
धर्मशाला छात्रा मौत मामला: CM सुक्खू का बड़ा एक्शन, आरोपी प्रोफेसर सस्पेंड; हाई-लेवल जांच के आदेश
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में कॉलेज में रैगिंग और यौन उत्पीड़न के बाद इलाज के दौरान 19 साल की छात्रा की मौत के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ा ऐक्शन लिया है।
धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज में छात्रा की मौत से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) अशोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मामले में दर्ज एफआईआर, मीडिया रिपोर्टों और प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों को देखते हुए विभागीय जांच आवश्यक है। जांच पूरी होने तक असिस्टेंट प्रोफेसर को निलंबन में रखा गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय उच्च शिक्षा निदेशालय, शिमला रहेगा और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगाई गई है।
निलंबन के साथ ही सरकार ने इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि सरकार एक्शन मोड में है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त निदेशक शिक्षा हरीश शर्मा की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में तीन कॉलेज प्रिंसिपल शामिल किए गए हैं, जिनमें एक महिला प्रिंसिपल भी सदस्य हैं। कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट शिक्षा सचिव को सौंपे।
शिक्षा मंत्री के अनुसार कमेटी पूरे घटनाक्रम की हर पहलू से जांच करेगी। इसमें कॉलेज परिसर में कथित रैगिंग, मानसिक प्रताड़ना, कॉलेज प्रशासन की भूमिका, आंतरिक अनुशासन व्यवस्था और संबंधित शिक्षक पर लगे आरोपों की विस्तृत जांच शामिल होगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग की जांच के साथ-साथ पुलिस भी अपने स्तर पर समानांतर जांच कर रही है। दोनों जांच रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और छात्राओं की सुरक्षा व सम्मान से जुड़े मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
प्रोफेसर ने आरोपों से किया इनकार
इस बीच, निलंबित असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार शनिवार को पहली बार मीडिया के सामने आए और उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि वे निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग करेंगे और पुलिस और प्रशासन द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन करेंगे। अशोक कुमार ने कहा कि छात्रा द्वारा जिन नामों का उल्लेख किया गया है, वे किन परिस्थितियों में और किस आधार पर लिए गए, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि उनकी भी दो बेटियां हैं और यदि उन्होंने कभी इस तरह की कोई घिनौनी हरकत की होती, तो वे ईश्वर से यही प्रार्थना करते कि उन्हें जीवन से उठा लिया जाए।
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निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि यदि उनके निलंबन से मामले की निष्पक्ष जांच होती है और सभी पक्षों को न्याय मिलता है, तो वे इस निर्णय को स्वीकार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज एक बड़ा संस्थान है, जहां रैगिंग रोकने के लिए एंटी-रैगिंग कमेटी गठित है और परिसर में जगह-जगह इसके सूचना बोर्ड लगे हैं। उनके अनुसार पूरे मामले की जांच पुलिस कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
दोषियों को सख्त सजा देने की मांग
इस बीच, मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। शिमला में माकपा की ओर से उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की। माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई होती, तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। उन्होंने पुलिस, कॉलेज प्रशासन और सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
इसी तरह कांगड़ा जिले में भी मृत छात्रा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई गई। स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की अपील की।
बता दें कि यह मामला धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा की मौत से जुड़ा है। पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की है। प्राथमिकी में कुछ छात्राओं और एक शिक्षक के नाम शामिल बताए गए हैं। पुलिस की दो टीमें इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
रिपोर्ट : यूके शर्मा

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