्रेस नोट, जागरूकता अभियानों, जनता से संवाद और कानून-व्यवस्था से जुड़े आधिकारिक अपडेट साझा कर सकेंगे।

एसओपी में ये भी स्पष्ट कहा गया है कि सोशल मीडिया का गलत या अनियंत्रित उपयोग पुलिस की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और अनुशासन को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए इस पर कड़े प्रतिबंध आवश्यक हैं। आदेश में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि सभी जिला पुलिस प्रमुख, थाना प्रभारियों और शाखा प्रमुखों को अपने स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित करना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी कर्मचारी वर्दी में ऐसे नियमों का उल्लंघन न करे।

एसओपी में यह भी कहा गया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलती है या ऐसा कोई वीडियो, रील या फोटो सामने आता है तो तुरंत जांच कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आदेश की अवहेलना को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाएगा और अनुशासन भंग करने वाले कर्मियों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। प्रदेश पुलिस ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब देशभर में पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी में मनोरंजन या निजी प्रचार से संबंधित वीडियो और रील लगातार सामने आ रहे हैं और इससे वर्दी की गरिमा और पुलिस सेवा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगने की स्थिति बनती है।

रिपोर्ट : यूके शर्मा

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें

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