DA Image
29 जनवरी, 2020|11:57|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारत में पहली बार शॉकवेब से दिल की धमनी के ब्लॉकेज खोली

opened blockage of heart artery

दिल की धमनी के ब्लॉकेज के शिकार हो चुके मरीजों के लिए अच्छी खबर है। गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग ऐसे मरीजों के दिल के ब्लॉकेज को एब बिना जोखिम के खोला जा सकेगा। भारत में पहली बार शॉकवेब लिथोट्रिप्सी के जरिए दिल का ब्लॉकेज खोला गया है। दिल्ली स्थित फोर्टिस एस्कोर्ट अस्पताल के चेयरमैन डॉक्टर अशोक सेठ ने दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल पहुंचे एक मरीज के दिल की धमनी की रुकावट को इस तकनीक के जरिए ठीक किया है। इस प्रक्रिया में अवलोकन के लिए लंदन के किंग्स मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जोनाथन हिल भी मौजूद थे। पिछले सप्ताह ही भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर विभाग से शॉकवेब लिथोट्रिप्सी के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है। 

बैलून एंजियोप्लास्टी असफल होने पर जीवनदान देने वाली तकनीक है 
67 वर्षीय मरीज डायबिडीज के मरीज थे। उनकी दिल की धमनी में 90 फीसदी तक ब्लॉकेज था। अभी तक भारत में बैलून एंजियोप्लास्टी ही ऐसे ब्लॉकेज को हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक थी। इस प्रक्रिया में एक गाइड वायर के सिरे पर रखकर एक खाली और पिचके गुब्बारे(बैलून कैथेटर) को धमनी के संकुचित स्थान में डाला जाता है और फिर सामान्य रक्तचाप पर दवाब का उपयोग करते हुए उसे एक निश्चित आकार में फुलाया जाता है। गुब्बारा धमनी या शिरा के अन्दर जमा हुई वसा को खण्डित कर देता है और रक्त वाहिका को बेहतर प्रवाह के लिए खोल देता है और इसके बाद गुब्बारे को पिचका कर उसी तार (कैथेटर) द्वारा वापस खींच लिया जाता है। इससे धमनी में रक्त प्रवाह शुरू हो जाता है। हालांकि 67 वर्षीय मरीज का ब्लड प्रेशर बेहद ज्यादा था। गुब्बारा वहां तक पहुंचने से पहले ही दबाव की वजह से फट जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए शॉकवेब लिथोट्रिप्सी का इस्तेमाल किया गया। प्रक्रिया के तहत गुब्बारे के आकार के कैथेटर को दिल की धमनी में डाला गया। इसके तुरंत बाद एक निश्चित मात्रा में शॉकवेब छोड़ी गईं। धमनी में जमा कैल्सियम को इन तरंगों ने तोड़ दिया और मरीज की धमनी की रुकावट दूर हो गई। इसके बाद उसका रक्तसंचार ठीक तरीके से होने लगा। 

20 फीसदी मरीजों में एंजियोप्लास्टी होना मुश्किल
फोर्टिस के डॉक्टर अशोक सेठ ने बताया कि 20 फीसदी मरीजों की धमनियों में कैल्सियम जमकर इतना कठोर हो जाता है कि एंजियोप्लास्टी करना मुश्किल हो जाता है। अधिक उम्र वाले मरीज या फिर मधुमेह के शिकार मरीजों या लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों में एंजियोप्लास्टी करने में दिक्कतें आती हैं। ऐसे मरीजों के लिए शॉकवेब लिथोट्रिप्सी एक जीवनदान की तरह साबित होगी। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह ही उन्हें इसकी अनुमति मिली थी।  अमेरिका और ब्रिटेन में यह तकनीक काफी इस्तेमाल होती है हालांकि भारत में यह पहला मामला था। 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Success: delhi doctors opened blockage of heart artery though Shockwave