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6 जून, 2020|3:16|IST

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WHO KnowTheFacts: क्या आप कोविड-19 से ठीक हो सकते हैं?, जानें WHO ने इस पर क्या कहा

देश में कोरोनावायरस का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। हर दिन कोविड -19 से संक्रमित मामलों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई तरह के गलत फैक्ट भी वायरल हो रहे हैं। अगर आप भी इन फैक्ट को सही मान बैठें हो तो एक बार विश्व स्वास्थ्य संगठन के इन फैक्ट चैक को पढ़ें लें। यहां जानें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फैक्ट पर क्या कहा: 

क्या आप कोविड-19 से ठीक हो सकते हैं?

WHO ने बताया है कि हमसभी कोरोना वायरस से ठीक हो सकते हैं। कोरोना वायरस हो जाने का मतलब नहीं है कि ये आपको जिंदगी भर रहेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि अधिकतर लोगो कोरोना वायरस से ठीक हो गए हैं और उनके शरीर से यह वायरस निकल गया है। अगर किसी को कोरोना वायरस हो गया है तो उसके लक्षणों को सबसे पहले ठीक किया जाता है। अगर किसी को खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ है तो जल्दी से जल्दी मेडिकल केयर मांगे। इसके लिए अगर संभव हो सके तो फोन पर ही हेल्थ सुविधा के लिए कॉल करें। अधिकतर मरीज कोरोना वायरस से सपोर्टिव केयर से ठीक हुए हैं।

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क्या सूर्य की रोशनी में खड़े होकर और 25  डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान में कोविड-19से बचा जा सकता है?

इस फैक्ट पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि सूर्य की रोशनी में खड़े होकर और 25  डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान में रहकर आप कोविड-19 से बच नहीं ,कते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अगर आप कोरोना वायरस से संक्रमित हैं तो सूर्य की रोशनी और गर्म तापमान से कुछ नहीं होता। ऐसे भी देश हैं जहां तापमान ज्यादा हैं, फिर भी वहां कोरोना वायरस के अधिक से अधिक मामले आ रहे हैं। इसलिए कोरोना वायरस से बचना है तो अफने हाथ धोते रहें और अपनी आंख, नाक और मूंह को हाथ लगाने से बचें। 

 

 

क्या कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए दो लोगों के बीच एक से दो मीटर की दूरी पर्याप्त है?

‘जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रॉपलेट के जरिये होने वाले कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम दूरी 8 मीटर या 27 मीटर होनी चाहिए। अध्ययन में यह भी इशारा किया गया है कि सिर्फ दूरी को ही ध्यान में रखना काफी नहीं है। जब कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो छींक या खांसी के दौरान बाहर आईं ड्रॉपलेट का आकार अलग-अलग हो सकता है, तो उनके नष्ट होने में समय अलग-अलग हो सकता है। इसलिए कुछ ड्रॉपलेट के हवा में घंटों तक बने रहने का खतरा हो सकता है। हालांकि इस अध्ययन को ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इनफेक्शस डिजीज’ ने भ्रामक करार दिया है।

 

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  • Web Title:WHO Coronavirus Know The Facts: Can you recover from Covid-19 know what world health organization said on this