World Day of the Handicapped : Do you know Keeping sharp eye on kids can save them from disabilities - World Day of the Handicapped:बच्चों पर रखी जाए पैनी नजर तो बचे रहेंगे दिव्यांगता से, जानें कैसे DA Image
10 दिसंबर, 2019|1:30|IST

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World Day of the Handicapped:बच्चों पर रखी जाए पैनी नजर तो बचे रहेंगे दिव्यांगता से, जानें कैसे

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के निवासी मनोज सिंह को 6 साल की उम्र में बुखार आया था। डॉक्टर की गलत दवाई से उनके शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, लेकिन मनोज ने जिंदगी के प्रति जज्बा कायम रखा। अब वे फूड डिलीवरी बॉय बनकर अपने दम पर रोजी-रोटी कमा रहे हैं। देश में दिव्यांगों के ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे। लेकिन अब भी एक बड़ी आबादी ऐसी है जो शारीरिक और मानसिक परेशानी के साथ जिंदगी काट रही है। ऐसे ही लोगों के प्रति पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र हर साल 3 दिसंबर को विश्व विकलांगता दिवस मनाता है। इस बार की थीम है - दिव्यांग लोगों की भागीदारी और उनकी नेतृत्व क्षमता को प्रमोट करना।
 
भारत में दिव्यांगता, जानिए कुछ खास बातें-
1.  विश्व बैंक के अनुसार, भारत में 8 करोड़ लोग विभिन्न तरह की दिव्यांगता के शिकार हैं।
2.    भारत की 70 फीसदी दिव्यांग आबादी गांवों में रहती है। इनमें से अधिकांश गरीबी रेखा के नीचे हैं।
3.    सबसे ज्यादा दिव्यांग लोग 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
4.    दुनिया में 1 बिलियन लोग दिव्यांग हैं, यानी दुनिया की कुल आबादी का 15 फीसदी हिस्सा इस स्थिति में जीवनयापन करने को मजबूर है।
5.    भारत में दिव्यांग बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर सामान्य बच्चों से 5 फीसदी अधिक है।
6.    जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार भारत में 2.21 फीसदी आबादी दिव्यांग है।
7.    दुनिया के सबसे ज्यादा दृष्टिबाधित लोग भारत में हैं।
8.    2015 में भारत सरकार ने ऐलान किया था कि विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग का प्रयोग होगा।
9.    भारत में दिव्यांगता के मामले पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में हैं।
10. राइट्स ऑफ पर्सनल विथ डिसेबिलिटी एक्ट 2016 के अनुसार, सभी इमारतों में दिव्यांगों के लिए बेसिक सुविधाओं का होना जरूरी है। 

 दुनियाभर में यह है दिव्यांगता का सबसे बड़ा कारण-

नए शोध से पता चलता है कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोगों की विकलांगता का कारण है। मेडिकल जर्नल एनल्स ऑफ द रयूमेटिक डिजीज में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह डाटा ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2010 के अध्ययन से आया है, जिसमें 187 देशों में सभी बीमारियों से होने वाली विकलांगता को देखा गया था। इन देशों को 21 हिस्सों में बांटा गया। पाया गया कि हर 10 में से 1 शख्स पीठ के निचले हिस्से में दर्द से पीड़ित है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर होती जाती है और शरीर का  निचला हिस्सा काम करना बंद कर देता है। 

इस तरह लगाएं दिव्यांगता का पता- 

मेडिकल जर्नल रेडियोलॉजी में प्रकाशित ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रकार की एमआरआई से दिव्यांगता का सही समय पर पता लगाया जा सकता है। ब्रेन में आयरन लेवल्स का पता लगाकर यह काम किया जाता है। जिन मरीजों में दिव्यांगता की आशंका होती है, उनके ब्रेन में आयरन का असंतुलित स्तर देखा गया है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज-

डॉ. केएम नाधीर के अनुसार, बचपन से नजर रखी जाएगी तो दिव्यांगता से बचा जा सकता है। बच्चे को किसी तरह का दौरा पड़ता है या उसका बर्ताव अचानक बदलता है तो जांच करवाएं। संक्रामक बीमारियों को लेकर बच्चों को सभी जरूरी टीके लगवाए जाने चाहिए।

दिव्यांगता इसकी शुरुआत दिमाग से होती है। मरीज की सोचने-समझने की क्षमता घट जाती है। कई बार उसे पता नहीं होता, वह क्या बोल रहा है। जबान लड़खड़ाती है। बातें याद नहीं रहती हैं। कई बार मरीजों का व्यवहार अचानक बदल जाता है। 

डॉ. के.एम. नाधीर के अनुसार, विकलांगता का इलाज है। व्यवहारिक थेरेपी, शारीरिक थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पीच थेरेपी से प्रभावी इलाज संभव है। सबसे बड़ी जरूरत है दिव्यांग लोगों को भावनात्मक समर्थन की। समर्थन मिलेगा तो हर दिव्यांग मनोज की तरह आत्मसम्मान से जीवन जी सकेगा।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/physical-disability

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