हिमाचल में BJP विधायक सुधीर शर्मा पर भ्रष्टाचार का केस, आय से अधिक संपत्ति मामले में FIR
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है। एजेंसी ने चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) ने एफआईआर दर्ज कर ली है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज इस मामले के साथ ही विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विधायक ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि भाजपा ने सरकार पर विरोधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
सुधीर शर्मा वर्तमान में धर्मशाला से भाजपा विधायक हैं। वह दो वर्ष पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ उनके राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2024 में कांग्रेस छोड़कर उन्होंने भाजपा का दामन थामा और विधानसभा उपचुनाव में जीत कर फिर विधायक बने। इससे पहले वह कांग्रेस की पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार में ताकतवर मंत्री भी रह चुके हैं।
विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार सुधीर शर्मा पर यह मामला सोर्स इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट के आधार पर की गई प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों और वैधानिक संस्थाओं से वित्तीय और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड जुटाए गए। इनमें आयकर रिटर्न, चुनावी हलफनामे, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, हाउस बिल्डिंग एडवांस का रिकॉर्ड और सक्षम अधिकारियों से प्राप्त संपत्ति मूल्यांकन रिपोर्ट शामिल हैं। जांच में प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य सामने आए कि संबंधित लोक सेवक की संपत्ति और खर्च उसकी ज्ञात वैध आय की तुलना में अधिक हो सकते हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विजिलेंस को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू करने के पर्याप्त आधार मिले।
जांच एजेंसियों के अनुसार अब विधायक की चल और अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, आय के स्रोत, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य वित्तीय लेन-देन की विस्तार से जांच की जाएगी। जमीन की बिक्री से जुड़े लेन-देन, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, वाहनों की खरीद और आवासीय भवन के निर्माण पर हुए खर्च का भी सत्यापन होगा। विजिलेंस ने कहा है कि प्रारंभिक जांच के दौरान निर्माण खर्च से जुड़े कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सके। आवासीय संपत्ति के इंटीरियर, फिक्स्चर और फर्निशिंग पर हुए खर्च का तकनीकी आकलन भी अभी किया जाना बाकी है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके संबंध में भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच के दौरान विभिन्न सरकारी एजेंसियों, जिनमें लोक निर्माण विभाग भी शामिल है, से आवासीय भवनों और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराया गया। तकनीकी रिपोर्टों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही एफआईआर दर्ज की गई। अब संपत्तियों के अधिग्रहण की समयावधि, धन के स्रोत, आयकर रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों, वित्तीय संस्थानों और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
विजिलेंस पिछले कुछ समय से धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद-फरोख्त के मामलों की भी जांच कर रही है। इसी क्रम में राजस्व विभाग से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए गए हैं। धर्मशाला तहसील कार्यालय से रक्कड़ निवासी नेक राम के नाम पर दर्ज करीब 300 भूमि रजिस्ट्रियों की सत्यापित प्रतियां भी ली गई हैं। जांच का दायरा वर्ष 2007 से अब तक हुए भूमि लेन-देन तक फैला हुआ है और इन दस्तावेजों का राजस्व रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेन-देन से मिलान किया जा रहा है।
इस बीच एफआईआर दर्ज होने के बाद विधायक सुधीर शर्मा के कार्यालय की ओर से कहा गया कि वह इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं और लौटने के बाद विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे। कार्यालय की ओर से जारी बयान में इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया गया है। सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर राजनीतिक दुर्भावना के तहत कार्रवाई कराने का आरोप लगाया।
उधर भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता राजिंदर राणा ने कहा कि प्रदेश में "एफआईआर राज" चल रहा है और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मशाला विधायक के खिलाफ दर्ज मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। राणा का दावा है कि संबंधित मामलों की पहले भी विभिन्न स्तरों पर जांच हो चुकी थी और दस्तावेज नियमों के अनुरूप पाए गए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा निष्पक्ष जांच के पक्ष में है, लेकिन राजनीतिक प्रतिशोध के आधार पर दर्ज मामलों का विरोध करती है। राणा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं और भाजपा विधायकों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला बढ़ा है।
रिपोर्ट : यूके शर्मा


