Scientists developing drugs to curb radiation exposure on astronauts - अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण से बचाने के लिए नई दवा बना रहे विशेषज्ञ DA Image

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अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण से बचाने के लिए नई दवा बना रहे विशेषज्ञ

अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण का खतरा हमेश बना रहता है। पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भविष्य की अंतरिक्ष यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए काम कर रहे हैं। एक शोध में पता चला है कि अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण की चपेट में आने से बचाने के लिए विशेषज्ञों ने दवाओं का एक सेट तैयार किया है।

लंबे समय तक विकिरण के बीच होगा रहना
अंतरिक्ष परियोजना पर निजी तौर पर काम करने वाली कंपनी स्पेसएक्स और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्था नासा मंगल ग्रह पर मनुष्य को पहुंचाने का ख्वाब देख रहे हैं। धरती से मंगल की यात्रा तय करने में नौ माह का समय लगेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक खतरनाक विकिरण के बीच रहेंगे, जिससे उन्हें कैंसर होने का खतरा हो सकता है। 

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र करता है रक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि धरती का चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष से आने वाली खतरनाक रेडिएशन से मनुष्यों की रक्षा करता है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर भी यही कारण अंतरिक्ष यात्रियों की ढाल बनता है। मगर मंगल पर जाने वाले यात्रियों के लिए कई तरह की चुनौतियां होंगी। मंगल पर जाने वाला यान जब पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकलेगा, तो उसमें सवार सभी यात्री खतरनाक रेडिएशन के बीच से होकर गुजरेंगे। इससे उनके शरीर को गंभीर क्षति हो सकती है। 

कैंसर समेत कई बीमारियों का खतरा
विकिरण के बीच लंबा समय गुजारने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को साधारण से कैंसर जैसी कई तरह की बीमारियां होने का खतरा हो सकता है। अनुमान के मुताबिक अपने पूरे कार्यकाल में अंतरिक्ष यात्री आठ सौ से 1200 मिलीसीवर्ट्स (एमएसवी) विकिरण का सामना करते हैं। एमएसवी विकिरण को नापने का पैमाना होता है। मंगल पर जाने वाले यात्रियों को 660 एमएसवी तक रेडिएशन से गुजरना होगा। 

फार्मा कंपनी ने की दवा बनाने की पहल
कंपनी ने अंतरिक्षयात्रियों और मंगल पर बसने की चाहत रखने वालों को विकिरण से बचाने के लिए रेडियोप्रोटेक्टर बनाने की पहल की है। रेडियोप्रोटेक्टर एक तरह के मॉलिक्यूल होते हैं जो शरीर को विकिरण के तत्वों से बचाते हैं। 

कैसे काम करते हैं रेडियोप्रोटेक्टर
रेडियोप्रोटेक्टर में सेनोरीमीडिएटर्स, जेरोप्रोटेक्टर्स और सेनोलिटिक्स मॉलीक्यूल्स होते हैं। 

जेरोप्रोटेक्टर्स : यह मॉलीक्यूल बढ़ती उम्र की प्रक्रिया को धीमा करते हैं या कुछ मामले में पलट भी देते हैं। जेरोप्रोटेक्टर्स रेडिएशन की चपेट में आने से बचाता है, मगर इसके कई दुष्प्रभाव भी हैं। इसलिए वैज्ञानिक इसके अन्य विकल्पों पर भी काम कर रहे हैं। 

सेनोरीमीडिएटर्स : यह मॉलीक्यूल कोशिकाओं की उम्र के बढ़ने की प्रक्रिया को पलटकर युवाकाल में पहुंचा देते हैं। ईजीसीजी, एनएसी और माइरिसेटिन तत्वों को सेनोरीमीडिएटर्स कहा जा सकता है।

सेनोलिटिक्स : यह मॉलीक्यूल शरीर में पूर्ण सेनेसेंट कोशिकाओं को मारते हैं, क्योंकि इनमें से कुछ कोशिकाओं के कैंसर में तब्दील होने का खतरा हो सकता है। 

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