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फ्रैक्चर में और गर्भावस्था के लिए उपयोगी है फिजियोथेरेपी, जानें खास बातें

physiotherapy

आराम दायक लाइफ स्टाइल हमें दर्द दे रही है। घंटों कुर्सी पर वक्त बिताना और गलत मुद्रा में बैठने से कमर, हाथ, पैर व घुटनों में दर्द शुरू हो जाता है। ऐसी सस्याओं से निपटने में फिजियोथेरेपी काफी कारगर है। जानें मांसपेशियों दर्द से बचाव के उपाय और कुछ खास बातें-

 

ऐसे करें बचाव :

  • सोते समय मोटा तकिया न लगाएं, लेट के मोबाइल न देखें।
  • सोने के लिए गद्दा अधिक सख्त या अधिक मुलायम नहीं हो।
  • लगातार कुर्सी पर वक्त न बिताएं, बीच-बीच में गैप लेते रहे।
  • अचानक झुक कर वजन न उठाएं, भारी वजन उठाने से बचें।
  • सप्ताह में चार दिन 15 से 20 मिनट शारीरिक कसरत करें।


ये होती हैं फिजियोथेरेपी :
व्यायाम के माध्यम से शरीर की मांसपेशियों को सही अनुपात में सक्रिय करने की प्रक्रिया फिजियोथेरेपी कहलाती है। मांसपेशियों में अंदरूनी खिंचाव या जख्मों की हीलिंग के लिए डॉक्टर भी फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं।

फ्रैक्चर पीड़ितों के लिए रामबाण :
सड़क दुर्घटना या किसी हादसे में हाथ, पैर में फ्रैक्चर के दौरान प्लास्टर चढ़े रहने से मांसपेशिया जाम हो जाती हैं। इन्हें दोबारा सक्रिय करने के लिए डॉक्टर फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। नियमित सत्र के बाद फ्रैक्चर पीड़ितों के लिए फिजियोथेरेपी रामबाण है। इसके अलावा मानसिक तनाव, पैरालाइसिस व अन्य समस्याएं भी फिजियोथेरेपी से ठीक हो सकती हैं। फिजियोथेरेपी सिर्फ रोगी के लिए नहीं है, कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति खुद को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए फिजियोथेरेपी ले सकता है।

लकवा समेत कई अन्य बीमारियों में कारगर
लकवा के इलाज में लकवाग्रस्त मरीजों के बेहतर इलाज में दवाओं के साथ फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका है। फिजियोथेरेपी से मरीज के बेजान अंगों में जान फूंकी जा सकती है। बता दें कि लकवा की चपेट में कोई भी आ सकता है। पहले अधिक उम्र के लोग इस बीमारी की चपेट में आते थे। अब खराब जीवनशैली व खान-पान से लकवा की संभावना बढ़ गई है। फिजियोथेरेपिस्ट के मुताबिक, लकवा में हाथ व पैर का हिस्सा बेजान हो जाता है। लकवाग्रस्त मरीजों को किसी भी प्रकार की तेल मालिश से बचना चाहिए।

गर्भावस्था में फायदेमंद
गर्भावस्था में फायदेमंद गर्भावस्था के दौरान कामकाजी महिलाओं की सामान्य गलतियों के कारण जटिलताएं होती हैं। कई बार काम से जुड़े तनाव के कारण वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। हालांकि, तनाव जैसी स्थिति से छुटकारा पाने में गर्भवती महिलाओं के लिए डिलिवरी से पहले और बाद में फिजियोथेरपी फायदेमंद है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ:
फिजियोथेरेपी में व्यायाम के अलावा आधुनिक मशीनों से मांसपेशियों को सक्रिय किया जाता है। नियमित सत्रों के बाद दर्द झेल रहा व्यक्ति सामान्य दर्द रहित जीवन जी सकता है। डॉ. पंकज अग्रवाल, कन्वेनर, इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपी लोगों के शारीरिक श्रम में कमी आई है। इससे मांसपेशियों के अलावा भी कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। खुद को दुरुस्त रखने के लिए लोग फिजियोथेरेपी अपना रहे हैं। डॉ. अंकुर गर्ग, कोषाध्यक्ष, आगरा फिजियोथेरेपी प्रैक्टिसनर्स एसो
 

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