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10 दिसंबर, 2019|2:16|IST

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National Pollution Control Day 2019: प्रदूषण दे रहा बीमारियां, छोटे-छोटे उपाय हो सकते हैं बड़़े कारगर

 

National Pollution Control Day 2019: प्रदूषण इन्सान का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, बल्कि यहां खतरा बाकी देशों से ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण 10 लाख से ज्यादा लोग जान गंवाते हैं। जी-20 देशों में प्रदूषण से मरने वालों का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। वायु प्रदूषण के कारण स्ट्रोक, हार्ट और फेफड़ों संबंधी बीमारियां तथा कैंसर होता है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर कितना खतरनाक रहता है, अंदाजा इस रिपोर्ट से लगाया जा सकता है कि दिल्लीवासी इसी तरह प्रदूषित हवा में सांस लेते रहे तो यहां के एक शख्स की जिंदगी औसतन 17 साल कम हो जाएगी। पूरे देश में इस भयंकर स्थिति के प्रति जागरुकता का अभाव है। दिल्ली का प्रदूषण हर साल दुनियाभर में चर्चा में रहता है, लेकिन पराली जलाने और वाहनों का सीमित इस्तेमाल करने समेत कितने उपायों पर लोगों ने अमल किया? यही जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 2 दिसंबर को नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे यानी राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। 

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के पीछे भोपाल त्रासदी

2 दिसंबर, 1984 को भोपाल गैस त्रासदी हुई थी। इसमें जान गंवाने वालों की याद में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड के प्लांट से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। 5 लाख से अधिक लोग इस गैस की चपेट में आए थे और 25,000 लोगों की मौत हो गई थी।

 

प्रदूषण रोकने में हर कोई ऐसे बन सकता है भागीदार

धूम्रपान बंद करें या सिगरेट के टुकड़ों को जमीन पर न फेंके। सिगरेट के ये टुकड़े बायोडिग्रेडेबल (यानी आसानी से नष्ट होने वाले) नहीं होते हैं और इनमें बेहद जहरीले घुलनशील रसायन होते हैं। जमीन पर फेंका गया सिगरेट का टुकड़ा 25 साल तक बना रह सकता है, जो पर्यावरण में आर्सेनिक, अमोनिया, एसीटोन, बेंजीन, कैडमियम, फॉर्मलाडिहाइड, लेड जैसे रसायनों का रिसाव करता है।

पेट्रोल-डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड कार का इस्तेमाल करें। अपनी कार का उचित रख-रखाव करें। ध्यान रखें कि कहीं यह ज्यादा धुआं तो नहीं छोड़ रही। कार पुलिंग करें। जब भी संभव हो पैदल चलें या साइकिल से आना-जाना करें।

अपशिष्ट, विशेष रूप से रसायनों और प्लास्टिक के कचरे को खुले में न जलाएं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) के लिए 3आर का फॉर्मूला अपनाएं जैसे - कम करना (रिड्यूस), पुन: उपयोग करना (रीयूज) और रीसायकल करना।

ऐसी चीजों का उपयोग करें जो ज्यादा टिकाऊ हों और रीसाइकिल किया जा सके।

घर के आंगने में पत्तियों और रसोई के कचरे से खाद बनाना शुरू करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

हवा और धूप से मिली ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। गैस या बिजली के उपयोग को कम करें। वॉशिंग मशीन के ड्रायर के बजाए कपड़े खुले में सुखाएं। एयर कंडीशनर या हीटर का उपयोग कम से कम करें।

स्थानीय चीजें खरीदें। इससे माल परिवहन के लिए ईंधन का उपयोग कम से कम किया जा सकता है।

घर हो या कोई अन्य इमारत, पानी संरक्षण के उपाय तलाशें।

उन उत्पादों का उपयोग करें, जो ईको-फ्रेंडली हों या बायोडिग्रेडेबल सामग्रियों से बने हों। प्लास्टिक से बचें। शॉपिंग करें तो हमेशा एक बैग लेकर जाएं।

ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। इससे हवा साफ रहेगी, ऑक्सीजन मिलेगी। घर में भी लॉन के बजाए बगीचा लगाएं। देशी पौधों को प्राथमिकता दें।

यदि बिजनेस चलाते हैं तो पर्यावरणीय मसलों को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लें। यदि किसी और के लिए काम करते हैं, तो अपनी कंपनी की पॉलिसी में भी पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दें।

कीटनाशक और जीएमओ का उपयोग बिल्कुल न करें।

 

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स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

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