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26 अप्रैल, 2021|2:47|IST

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अगर थायराइड है तो टीएसएच टेस्ट के बारे में भी जानें

थायराइड आम बीमारी हो गई है। पहले यह समस्या बड़ी उम्र वालों, और खासतौर पर महिलाओं में ज्यादा होती थी, लेकिन अस्वस्थ खान-पान और अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण बड़ी संख्या में युवा तथा बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। डायग्नोस्टिक चेन एसआरएल की 2017 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, '32 फीसदी भारतीय थायरॉइड से जुड़ी विभिन्न प्रकार की बीमारियों के शिकार हैं'। अब तो थायराइड कैंसर के मामले सामने आने लगे हैं। ऑस्टिन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस के अध्ययन में पता चला है कि 'थायराइड कैंसर के कारण हर साल लाखों मरीजों को अपनी थायराइड ग्रंथि या इसका कोई हिस्सा निकलवाना पड़ रहा है।' अमेरिका के गैर-सरकारी संगठन एएआरपी के अनुसार, 'थायराइड दुनिया की उन 9 बीमारियों में शामिल हैं, जिन्हें पहचानने में डॉक्टर गलती कर जाते हैं।' इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन-सा टेस्ट करवाने से थायराइड का सही-सही पता लगाया जा सकता है। इसका जवाब है-टीएसएच यानी थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट। जानिए इसके बारे में - 

थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट थायराइड ग्रंथि पर किया जाता है। इससे पता लगाया जाता है कि थायराइड ग्रंथि ठीक से काम कर रही है या नहीं? कहीं यह ओवरएक्टिव या अंडरएक्टिव तो नहीं? ये दोनों ही परिस्थितियां नुकसानदायक होती हैं। सबसे खास बात यह है कि इस टेस्ट से शरीर में थायराइड का कोई लक्षण नजर आने से पहले ही बीमारी का पता लगाया जा सकता है। 

पहले जानें थायराइड क्या है
मानव शरीर में ग्रंथी (ग्लैंड) एक ऐसा अंग है जो शरीर के विकास के लिए जरूरी रासायनिक पदार्थों को स्रावित (निकालता) करता है। थायराइड ग्रंथी टी4 सहित विभिन्न हार्मोन निकालता है जिन्हें संयुक्त रूप से थायराइड हार्मोन कहते हैं। ये हार्मोन पूरे शरीर में काम करते हैं और शारिरिक विकास, शरीर का तापमान और चयापचय (मेटाबोलज्म) प्रभावित करते हैं। नवाजात शिशुओं और बच्चों का दिमाग विकसित करने में भी इन हार्मोन्स की भूमिका होती है। थायराइड हार्मोन्स के बनने और शरीर में उपयोग को लेकर कोई परेशानी है तो टीएसएच टेस्ट जरूरी हो जाता है। 
टीएसएच टेस्ट कैसे किया जाता है

खून की जांच के माध्यम से यह टेस्ट किया जाता है। खून का सैंपल सामान्य तरीके से लिया जाता है और फिर लैब में जांच होती है। पता लगाया जाता है कि खून में टीएसएच की मात्रा क्या है? यह टेस्ट किसी भी सामान्य लैब पर करवाया जा सकता है। 

थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट कब करवाना चाहिए
सलाह दी जाती है कि 40 साल की अधिक उम्र के लोगों को साल में एक बार यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हमारे देश में ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता होता कि उन्हें थायरायड की बीमारी है क्योंकि इसके लक्षण बेहद सामान्य होते हैं। 

थायरोइड टेस्ट किसको कराना चाहिए
जिन लोगों को लगता है कि उनका वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ा हुआ है, उन्हें समय-समय पर थायराइड टेस्ट करवाते रहना चाहिए। यदि किसी को बिना किसी कारण के थकान होती है, कमजोरी लगती है, आलस्य आता है, हाथ-पैर में सूजन है, भूख ज्यादा लगती है तो भी थायराइड हो सकता है। यह स्थिति किसी भी आयु वर्ग के लोगों में हो सकती है। आज कल बच्चे भी शिकार होने लगे हैं। यह बीमारी महिलाओं में सबसे ज्यादा होती है। 

टीएसएच टेस्ट के परिणाम का मतलब
वयस्कों में इसका सामान्य स्तर 0.4 से 5 मिली इंटरनेशनल यूनिट्स प्रति लीटर (mIU/L) होता है। यदि खून में टीएसएच का स्तर ज्यादा है तो अंडरएक्टिव थायराइड हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान टीएसएच बढ़ा हुआ हो सकता है। यदि मरीज स्टेरॉयड, डोपामाइन, या ओपिओइड दर्द निवारक (जैसे मॉर्फिन ) दवाओं का सेवन कर रहा है तो जांच में टीएसएच का सामान्य से कम स्तर आ सकता है। टीएसएच का कम स्तर ऑवरएक्टिव थायराइड का संकेत देता है। यदि टेस्ट में टीएसएच का सामान्य से कम स्तर आता है तो इसका अर्थ है कि शरीर में आयोडीन बहुत अधिक बढ़ गया है। मरीज थायराइड हार्मोन की दवाओं का जरूरत से अधिक सेवन कर रहा है।

टीएसएच टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं?     
मोटे तौर पर इस टेस्ट का कोई जोखिम नहीं है। हां, जब मरीज के खून के सैंपल लिया जाता है, तब थोड़ा दर्द होता है। सूई से खून निकालने में सावधानी न बरती जाए, तो मरीज को परेशानी हो सकता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम सामने आए हैं। इस तरह यह टेस्ट कभी भी, कहीं भी करवाया जा सकता है। इसमें कोई बड़ा जोखिम नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफोर्मेशन (एनसीबीआई) के मुताबिक, 99.6 फीसदी मामलों में यह टेस्ट सफल होता है।  

थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट से पहले 
कुछ दवाएं ऐसी हैं तो टीएसएच टेस्ट के परिणाम को प्रभावित करती हैं। मसलन - ऐमियोडैरोन, लिथियम, पोटैशियम आयोडाइड, प्रेडनिसोन, डोपामाइन। इसलिए यदि मरीज इनमें से किसी दवा का सेवन कर रहा है तो टीएसएच टेस्ट से पहले डॉक्टर को सूचना जरूर दें। डॉक्टर की सलाह पर इन दवाओं का सेवन कुछ दिन के लिए बंद करने के बाद टेस्ट करवाया जा सकता है।   

टीएसएच टेस्ट के बाद यह है इलाज
अंडरएक्टिव थायराइड की स्थिति में डॉक्टर सिंथेटिक थायराइड हार्मोन की एक गोली रोज खाने की सलाह देते हैं। इससे हार्मोन्स का संतुलन बनता है और मरीज सामान्य महसूस करना शुरू कर देता है। मोटापे का शिकार मरीजों का वजन भी घटने लगता है। दो या तीन माह के डोज के बाद एक बार फिर टीएसएच टेस्ट किया जाता है और रिजल्ट सामान्य आने पर दवा बंद कर दी जाती है। 

ऑवरएक्टिव थायराइड का इलाज
इस स्थिति में इलाज के कई विक्ल्प शामिल हैं, जैसे - थायराइड का स्तर घटाने के लिए रेडियोएक्टिव आयोडीन या जरूरत से ज्यादा मात्रा में बन रहे हार्मोंस को रोकने के लिए एंटी-थायरोइड दवाओं का सेवन। यह बीमारी जरूरत से ज्यादा बढ़ने पर हृदय गति बढ़ जाती है, जिसे सामान्य करने के लिए बेटा ब्लॉकर्स का उपयोग किया जाता है। हालात जरूरत से ज्यादा बिगड़ जाए तो फिर सर्जरी भी की जाती है। 

ऐसे होता है थायराइड कैंसर का टेस्ट
myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज के अनुसार, थायराइड की कोशिकाओं में थायराइड कैंसर का निर्माण होता है। इसका पता लगाने के लिए विभिन्न टेस्ट किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं - अल्ट्रासाउंड, स्कैन, बायोप्सी और लैरिंगोस्कोपी। इसके अलावा ब्लड में कैल्शियम, फास्फोरस और कैल्सीटोनिन की मात्रा की जांच भी होती है। 

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स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

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  • Web Title:Thyroid Stimulating Hormone TSH: TSH Levels Test