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सेहत का हाल भी बताते हैं पैर

पैरों से जानें कैसी है आपकी सेहत
पैरों से जानें कैसी है आपकी सेहत

अक्सर हम अपने पैंरों को नजरअंदाज कर देते हैं। साधारण साफ-सफाई के अलावा पैरों की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं जाता है। मगर सिडनी की विशेषज्ञ केट मैकआर्थर का कहना है कि पैरों की हालत से शरीर में होने वाली गंभीर बीमारियों का पता भी लग जाता है। केट पैरों की सेहत से जुड़े मामलों की विशेषज्ञ हैं। उनका कहना है कि पैरों में आमतौर पर रूखापन, एडि़यों का फटना और छाले की समस्या देखने में आती है। मगर बदरंग नाखून, पैरों में सूजन या दर्द देते कुछ निशान गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। 

बदरंग नाखून
बदरंग नाखून

पैरों के नाखूनों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। पीले नाखून फफूंद का संक्रमण के कारण भी हो सकते हैं। इसके अलावा यह सोराइसिस और एक्जिमा की वजह से भी हो सकते हैं। केट का कहना है कि कुछ बेहद असाधारण परिस्थितियों में येलो नेल सिंड्रोम बीमारी में भी पैरों के नाखून पीले होने लगते हैं। इसमें फेफड़ों में सूजन और पानी भरने की समस्या हो जाती है। इसके अलावा पैरों में चोट लगने, जूतों के कारण भी नाखूनों का रंग पीला हो जाता है। केट का कहना है कि पैरों के नाखून में गहरी लकीर के प्रति सतर्कता बरतने की जरूरत है। यह मेलानोमा जैसी बेहद गंभीर बीमारी के कारण हो सकता है। 

पैरों का ठंडा रहना
अगर आपके पैर हमेशा ठंडे रहते हैं, तो इसकी एक वजह ब्लड फ्लो ठीक न होना भी हो सकता है-यह एक सर्कुलेटरी प्रॉबलम है जो आमतौर पर स्मोकिंग, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट डीजीज से होता है। अनियंत्रित डायबीटीज़ के चलते नस डैमेज होने से भी ऐसा हो सकता है। इसकी अन्य संभावित वजहों मे हाइपोथायरॉयडिज़्म और एनीमिया भी हो सकता है।

पैरों की त्वचा रूखी और एडि़यां फटी होना
पैरों की त्वचा रूखी और एडि़यां फटी होना

पैरों की त्वचा रूखी और एडि़यों के फटने के पीछे नमी की कमी कारण हो सकता है। विशेषज्ञों की भाषा में इसे हाईपरकेराटोसिस कहते हैं। इसमें त्वचा काफी सख्त और मोटी हो जाती है और इस पर मॉइश्चराइजिंग क्रीम का भी कोई असर नहीं होता है। त्वचा का लचीलापन खत्म हो जाने के कारण यह फटने लगती है। इसके आलावा डर्मेटाइटिस, सोराइसिस, एक्जिमा या एथलीट्स फूट से भी पैरों की त्वचा रूखी और एडि़यां फटी-फटी हो जाती हैं। 

पैरों से बदबू आना 
कुछ लोग चाहे जितनी भी साफ-सफाई रखें, मगर उनके पैरों से हमेशा बदबू आती रहती है। केट का कहना है कि इसके लिए फंगस और बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं। दिनभर जूता पहनने के कारण पैरों का पसीना अच्छे से सूख नहीं पाता है, जो फंगस और बैक्टीरिया के बढ़ने का करण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जूतों को कुछ समय के लिए बाहर रखें, ताकि उसके अंदर की बदबू खत्म हो सके। हो सके तो अपने मोजों को किसी अच्छे डिटर्जेंट से साफ करें और जूता-मोजा पहनने से पहले पैरों में पाउडर भी लगा सकते हैं।

पैरों में दर्द 
पैरों में खून का प्रवाह सही से नहीं होने के कारण भी दर्द हो सकता है। इसका एक कारण पैरों में ऑक्सिजन की पर्याप्त मात्रा नहीं पहुंच पाना है। इसके अलावा शरीर में मैग्नीशियम की कमी से भी पैरों में दर्द हो सकता है। इसके लिए मैग्नीशियम सप्लिमेंट लेने के अलावा इसका स्प्रे भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

पैरों में सूजन
पैरों में सूजन

इसकी वजह, लंबे समय तक खड़े रहना, लंबी दूरी की हवाई यात्रा करना और गर्भवती महिलाओं को भी यह समस्या हो सकती है। केट का कहना है कि अगर पैरों मे लगातार सूजन बनी रहे तो यह गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। ऐसा खराब रक्त प्रवाह, लासिका प्रणाली की समस्या या खून का थक्का जमने के कारण हो सकता है। गुर्दे की बीमारी में या थायराइड भी पैरों के सूजन की वजह हो सकती है। इसके अलावा सर्जरी के कारण भी तकरीबन छह माह तक पैरों में सूजन बनी रह सकती है। 

घाव नहीं भरना
पैरों में कई बार घाव हो जाते हैं, जो जल्दी नहीं भरते हैं। इनमें काफी दर्द होता है, खून आता है और यह भरता नहीं है। केट का कहना है कि पामोप्लांटर पस्टुलर सोराइसिस में भी पैरों में घाव हो जाते हैं। यह छोटे-छोटे पीले दाने होते हैं, जो अक्सर अधिक धूम्रपान करने वालों को होते हैं। इसके अलावा शरीर में खून की कमी से भी भी पैरों में घाव होने की आशंका होती है। 

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  • Web Title:your feet REALLY tells everything about your health