Not all pimples are the same it can be a rosacea disease know the symptoms and treatment - Health tips: सारे पिंपल्स एक जैसे नहीं होते, यह रोजेशिया बीमारी हो सकती है, जानें लक्षण और इलाज DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Health tips: सारे पिंपल्स एक जैसे नहीं होते, यह रोजेशिया बीमारी हो सकती है, जानें लक्षण और इलाज

rosacea  photo ht

 

क्या आप बता सकते हैं कि दिवंगत प्रिंसेस डायना, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और 17 वीं सदी के डच चित्रकार रेम्ब्रांट में क्या समानता है? इसका जवाब है, दूर से चमचमाते लाल-लाल गाल जो एक पुराने त्वचा रोग के लक्षण हैं, जिसे रोजेशिया कहा जाता है। जानें और समझें इस रोग के बारे में -

रोजेशिया के लक्षण

रोजेशिया की शुरुआत में चेहरे की त्वचा लाल (एरथीम) हो जाती है, फिर लाल लाइनें दिखने लगती हैं और सूजन (तेलंजाक्तेसिया) आ जाती है। छोटी-छोटी फुंसिया उठने लगती हैं, जिनमें मवाद भर जाता है और अंत में गाल तथा नाक को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं तक फैल जाता है। अब रिसर्चर कह रहे हैं कि किस तरह रोजेशिया को रोकना मुश्किल है। इसकी मौजूदगी सांवली त्वचा वालों में ज्यादा घातक हो सकती है, क्योंकि लक्षण कम दिखाई देते हैं या देरी से दिखाई देते हैं।

 न्यूयॉर्क निवासी एड्रयू ए. एलेक्सिस की अगुवाई में हुई रिसर्च में लिखा गया कि किसी मरीज में रोजेशिया के लक्षण होते हैं, उसकी त्वचा का रंग, बाहरी तौर पर दिखाई दे रहे एरथीमा या तेलंजाएक्तेसिया, साथ ही त्वचा का सूखापन, फुलाव और हायपर पिगमेंटेशन। यह रिसर्च जर्नल ऑफ द अमेरिकन अकादमी ऑफ डेर्मेटोलजी के जून के अंक में प्रकाशित हुई है।

रोजेशिया बीमारी की वजह क्या है?

इस बीमारी का सही-सही कारण अब तक पता नहीं चला है। डॉक्टर कहते हैं कि ऐसा कई कारणों से हो सकता है जिनमें शामिल हैं - रक्त वाहिकाओं में दिक्कत, तनाव, या चेहरे पर मौजूद सूक्ष्म कणों का रिएक्शन। फिर भी सटीक तौर पर यह कोई नहीं बता पा रहा है कि रोजेशिया की बीमारी कैसी होती है और कैसे फैलती है। कुछ रिसर्च में इसे प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी (जो अक्सर जन्मजात होती है), त्वचा पर पाए जाने वाले के बैक्टिरीया का बढ़ना या चेहरे की त्वचा संबंधी तंत्रिका संकेतों से जोड़ा गया है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा प्रकाशित मैगज़ीन हार्वर्डहेल्थ में रोजेशिया के लक्षणों को चार स्तरों पर समझाया गया है। पहला - फ्लशिंग के साथ चेहरे का लाल होना, दूसरा - इस लालपन का गाल, नाक और माथे तक ज्यादा फैल जाना। तीसरा - पूरे चेहरे पर लाल रेखाओं के साथ लाल उभार, जिसे तेलंजाक्तेसिया कहा जाता है। और चौथा - नाम के मुताबिक छोटे पिम्पल और उनसे खून बहना।

रोजेशिया को सनबर्न या मुंहासे समझने की गलती कोई भी कर सकता है। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर ही बता सकता है कि मरीज को रोजेशिया हुआ है या नहीं। इसमें इस बीमारी को लेकर परिवार की हिस्ट्री भी अहम भूमिका निभाती है।

क्या भारत में भी है रोजेशिया बीमारी  

महामारी विज्ञान (एपडेमियोलजी) के अध्ययन बताते हैं कि दुनिया में रोजेशिया  सबसे ज्यादा (10 फीसदी) स्वीडन के लोगों में होती है। इसके बाद अमेरिकियों (लगभग 5 फीसदी), फिर फ्रांस और जर्मन के लोगों का (2-3 फीसदी) का नंबर आता है। ये हालात तेजी से बदल भी रहे हैं, क्योंकि अलग-अलग देशों के लोग आपस में शादियां कर रहे हैं, बड़ी संख्या में लोग जॉब्स और बिजनेस के सिलसिले में यहां से वहां जा रहे हैं। अब यह बीमारी भारतीयों में भी तेजी से फैलने लगी है। यहां करीब 40 फीसदी तक मरीज ऐसे हैं, जिनके परिवार में रोजेशिया का इतिहास रहा है।

रोजेशिया का इलाज क्या है?

शोधकर्ता अब कैफीन और रोजेशिया की रोकथाम के बीच संभावित लिंक खोज रहे हैं। दिसंबर 2018 में मेडिकल जर्नल जामा डर्माटोल में इस संबंध में एक लेख प्रकाशित हुआ था। इसमें निष्कर्ष निकाला गया था कि कैफिन से रोजेशिया को रोकने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इस पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले और अध्ययन की जरूरत है।

अभी तो डॉक्टर यही सलाह देते हैं कि यदि आपको रोजेशिया की बीमारी है तो उन चीजों से दूर रहें, जिनसे यह बढ़ता है। जैसे सूर्य की रोशनी, गर्म पेय पदार्थ, शराब, मसालेदार भोजन। विभिन्न मरीजों में पाया गया है कि ये चीजें रोजेशिया को बढ़ाने का काम करते हैं। इनसे रक्त प्रवाह बढ़ता है और बीमारी फैलती है। कुछ मरीजों में चेहरे पर नमी बनाए रखने और सनस्क्रीन का उपयोग फायदेमंद साबित हुआ है।

भले ही रोजेशिया का कोई इलाज नहीं है, लेकिन ब्रिमोनिडीन या ऑक्सीमेटाज़ोलिन जैसे मलहम से चेहरे की रक्त वाहिकाओं में कसावट आती है और लालपन कम होता है। मेट्रोनिडाजोल और टेट्रासाइक्लिन जैसे एंटीबायोटिक से भी यही काम कर सकते हैं। लेकिन ऐसा कोई इलाज अपनी मर्जी से न करें, डॉक्टर से जरूर सलाह लें, क्योंकि इनके साइड-इफेक्ट भी हैं। 2003 में U.S. Food and Drug Administration (FDA) ने एजलेक एसिस नामक जेल को मंजूरी दी है। इसमें डाइकारबॉक्सिलिक एसिड होता है। इस जेल को रोजेशिया के शुरुआती दौर में पिंपल पर लगाया जा सकता है। कई डॉक्टरों ने नए तरह के ट्रीटमेंट जैसे लेजर थैरेपी को भी आजमाया है, ताकि नाक पर मौजूद अतिरिक्त ऊतकों (टिश्यूज़) को हटाया जा सके या रक्त वाहिकाओं में इन्फेक्शन बढ़ने से रोका जा सके। सर्जिकल शेव तकनीक या डर्मब्रेश़न (धब्बा आदि हटाने के लिए त्वचा की ऊपरी परत को घीसना) भी ऊपरी तौर पर आराम दे सकते हैं।

कितना परेशान करती है यह बीमारी

2016, डॉ. कार्टसन एस. मिकेलसन ने मेडिकल जर्नल डर्मेटोलॉजी रिपोर्ट्स में एक आर्टिकल लिखा है। उन्होंने बताया है कि रोजेशिया के मरीज किस तरह शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होते हैं। उनके मुताबिक 77 फीसदी मरीज भावनात्मक रूप से प्रभावित होते हैं, जबकि 67 फीसदी पर इसका असर सामाजिक पड़ता है यानी समाज से उनका जुड़ाव प्रभावित होता है। 53 फीसदी को अपने संबंधों और डेटिंग बिहेवियर के रूप में इसकी कीमत चुकाना पड़ती है। मरीज तनाव में रहते हैं, सार्वजनिक स्थानों पर असहज महसूस करते हैं और उनका आत्मविश्वास भी कम होता है।

भारत जैसे देशों में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि यहां ऐसे मरीज कम हैं और बहुत कम लोगों को इस बीमारी की जानकारी है। 2004 में मुंबई निवासी होमाई बारिया ने Rosacea Review (नेशनल रोजेशिया सोसायटी द्वारा इलिनोइस में प्रकाशित) में लिखा था, 'रोजेशिया बीमारी डायग्नोस होने के बाद उन्होंने पार्टियों में जाना बंद कर दिया। जो लोग इस बीमारी के बारे में नहीं जानते थे, वे असंवेदनशील कमेंट करते थे।'

अधिक जानकारी के लिए देखेंः https://www.myupchar.com/disease/rosacea

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Not all pimples are the same it can be a rosacea disease know the symptoms and treatment