हिमाचल में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन स्थगन पर डॉक्टरों का विरोध, सरकार को चेतावनी
आईजीएमसी शिमला के कंसल्टेंट डॉक्टरों की संस्था सीनियर एकेडमिक मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन (सैमडकॉट) ने इस संबंध में जनरल हाउस की बैठक बुलाकर राज्य सरकार से वेतन स्थगन के प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के वेतन के प्रस्तावित स्थगन के मुद्दे पर अब मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों ने भी विरोध जताया है। आईजीएमसी शिमला के कंसल्टेंट डॉक्टरों की संस्था सीनियर एकेडमिक मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन (सैमडकॉट) ने इस संबंध में जनरल हाउस की बैठक बुलाकर राज्य सरकार से वेतन स्थगन के प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षकों से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
सैमडकॉट की बैठक में डॉक्टरों ने कहा कि ग्रुप-ए और ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन में 20 से 30 प्रतिशत तक कटौती या स्थगन का प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन उनका अधिकार होता है और इसे स्थगित करना उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल सकता है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से संशोधित वेतनमान के एरियर और करीब 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान भी लंबित है, ऐसे में वेतन स्थगन का प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए और कठिनाई पैदा करेगा।
बैठक के दौरान डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेजों में पदोन्नति से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। सैमडकॉट का कहना है कि अगस्त 2022 के बाद से राज्य में किसी भी मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर नियमित पदोन्नति नहीं हुई है। इससे वरिष्ठ शिक्षकों में निराशा बढ़ रही है और उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति नहीं होने से मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेजों में प्रिंसिपल और चिकित्सा शिक्षा निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार देकर नियुक्त किया जा रहा है, जबकि पात्र और वरिष्ठ संकाय सदस्य पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यह व्यवस्था प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत व्यवस्था दोनों को प्रभावित करती है।
सैमडकॉट ने 13 दिसंबर 2023 की राजपत्रित अधिसूचना का भी हवाला दिया और कहा कि इसके अनुसार पुनर्नियुक्त अधिकारियों को आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) की शक्तियां नहीं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद ऐसे अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिस पर डॉक्टरों ने आपत्ति जताई है।
एसोसिएशन ने आशंका जताई कि अगर समय रहते पदोन्नति और वेतन से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो इससे मेडिकल कॉलेजों में कामकाज का माहौल प्रभावित हो सकता है और भविष्य में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की मान्यता पर भी असर पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि इसका असर अंततः मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
सैमडकॉट ने राज्य सरकार से मांग की है कि वेतन स्थगन के प्रस्ताव को वापस लिया जाए और अधिसूचित वरिष्ठता सूची के अनुसार नियमित और पारदर्शी तरीके से पदोन्नतियां सुनिश्चित की जाएं, जिससे मेडिकल शिक्षा संस्थानों का कामकाज सुचारु रूप से चलता रहे।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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