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तनाव से मुक्ति के लिए कारगर है योग, जरूर आजमाएं 5 आसन

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कंधों में अकड़न, पीठ में खिंचाव और सिर या गर्दन में दर्द, ये सभी मानसिक तनाव (स्ट्रेस) के संकेत हो सकते हैं। हमारे लिए तनाव की अपनी-अपनी वजहें होती हैं। कुछ लोगों के लिए रोजमर्रा का काम भी तनाव का एक कारण होता है। कुछ लोगों को नौकरी तो प्रिय है, लेकिन बॉस उनको तनाव दे जाता है। अगर आपके बच्चे पढ़ रहे हैं तो उनकी परीक्षा का आपको उनके जितना ही तनाव हो सकता है। आप अपनी खुद की किसी परीक्षा को लेकर भी तनाव में हो सकते हैं।

वजह चाहे जो हो, योग आपको तनाव से मुक्ति की राह बताता है। किसी प्रशिक्षित गुरु के मार्गदर्शन में ही योग किया जाना चाहिए जो आपकी मुद्राओं यानी उठने-बैठने के तरीकों को सुधार देगा और तनाव से मुक्ति भी दिलाएगा। हां, एक और बात को ध्यान में रखिएगा कि अगर आप बहुत ज्यादा या अनियंत्रित ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो कृपया कोई भी कसरत करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह ले लें।


तनाव से मुक्ति के लिए यह पांच योग मुद्राएं जरूर आजमाएं -

उत्थानासन या खड़े होकर आगे झुकने की मुद्रा
अपने पैरों के बीच कुछ अंतर रखकर चटाई पर खड़े हो जाएं।अपनी बांहों को सिर के ऊपर ले जाते हुए सांस लें। इसके बाद कमर से आगे की ओर झुकते हुए सांस को छोड़ दें। अपने हाथ की उंगलियों से जमीन को छूने की कोशिश करें। अपना वजन एड़ियों की बजाय पंजे की ओर करने का प्रयास करें। अगर आप इस मुद्रा में आरामदेह स्थिति में हैं तो अपनी हथेलियों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें और सीने को घुटनों के करीब लाने की कोशिश करें। इस स्थिति में 30 सैकंड तक रहें। अपने शरीर को धीरे-धीरे उठाकर फिर सीधा कर लें। सिर सबसे बाद में ऊपर उठाना है। पूरी प्रक्रिया को दो बार दोहराएं। 


प्रसारित पादोत्तानासन या पैर चौड़े करके आगे झुकना
चटाई पर पैरों में चौड़ाई बनाकर खड़े रहें। अगर आप काफी वक्त से योगा कर रहे हैं तो अपनी उंगलियों को पीठ के पीछे एक-दूसरे से जकड़ लें। अब कमर से झुकने के दौरान हाथों को हवा में उठा लें। (जो शुरुआत कर रहें हों या माहिर न हुए हों उन्हें अपने हाथ जमीन पर सीधे रखने की कोशिश करना चाहिए)। जहां तक आराम से जा सकें जाएं। अपनी हैमस्ट्रिंग, सीने और कंधों पर तनाव महसूस करें। इस स्थिति में आधा या एक मिनट तक रहें। शुरुआती स्थिति में आने के लिए अपनी बांहों को नीचे करें, शरीर को उठाएं और आखिर में गर्दन को सीधा करें।

 
ससांगासन या खरगोश मुद्रा
घुटनों के बल चटाई पर बैठ जाएं और पैर पूरी तरह से चटाई पर टिका दें। (पैर की उंगलियों को न मोड़ें) कमर से झुक जाएं और अपना माथा चटाई पर रख दें। अपनी बांहों को पीछे ले जाएं और अपनी एड़ियों को एक-एक हाथ में पकड़ लें। माथे को धीरे से आगे ले जाते हुए कूल्हों को धीरे से ऊपर उठाएं ताकि आपके सिर का ऊपरी हिस्सा चटाई को छू जाए। पीठ को मोड़िए और आराम से सांस लीजिए। इस स्थिति में आधा या एक मिनट तक रहिए। शुरूआती स्थिति में लौटने के लिए अपने पैरों को पीछे ले जाइए। अपने सिर को उठाकर फिर माथे को चटाई पर रहनें दें। कूल्हों को एड़ियों पर ले जाकर टिका दें। बांहों को खुला छोड़ दें। धीरे-धीरे सीधे आकर घुटनों पर झुकने की मुद्रा तक लौट आएं। 


त्रिकोणासन या त्रिकोण मुद्रा
पैरों को चौड़ा करके खड़े हो जाएं। अपनी दोनों बांहों को जमीन के समानांतर उठाते हुए दाएं पैर को बाहर की ओर मोड़ें। कमर से एक तरफ झुकते हुए दाएं हाथ से दायां पैर छूएं। अगर आप आरामदेह स्थिति में हैं तो अपनी हथेली को वहां जमीन पर टिका दें। अब अपने सिर को घुमाकर छत को देखें। शुरुआती स्थिति में आएं और समूची प्रक्रिया को शरीर की बाईं ओर बाएं हाथ, बाएं पैर के साथ दोहराएं। इस आसन को तीन बार करें। 


हलासन या हल की मुद्रा
यह योग में कुछ माहिर लोगों के लिए है। शुरुआत कर रहे लोगों को यह योगा, कंधे पर खड़े होने तक की स्थिति में ही करना चाहिए और हलासन नियमित तौर पर कम से कम एक हफ्ता करें। बेहतर होगा कि यह आसन करते वक्त मदद के लिए किसी को साथ रखें, जो आपके टखनों को पकड़कर अतिरिक्त मदद दे सके या शुरुआती मुद्रा में लौटने में मदद कर सके। 

पीठ के बल लेट जाइए। रोल करके थोड़ी गति पकड़िए और अपने पैरों व कूल्हों को जमीन से ऊपर हवा में उठा दें। अपनी पीठ को हाथों से सहारा दें। अपनी ठुड्डी को सीने पर लगाएं। शरीर को तब तक उठाए जब तक कि आपकी पीठ का बड़ा हिस्सा चटाई से ऊपर हवा में न उठ जाए और आपका वजन आपके कंधों और कोहनियों पर न आ जाए। (यह शोल्डर स्टैंड कहलाता है, शुरुआत कर रहे लोगों को कुछ दिन या हफ्तों तक केवल इस स्थिति तक ही इस आसन को करना है, बाद में वह आगे प्रयास कर सकते हैं)

जब आपको आराम महसूस होने लगे तो एक पैर को कान के बगल में जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। पैर बदलकर दूसरे पैर से भी ऐसा करें। जब यह करने में मुश्किल न हो तो दोनों ही पैरों को अपने सिर को किसी भी ओर टिकाने की कोशिश करें। घुटनों को सीधा रखें और सांस सामान्य रूप से लेते रहें। इस स्थिति में कुछ सैकंड रहें। अगर सांस गिनने में दिक्कत न हो रही हो तो धीमी सांस को 10 तक गिनिए। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए अपने पैरों को उठाकर शोल्डर स्टैंड की स्थिति में लौट आइए। अपने हाथों से पीठ को सहारा देते हुए धीरे-धीरे चटाई पर टिका दीजिए। अपने हाथों को चटाई पर शरीर के दोनों ओर टिका दें। अब धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं। कुछ देर शवासन करके आराम करें। 


सुप्त बद्ध कोणासन 
पैरों को लंबा करके पीठ के बल लेट जाइए। घुटनों को मोड़कर चटाई पर पैरों को एक-दूसरे से सटाकर रख लीजिए (जैसे पैरों से नमस्कार कर रहे हो)। हाथों को कंधे की सीध में या फिर कंधों के नीचे रख लीजिए। कमर को जमीन पर ही रखते हुए (शुरुआत कर रहे लोगों को अपने हाथ-हथेलियां मदद के लिए कूल्हों के नीचे रखना चाहिए) इस स्थिति में सांस लीजिए। इस स्थिति में 30 सैकंड तक रहें। घुटनों को साथ लाएं और कुछ सैकंड आराम करके पूरी प्रक्रिया को चार बार और दोहराएं। 

प्रैक्टिस को समाप्त करने के लिए पैरों को चौड़ा करके चटाई पर लेट जाइए। बांहों को शरीर से 40-50 डिग्री के कोण पर फैला लीजिए। आराम करने की कोशिश कीजिए और शवासन या सोने की मुद्रा में गहरी लंबी सांसें लें। इस स्थिति में कम से कम पांच मिनट रहिए। 

(यह स्वास्थ्य आलेख www.myupchar.com द्वारा लिखा गया है, जो सेहत संबंधी भरोसेमंद सूचनाएं प्रदान करने वाला देश का सबसे बड़ा स्रोत है।)

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