अभिषेक मनु सिंघवी को हिमाचल HC से झटका, RS चुनाव मामले में गवाहों के नाम हटाने की याचिका खारिज

शिमला, वार्ता
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Himachal Pradesh News : वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सिंघवी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें हर्ष महाजन के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में प्रस्तावित गवाहों के नाम हटाने की मांग की गई थी। 

अभिषेक मनु सिंघवी को हिमाचल HC से झटका, RS चुनाव मामले में गवाहों के नाम हटाने की याचिका खारिज

Himachal Pradesh News : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें हर्ष महाजन के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में प्रस्तावित गवाहों के नाम हटाने की मांग की गई थी। जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने शुक्रवार को यह आदेश वर्ष 2024 की चुनाव याचिका के संदर्भ में पारित किया, जिसमें सिंघवी ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए महाजन के निर्वाचन को चुनौती दी थी।

सिंघवी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 87(1) के तहत एक आवेदन दायर कर प्रतिवादी द्वारा सूचीबद्ध गवाहों के नाम काटने का अनुरोध किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि कई गवाहों, विशेष रूप से क्रम संख्या 2 से 14 तक के नामों को शामिल करना अनावश्यक और अस्पष्ट है, जिसका एकमात्र उद्देश्य कार्यवाही में विलंब करना है।

सिंघवी का क्या था तर्क

याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रतिवादी ने 18 गवाहों के नाम प्रस्तावित किए हैं, जिनमें से कई उनके अनुसार कोर्ट द्वारा निर्धारित मुद्दों के लिए अप्रासंगिक थे। यह भी बताया गया कि गवाहों की सूची निर्धारित समय सीमा के बाद दाखिल की गई थी और उनका ट्रायल याचिकाकर्ता के हितों को प्रभावित करेगा तथा चुनावी विवाद के निपटारे में देरी करेगा।

याचिका गलत धारणा पर आधारित : हर्ष महाजन

हालांकि, प्रतिवादी हर्ष महाजन की तरफ से इस दलील का विरोध करते हुए कहा गया कि यह आवेदन गलत धारणा पर आधारित है और इसका उद्देश्य उन्हें निष्पक्ष न्याय के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करने से रोकना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया की वैधता, विशेष रूप से मतों की गिनती के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और मत बराबर होने की स्थिति से निपटने के तरीके को सिद्ध करने के लिए ये गवाह आवश्यक हैं।

साक्ष्य प्रस्तुत करने का वैधानिक अधिकार : हाईकोर्ट

कोर्ट ने रिकॉर्ड और दलीलों की जांच के बाद पाया कि मुख्य मुद्दों, विशेष रूप से सहमति, प्रक्रिया और याचिका की स्वीकार्यता से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने का भार प्रतिवादी पर है। हाईकोर्ट ने माना कि प्रतिवादी के पास अपने बचाव के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का वैधानिक अधिकार है और पर्याप्त आधार के बिना ऐसे अधिकार में कटौती नहीं की जा सकती। जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि प्रस्तावित गवाह किस प्रकार निरर्थक या परेशान करने वाले थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि साक्ष्यों के बिना केवल विलंब करने की रणनीति का आरोप लगाना, गवाहों के नाम हटाने के लिए पर्याप्त नहीं है। बेंच ने आगे कहा कि गवाहों के ट्रायल का उद्देश्य प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत सूची में स्पष्ट रूप से बताया गया है और अधिकांश गवाह निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े हैं, जिनमें गिनती और वीडियोग्राफी में शामिल अधिकारी भी शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज किया

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए निर्णय दिया कि इस स्तर पर ऐसा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि प्रस्तावित गवाहों के साक्ष्य अप्रासंगिक हैं या कार्यवाही में देरी करने के उद्देश्य से हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जब प्रमाण का भार किसी पक्ष पर हो, तो उसे एक विशेष तरीके से साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

परिणामस्वरूप, आवेदन को खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल इस आवेदन के निपटारे तक सीमित हैं और मुख्य चुनाव याचिका के गुणों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अब इस मामले को प्रतिवादी के गवाहों के साक्ष्य दर्ज करने की तिथियां निर्धारित करने के लिए 20 अप्रैल, 2026 को अतिरिक्त रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें

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