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मुश्किल नहीं है थैलेसीमिया का उपचार, जानें इससे बचने के उपाय

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थैलेसीमिया रक्त से संबंधित ऐसी आनुवंशिक बीमारी है, जो रक्त कोशिकाओं के कमजोर होने और नष्ट होने के कारण होती है। यह वैरिएंट या किसी जीन की अनुपस्थिति के कारण भी होती है, जो हीमोग्लोबिन प्रोटीन के निर्माण को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। हीमोग्लोबिन प्रोटीन एक ऐसी जरूरी चीज है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन ले जाने में मदद करती है। रक्त से संबंधित इस आनुवंशिक बीमारी का रोगियों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। जैसे उनमें आयरन का स्तर बढ़ जाता है, हड्डियों में विकृति आ जाती है और गंभीर मामलों में हृदय रोग भी हो सकते हैं।  

अगर थैलेसीमिया की पुष्टि हो जाए
यदि आपको या आपके साथी को थैलेसीमिया है, तो अपने डॉक्टर से बात करें, जो आपको परिवार बढ़ाने की योजना बनाने से पहले आपकी मदद कर सकते हैं। इससे आपको अपने बच्चों में यह बीमारी होने की आशंका को समझने में मदद मिलेगी और आप प्रसवपूर्व परीक्षण कराकर इस बीमारी से मुक्त बच्चे पैदा कर सकेंगे। 

थैलेसीमिया के रूप
सामान्य हीमोग्लोबिन में दो शृंखलाएं होती हैं और प्रत्येक शृंखला में अल्फा और बीटा ग्लोबिन होती हंै। लेकिन थैलेसीमिया के मरीज में अल्फा या बीटा ग्लोबिन की कमी होती है। हीमोग्लोबिन अणु की कौन-सी शृंखला प्रभावित है, उसी के आधार पर थैलेसीमिया को वर्गीकृत किया जाता है। 

बरतें सावधानी 
रक्त चढ़ाने वाले लोगों को किसी भी प्रकार का आयरन सप्लिमेंट लेने से बचना चाहिए। ऐसा करने से शरीर में अधिक मात्रा में आयरन का निर्माण हो सकता है, जो हानिकारक हो सकता है। अधिक रक्त चढ़ाने वाले रोगियों में अतिरिक्त आयरन को हटाने में मदद करने के लिए आयरन कीलेशन थेरेपी कराने की आवश्यकता हो सकती है। 

क्या है इलाज
- थैलेसीमिया का इलाज इस बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। थैलेसीमिया के लक्षण वाले रोगियों को इलाज की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन उनके लिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि यदि वे थैलेसीमिया के लक्षण वाले किसी अन्य व्यक्ति से शादी करते हैं, तो उनसे होने वाले बच्चे के थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित होने का जोखिम होता है।
- पिछले कुछ सालों में थैलेसीमिया के इलाज में काफी सुधार हुआ है। मध्यम और गंभीर थैलेसीमिया से पीड़ित लोग अब लंबी जिंदगी जी रहे हैं।
- थैलेसीमिया मेजर के रोगियों के इलाज में क्रोनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन थेरेपी, आयरन कीलेशन थेरेपी आदि शामिल हैं। इसमें कुछ ट्रांसफ्यूजन भी शामिल होते हैं, जो मरीज को स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की अस्थायी रूप से आपूर्ति करने के लिए आवश्यक होते हैं, ताकि उनमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो सके और रोगी के शरीर के लिए जरूरी ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम हो।  

थैलेसीमिया मेजर 
जब पति-पत्नी दोषपूर्ण जीनों के वाहक हों और जब वे संतान पैदा करते हैं, तो उनके चार में से एक बच्चे में उनके वाहक जीन आने की आशंका हो सकती है और वह बच्चा बीटा थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित हो सकता है। 

थैलेसीमिया माइनर
थैलेसीमिया माइनर तब होता है, जब मरीज माता-पिता में से केवल एक से दोषपूर्ण जीन प्राप्त करता है। अल्फा और बीटा थैलेसीमिया के माइनर रूप वाले लोगों में लाल रक्त कोशिकाएं छोटी होती हैं।

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