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21 जनवरी, 2020|10:44|IST

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नसों की कमजोरी बन सकती है इन रोगों का कारण

weakness in the vein

स्वस्थ शरीर के लिए नर्वस सिस्टम का मजबूत रहना जरूरी है। नसें महत्वपूर्ण अंग होती हैं जो शरीर में रक्त संचारित करती हैं। अच्छी सेहत के लिए यह बहुत अहम है। नसें शरीर के अलग-अलग अंगों से होकर गुजरती हैं और जब कोई अंग कमजोर होता है तो इसका असर नसों पर भी होता है। नसों की कमजोरी कई रोगों का कारण बन सकती है, इसलिए समय रहते उपचार करना जरूरी है। अगर नसें कमजोर हो गई हैं तो शरीर में होने वाले प्रभाव की पहचान जरूरी है ताकि समय पर सही इलाज मिल सके। सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि नसें आखिर कमजोर क्यों होती हैं? इस संबंध में जागरूकता की जरूरत को देखते हुए हाल ही में दुबई में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। समय पर लक्षणों को देखकर सही इलाज शुरू कर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं। 

www.myupchar.com से जुड़े ऐम्स के डॉ. नबी वली के मुताबिक, शरीर के कुछ हिस्सों की नसें कमजोर या गतिहीन हो जाती हैं। कुछ लोगों के लिए यह समस्या थोड़े समय के लिए होती है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह स्थायी भी हो सकती है। प्रभावित नस के प्रकार के आधार पर या तो नस से संबंधित शरीर का अंग ठीक से काम नहीं कर पाता या इन्सान कुछ महसूस नहीं कर पाता।

नसों की कमजोरी की सबसे आम वजह है इनमें किसी प्रकार की क्षति, नस विकृत होना, दर्द या सूजन से प्रभावित होना, नर्व सेल्स पर ट्यूमर का विकास, नसों पर विषाक्त पदार्थों का प्रभाव, नसों पर दबाव। नसें कमजोर होने के अन्य कारणों में शामिल हैं - बैक्टीरिया, वायरस के कारण होने वाले इंफेक्शन, ऐसी दवाइयां जो कि नसों को नुकसान पहुंचाए, जन्मजात दोष।

डॉ. वली के मुताबिक कुछ बीमारियों या पोषण की कमी या जीवनशैली से सम्बंधित समस्याओं के कारण नसों की कमजोरी या तंत्रिका तंत्र की कमजोरी हो सकता है। इसके परीक्षण के लिए लक्षणों की जांच, ब्लड टेस्ट या नसों के टेस्ट का प्रयोग किया जाता है और इसका इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। 

अगर नसें कमजोर हो रही हैं तो एक बड़ा संकेत है कि व्यक्ति की याद्दाश्त घटने लगती है। चक्कर आना भी एक महत्वपूर्ण लक्षण है क्योंकि खून का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता है। एक अन्य संकेत है उठते और बैठते हुए आंखों के सामने अंधेरा छाना। सूंघने, देखने, सुनने, स्वाद लेने या स्पर्श अनुभव की शक्ति कमजोर होने लगती है। मांसपेशियों में कमजोरी और कंपकंपी होती है।

कमजोर नसें  कई बीमारियों को जन्म दे सकती हैं। नसों पर अगर दवाब पड़ता है तो साइटिका की परेशानी हो सकती है। नसों में खिंचाव और दर्द संबंधी समस्या को साइटिका कहा जाता है जो कूल्हों और जांघ के पिछले हिस्से में उत्पन्न होती है। यह परेशानी तब शुरू होती है, जब कूल्हे की नस को क्षति पहुंचती है।

नसों की कमजोरी मल्टीपल स्क्लेरोसिस का भी कारण बन सकती है। यह ऐसी बीमारी है जो रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को प्रभावित करती है। इसमें किसी व्यक्ति को अक्षम करने की क्षमता है। यह एक ऑटोम्यून्यून बीमारी है। इसमें माइलिन शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली से खतरे में पड़ती है। माइलिन बिजली का संचालन करने वाले तारों पर इन्सुलेशन के कोट के समान है।

व्यक्ति बेल्स पाल्सी का शिकार हो सकता है जिसमें चेहरे के एक तरफ की नसों में सूजन आ जाती है। इससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

ब्रेन टिश्यू के हिस्से पर खून के थक्के बनने से स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है। व्यक्ति पार्किंसन से भी पीड़ित हो सकता है। पार्किंसन यह न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है जो मस्तिष्क की कुछ नसों को धीरे-धीरे क्षति पहुंचाता है।

नसों की कमजोरी से छुटकारा पाने के लिए विटामिन, मैग्नीशियम, ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त चीजों का भरपूर सेवन करें। डॉ. वली के मुताबिक, सेंधा नमक सूजन को कम करता है और मांसपेशियों व नसों के बीच के संतुलन को बेहतर बनाता है। सेंधा नमक में मैग्नीशियम और सल्फेट पाया जाता है, जो इसके गुणों का मुख्य स्रोत होता है। सेंधा नमक के पानी से नहाने से नसों और मांसपेशियों की कमजोरी को दूर किया जाता है। अश्वगंधा और कैमोमाइल-टी भी फायदेमंद है। 

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स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं

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  • Web Title:weakness in the vein : Venous Insufficiency: Causes Symptoms and Diagnosis