Police fire tear gas shells to stop the problem know what is the effect - बवाल थामने को पुलिस दागती है आंसू गैस के गोले, जानिए क्या होता है इनका असर DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बवाल थामने को पुलिस दागती है आंसू गैस के गोले, जानिए क्या होता है इनका असर

tear gas

हांगकांग हो या दुनिया को कोई और हिस्सा, प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए पुलिस आंसू गैस का इस्तेमाल करती है। यह कोई नई बात नहीं है। इतिहासकार बताते हैं कि आंसू गैस का पहला कनस्तर अगस्त 1914 में यानी करीब 105 साल पहले फेंका गया था। यह प्रथम विश्व युद्ध के दौरान की बात है। तब मकसद था, दुश्मन सेना को पीछे धकेलना। आजकल पुलिस भीड़ पर इसका प्रयोग करती है। जाहिर तौर पर आंसू गैस, बंदूक की गोली चलाने से तो कहीं ज्यादा सुरक्षित है। लेकिन, आंसू गैस का असर भी कम नहीं होता है। जानिए इसी बारे में -

क्या है आंसू गैस?

आंसू गैस में ओ-क्लोरोबेंजिलिडीन मैलोनीट्राइल (सीएस), डिबेंजोक्साजेपाइन (सीआर) और फेनासिल क्लोराइड (सीएन) होते हैं। इन कैमिकल्स को दंगा नियंत्रक एजेंट्स (आरसीए) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है, क्योंकि ये आंखों में कॉर्निया की नसों पर असर डालते है, जिससे आंसू निकलते हैं। इसी गुण के कारण इसे आंसू गैस कहा जाता है।

जाने-माने जर्नल 'एनल्स ऑफ द न्यूयॉर्क अकादमी ऑफ साइंसेस' में प्रकाशित एक आर्टिकल के अनुसार, हाल के सालों में आंसू गैस का प्रयोग बढ़ा है। तुर्की, यूनाइटेड स्टेस्ट, हांगकांग, ग्रीस, ब्राजील, मिस्र और बहरीन में भीड़ पर इनका खुलकर प्रयोग हुआ है।

आंसू गैस के प्रयोग से परेशानी क्यों?

आंसू गैस का शरीर पर गहरा असर पड़ता है। यह 20 सेकंड में असर दिखाना शुरू करती है और 15 मिनट तक इन्सान तड़पता रहता है। दुनिया में सबसे ज्यादा सीएस आंसू गैस का प्रयोग होता है।

नवंबर 2018 में 'साइंटिफिक अमेरिकन' मैग्जीन में प्रकाशित लेख में अंगस चेन ने लिखा है, शरीर में दो तरह के पेैन रिसेप्टर (दर्द का अहसास करवाने वालीं सेल्स) होते हैं टीआरपीए1 और टीआरवीए1. दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाली आंसू गैस इनमें से किसी एक को एक्टिव करती है। इसी आधार पर आंसू गैस को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पहला, टीआरपीए1- एक्टिविंग एजेंट्स, जिसमें 2-क्लोरो बेंजाइल नाइट्राइल सीएस गैस नामक कैमिकल होता है। अमेरिकी में इसी एजेंट के इस्तेमाल की अनुमति है। चेन ने यह भी लिखा कि आजकल सीएस के नए रूपों में सिलिकॉन का इस्तेमाल होने लगा है, जिसके पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और इन्सानों को भी ज्यादा दर्द होता है। आंसू गैस का दूसरी श्रेणी है - सीआर और सीएन जो कि सीएस से ज्यादा ताकतवार होती है।

यूनाइटेड स्टेट सेंटर फॉर कम्युनिकेबल डिजीज के अनुसार, सीएस आंसू गैस के कारण शरीर में दर्द होता है, आंखें जलती हैं, आंसू आते हैं, कंजक्टिवाइटिस होता है, एरिथेमा यानी त्वचा और खासतौर पर पलकें लाल हो जाती हैं, गले में जलन होती है, बहुत ज्यादा खांसी आती है, सीने में जकड़न होती है; सरदर्द होता है।

आंसू गैस का सबसे खतरनाक असर?

2011 के अरब के विरोध प्रदर्शनों के बाद ड्यूक यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर स्वेनएरिक जोर्ड ने लिखा था कि आंसू गैस की शिकार गर्भवती महिलाओं में गर्भपात के मामले बढ़ रहे हैं। संभवतया आंसू गैस में शामिल केमिकल के असर और तनाव के कारण ऐसा हो रहा है।

आंसू गैस के दूरगामी परिणामों में खतरनाक स्तर का अस्थमा शामिल है। कार्डियोवेस्क्युलर फंक्शन में अनियंत्रण के साथ ही सांस में बाधा आती है। आंसू गैस के ज्यादा असर से त्वचा जलने और सूजन की समस्या हो सकती है, खासतौर पर जब सीएन गैस का उपयोग हो।

इस साल अगस्त के मध्य में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित आर्टिकल में स्थानीय डॉक्टरों के हवाले से लिखा गया है कि हांगकांग में अमानवीय रूप से आंसू गैस का प्रयोग किया गया। बगैर चेतावनी के प्रदर्शनकारियों पर भारी मात्रा में आंसू गैस का प्रयोग किया गया। यद्यपि फार्मास्युटिकल कंपनियां कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक आंसू गैस का असर खत्म करने का कोई तरीका नहीं खोजा जा सका है।

यह भी देखेंः https://www.myupchar.com/disease/eye-allergies

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं। 
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Police fire tear gas shells to stop the problem know what is the effect