The benefits of mayurasan and relevant facts - सांसों में ताजगी के साथ इन फायदों के लिए करें मयूरासन DA Image
17 नबम्बर, 2019|4:17|IST

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सांसों में ताजगी के साथ इन फायदों के लिए करें मयूरासन

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सांसों से बदबू आए तो कई जगह शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। कई बार यह समस्या किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। कुछ उपाय अपनाकर इस बदबू से मुक्ति पा सकते हैं, बता रहे हैं योगाचार्य कौशल कुमार-


आहार में करें सुधार  
कुछ लोग मुंह से दुर्गंध आने की समस्या से पीड़ित होते हैं। उनकी सांस और बात करते समय निकलने वाली हवा भी दुर्गंधयुक्त होती है। वैसे तो आजकल पूर्ण स्वस्थ दिखाई देने वाले लोगों के मुंह से भी दुर्गंध आना आम बात है, किन्तु यह कभी-कभी अनेक रोगों का परिणाम हो सकती है। यह एक ऐसी समस्या है, जिससे हर मनुष्य घृणा करता है। इस समस्या का मुख्य कारण पाचन प्रणाली का कमजोर होना या दांतों या मसूड़ों का कोई विशेष रोग होता है। यौगिक क्रियाओं के नियमित अभ्यास से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। इसमें कुछ यौगिक क्रियाएं बहुत लाभकारी हैं।
आसन
इसमें मयूरासन,  सर्वांगासन, शीर्षासन, धनुरासन, पवन मुक्तासन, राजकपोतासन तथा नौकासन बहुत उपयोगी साबित होते हैं।
मयूरासन की अभ्यास विधि
जमीन पर उकड़ू बैठ जाएं। एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाकर घुटनों को सामने की ओर जमीन पर रखें। दोनों हाथों की कोहनियों पर नाभि को स्थिर करते हुए हथेलियों को जमीन पर रखें। अब माथे को आगे की ओर जमीन पर टिकाकर दोनों पैरों को पीछे की ओर सीधा तान दें। हथेलियों पर पूरे शरीर के भार को उठाएं। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं।
 खास बातेंं--
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हार्निया से पीड़ित
तथा कमजोर, अशक्त एवं वृद्ध लोग इसका अभ्यास न करें। वे पवनमुक्तासन का अभ्यास कर सकते हैं।
प्राणायाम
उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास है रामबाण।
उज्जायी प्राणायाम की अभ्यास विधि
ध्यान के किसी भी आसन (पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन) या कुर्सी पर रीढ़, गले व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। आंखों को हलका बन्द कर हथेलियों को घुटनों पर सहजता से रखें। जिह्वा के अग्र भाग को मोड़कर इसे ऊपरी तालू से सटा लें। यह खेचरी मुद्रा है। अब मुंह को हल्का खोलकर एक गहरी तथा धीमी श्वास अन्दर लें तथा गहरी तथा धीमी श्वास मुंह द्वारा ही बाहर निकालें। यह  उज्जायी प्राणायाम का एक चक्र है। प्रारंभ में इसके 15-20 चक्रों का अभ्यास करें।
सावधानी बरतें
कफ प्रकृति के लोग उक्त क्रिया मुंह से न कर नासिका द्वारा करें।
अन्य उपाय
-कब्ज की समस्या से पीड़ित हैं तो उसे रोकने का हरसंभव प्रयास करें, क्योंकि यह आपकी सेहत को बुरी तरह बिगाड़ सकता है।
-सुबह और रात में सोने से पहले टूथब्रश और मंजन से दांतों की सफाई करें। यदि संभव हो तो ब्रश की जगह नीम या बबूल की दातून करें।
- नीबू, पुदीने का रस तथा नमक एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह-शाम कुल्ला करें, इससे लाभ मिलेगा।

शुद्ध, शाकाहारी, सात्विक, हल्का तथा सुपाच्य भोजन खाएं। कच्चा पालक तथा पत्ता गोभी चबा-चबाकर सुबह-शाम खाएं। फलों में संतरा, नारंगी, नीबू तथा आंवले का सेवन करें। भोजन के बाद तुलसी, पुदीना, कच्ची शलजम चबा-चबा कर खाएं। जीरे को हल्का भूनकर सुबह-शाम भोजन के बाद चबाएं। आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण दोनों समय के भोजन के बाद सेवन करें। जीभ का मैलापन दूर  करने के लिए लाल टमाटर पर सेंधा नमक लगाकर खाएं।

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