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24 जनवरी, 2020|2:00|IST

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बीमारी होने से काफी पहले पता चल जाएगा अल्जाइमर का खतरा, रिसर्च में सामने आई ये बातें

alzheimer

अल्जाइमर रोग याददाश्त कम होने या भूलने की आम बीमारियों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि अल्जाइमर की रोकथाम इसका इलाज या इसे नियंत्रित करना फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन एक ताजा रिसर्च में पता चला है कि एक प्रोटीन की मौजूदगी का पता लगाने के लिए किया जाने वाला यह ब्लड टेस्ट अल्जाइमर बीमारी के लक्षण सामने आने के कई साल पहले बीमारी का पता लगा लेता है। 


खून की जांच में पता लगाया जाता है कि शरीर में न्यूरोफिलामेंट लाइट चैन (एनएफएल) का स्तर कितना कम या ज्यादा हो रहा है। यह प्रोटीन आमतौर पर  दिमागी कोशिकाओं के भीतर पाया जाता है। वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने ऐसे कुछ लोगों का साधारण ब्लड टेस्ट किया जिन्हें पहले से अल्जाइमर्स बीमारी थी। वैज्ञानिकों की इस टीम में अमेरिका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और और जर्मनी के जर्मन सेंटर फॉर न्यूरोडीजेनरेटिव डिसीसिस के विशेषज्ञ शामिल हुए थे। मेडिकल न्यूज टुडे के मुताबिक न्यूरो मेडिसिन पेपर में छपे इस शोध की मुख्य लेखिका स्टेफनी ए. शुल्ट्ज ने बताया है कि स्पाइनल फ्ल्यूड से सैंपल लेकर खून की जांच से एनएफल की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। 

 

अल्जाइमर बीमारी के कारण
www.myupchar.com से जुड़े ऐम्स के डॉ. नबी वली के मुताबिक अल्जाइमर रोग एक तेजी से फैलने वाला रोग है, जो मरीज की याददाश्त और अन्य महत्वपूर्ण मानसिक कार्यों को हानि पहुंचाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादातर लोगों में, अल्जाइमर रोग आनुवांशिक, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन से उत्पन्न होता है जो समय के साथ मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। 5% से भी कम बार, अल्जाइमर विशिष्ट आनुवंशिक परिवर्तनों के कारण होता है जो वास्तव में यह रोग को विकसित करने की गारंटी देता है। अत्यधिक तनाव, खाली बैठना यानी दिमागी कसरत का कोई काम ना करना, शराब का सेवन, कम सोना और कुछ भी याद रखने के लिए कोई प्रयास न करने की वजह से अल्जाइमर रोग हो सकता है।

 

जानिए अल्जाइमर के बारे में खास बातें
अल्जाइमर बीमारी का सबसे पहले करीब एक सदी पहले 1906 मैं जर्मन डॉक्टर अलोइस अल्जाइमर को पता चला और उन्हीं के नाम पर इस रोग को अल्जाइमर रोग कहा जाता है। बुजुर्गों पर अल्जाइमर जब याददाश्त खोने संबंधी कारणों का पता लगा रहे थे तब उन्हें इस बीमारी का पता चला।
अल्जाइमर याददाश्त खोने (डिमेंशिया) का सबसे सामान्य रूप है।अल्जाइमर से दिमाग की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, जिससे याददाश्त, सोचने की शक्ति और अन्य व्यवहार बदलने लगते हैं।अन्य बौद्धिक गतिविधियाँ भी कम होने लगती हैं, जिससे प्रतिदिन के जीवन पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में जाहिर है इसका असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। समय बीतने के साथ यह बीमारी बढ़ती है और खतरनाक हो जाती है।  


अमेरिका जैसे विकसित देश में करीब 50 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और हर 65 सेकंड में एक व्यक्ति इस बीमारी का शिकार हो जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि यहां 2050 तक ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी अल्जाइमर बीमारी अमेरिका में होने वाली मौतों के 10 कारणों सबसे बड़े में से एक है। बुजुर्ग लोगों में अल्जाइमर बीमारी होने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं, लेकिन यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है करीब 5 फ़ीसदी लोग ऐसे हैं जिन्हें यह बीमारी 65 साल की उम्र से भी पहले हो जाती है। अल्जाइमर से पीड़ित करीब दो तिहाई महिलाएं हैं। 


अल्जाइमर रोग से मरने वालों की संख्या प्रोस्टेट कैंसर या स्तन कैंसर से होने वाले मरीजों की कुल संख्या से भी ज्यादा है। लोगों को इस रोग के बारे में जानकारी देकर इस बीमारी से बचाया जा सकता है ताकि वह अपने दिमाग को सक्रिय रखें और बुजुर्ग होने पर भी वे कुछ ना कुछ दिमागी काम करते रहें। अल्जाइमर रोग के मरीजों को अन्य मरीजों की तुलना में ज्यादा बार अस्पताल जाना पड़ता है और इसका इलाज भी बहुत महंगा है। बीमारी के लक्षणों पता चलने के तुरंत बाद इसका इलाज होने से लोगों को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/alzheimers-disease

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

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  • Web Title:new research reveal these major facts about alzheimer disease