Low blood pressure hypotension- Symptoms and causes - क्या होता है लो ब्लड प्रेशर, क्या हैं इसके कारण, ऐसा होने पर क्या करें DA Image

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क्या होता है लो ब्लड प्रेशर, क्या हैं इसके कारण, ऐसा होने पर क्या करें

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ब्लड प्रेशर में अचानक कमी आने के संकेत हैं - चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, धड़कनों का कम ज्यादा होना, दूविधा की स्थिति बने रहना, शरीर ठंड़ा पड़ना। यह एक बहुत खतरनाक स्थिति है, जिसमें शरीर को जरूरी ब्लड सप्लाय नहीं मिलता है। हालांकि इसका इलाज भी है। जानिए इस बारे में - 

ब्लड प्रेशर क्या है?
हार्ट पम्पिंग के द्वारा ब्लड को धमनियों (आर्टरीज़) से माध्यम से शरीर के बाकी अंगों तक पहुंचाता है। इसके लिए जो बल लगता है, उसे ब्लड प्रेशर कहते हैं। सामान्य परिस्थितियो में ब्लड प्रेशर में बदलाव होता रहता है। उदाहरण के लिए - जब आप सोते हैं, तब ब्लड प्रेशर कम होता है और जब जॉगिंग करते हैं, तब बढ़ जाता है। 

ब्लड प्रेशर की गणना दो तरह से की जाती है:

ऊपरी सीमा या सिस्टोलिक प्रेशर से तात्पर्य है, वह प्रेशर जिसमें हार्ट सिकुड़ता है और धमनियों में ब्लड पंप करता है।

निम्न सीमा या डायस्टोलिक प्रेशर से तात्पर्य है, वह प्रेशर जिसमें हार्ट फैलता है या रिलेक्स होता है और चेम्बर्स को ब्लड से भरने की अनुमति देता है।

 ब्लड प्रेशर की नॉर्मल रेंज 130-140 mm Hg सिस्टोलिक (ऊपरी सीमा) और 80-90 mm Hg डायस्टोलिक (निम्न सीमा) है। यदि ब्लड प्रेशर 90/60 mm Hg तक है, तो इसे लो ब्लड प्रेशर या हायपोटेंशन कहा जाता है। 


ब्लड प्रेशर के कारण

“नॉर्मल” ब्लड प्रेशर को संख्या के बजाए एक रेंज में देखा जाता है, क्योंकि यह हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। किसी के लिए जो ब्लड प्रेशर लो है, वो दूसरे के लिए सामान्य हो सकता है। लेकिन यदि ब्लड प्रेशर 90/60mm से कम है तो यह गंभीर बीमारी का लक्षण है। ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे 

- पोस्टुरल या ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन: इससे तात्पर्य है ब्लड प्रेशर में तेजी से कमी आना। ऐसा तब होता है जब आप लंबे समय से बैठे हैं और अचानक खड़े होकर कोई काम करने लगें। ग्रेविटी के कारण बड़ी मात्रा में ब्लड पैरों की तरफ जाने से यह स्थिति बनती है।

न्यूरली-मेडिएटेड हाइपोटेंशन: यह बच्चों में ज्यादा पाया जाता है। लंबे समय तक खड़े रहने पर ब्लड प्रेशर की यह स्थिति बनती है। हार्ट और ब्रेन के बीच जब तालमेल (कम्युनिकेशन) नहीं बनता है, तब तनाव, दर्द या भय पैदा होता है।

पोस्टप्रैंडियल हाइपोटेंशन: यह खाने के ठीक बाद ब्लड प्रेशर में आने वाली कमी है। आमतौर पर यह वयस्कों में होता है। डायजेशन यानी पाचन एक जटील प्रक्रिया है, जिसमें बहुत सारा ब्लड और एनर्जी लगती है। कुछ लोगों मे जब पाचन के लिए ब्लड फ्लो बढ़ जाता है तो ब्रेन और अन्य अंगों में जा रहे ब्लड में कमी आ जाती है। इस कारण ब्लड प्रेशर तेजी से नीचे आता है।
 
सिवियर हाइपोटेंशन: जब किसी को शॉक यानी झटका लगता है, तब यह स्थिति बनती है। यह जिंदगी के लिए बहुत घातक हो सकता है, क्योंकि प्रमुख अंगों में जाने वाले ब्लड की मात्रा घट जाती है। एक्सिडेंट में ज्यादा खून बहने से भी ऐसा होता है। इसके अलावा गंभीर इंफेक्शन, हार्टअटैक, एलर्जी अटैक या ऐनफलैक्सिस के कारण भी लॉ ब्लड प्रेशर की यह स्थिति बनती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान हायपोटेंशन: यह एक सामान्य बीमारी है, लेकिन बहुत ज्यादा लॉ ब्लड प्रेशर एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। जब भ्रूण गर्भाशय की जगह फेलोपियन ट्य़ूब या पेट में ठहर जाता है तो उसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं।

हार्मोनल डिसऑर्डर: यह भी लॉ ब्लड प्रेशर का एक कारण है। साथ ही थायरॉइड डिसऑर्डर, पैराथाइराइड डिसफंक्शन और लॉ ब्लड सुगर (डायबिटीज के मरीजों में हायपोग्लेसीमिया) भी लॉ ब्लड प्रेशर का कारण बनते हैं। 

डिहाइड्रेशन: यह ब्लड प्रेशर का एक अन्य सामान्य कारण है। शरीर में पानी की कमी से महत्वपूर्ण अंगों में होने वाली ब्लड की सप्लाय प्रभावित होती है।

लो ब्लड प्रेशर का इलाज क्या है?
समय-समय पर अपनी पैरों की मूवमेंट करते रहें, लंबे समय तक एक स्थान पर बैठे रहें, पर्याप्त पानी पीते रहें, खाने में नमक थोड़ा ज्यादा लें। लेकिन यदि ब्लड प्रेशर कुछ ज्यादा ही कम है, तो आपका डॉक्टर हार्ट को सामान्य रखने के लिए हायपोटेंशन को सीमित रखने के उपाय करेगा। 

(यह स्वास्थ्य आलेख www.myupchar.com द्वारा लिखा गया है, जो सेहत संबंधी भरोसेमंद सूचनाएं प्रदान करने वाला देश का सबसे बड़ा स्रोत है।)

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