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27 अप्रैल, 2021|10:04|IST

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Health Tips: जानें क्यों होता है आंत का कैंसर, टेस्ट और बचाव के तरीके भी जान लें

bowel cancer

कोलोरेक्टल कैंसर को आंत का कैंसर, कोलन कैंसर या रेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। यह कोलन और मलाशय को प्रभावित करता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी का अनुमान है कि अमेरिका में हर 21 में से 1 पुरुष और 23 में से 1 महिला अपने जीवनकाल में कोलोरेक्टल कैंसर से पीड़ित होती है। यह महिलाओं में कैंसर की मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है और पुरुषों के लिए तीसरा। हालांकि, स्क्रीनिंग तकनीक विकसित होने और इलाज की सुविधाएं बढ़ने से कोलोरेक्टल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में गिरावट आई है। कोलोरेक्टल ऐसा घातक कैंसर भी हो सकता है जो शरीर के अन्य भागों में फैल कर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।

कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण
-मलत्याग की आदत में बदलाव
-दस्त या कब्ज
-यह महसूस करना कि मल त्याग के बाद आंत ठीक से खाली नहीं हुई है
-मल में खून होना, जिससे मल काला दिखाई देता है
-मलाशय से चमकदार लाल रक्त आना
-पेट में दर्द और सूजन
-लंबे समय से भोजन न करने पर भी पेट में भारीपन महसूस होना
-थकान
-अचानक वजन घटना
-पेट या मलद्वार में गांठ 
-पुरुषों में या रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में आयरन की कमी
-इनमें से अधिकांश लक्षण अन्य बीमारियों का संकेत भी दे सकते हैं। यदि लक्षण 4 सप्ताह या उससे अधिक समय तक बने रहें तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्यों होता है कोलोरेक्टल कैंसर?
-बड़ी उम्र का असर
-एनिमल प्रोटीन, संतृप्त वसा और कैलोरी की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों का सेवन
-आहार में फाइबर की कमी
-शराब की अत्यधिक लत
-स्तन, अंडाशय या गर्भाशय का कैंसर
-परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर की हिस्ट्री
-अधिक वजन और मोटापा
-धूम्रपान
-शारीरिक गतिविधि की कमी
-मलाशय में पॉलीप्स की उपस्थिति, जो कैंसर बन सकते हैं।
-रेड या प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन

कोलोरेक्टल कैंसर के चरण-
स्टेज 0: यह सबसे प्रारंभिक अवस्था है, जब कैंसर अभी भी म्यूकोस या मलाशय की भीतरी परत में होता है। इसे कार्सिनोमा इन सीटू भी कहा जाता है।
चरण 1: कैंसर विकसित होकर कोलोन या रेक्टम की आंतरिक परत से बाहर निकल गया है, लेकिन अभी रेक्टम या कोलोन की वॉल से आगे नहीं फैला है।
स्टेज 2: कैंसर कोलोन या रेक्टम की दीवार से अंदर हो गया है, लेकिन यह अभी पास के लिम्फ नोड्स तक नहीं पहुंचा है।
स्टेज 3: कैंसर पास के लिम्फ नोड्स में प्रवेश कर गया है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित नहीं कर पाया है।
स्टेज 4: कैंसर शरीर के अन्य भागों में भी फैल गया है, जैसे लिवर, उदर गुहा, फेफड़े या अंडाशय में झिल्ली।
रिकरंट: इलाज के बाद कैंसर वापस आ गया है। यह लौटकर रेक्टम, कोलोन या शरीर के किसी अन्य हिस्से को प्रभावित कर सकता है। 

कोलोरेक्टल कैंसर के टेस्ट
-ब्लड स्टूल टेस्ट
-स्टूल डीएनए टेस्ट
-फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी
-एक्ससे
-कोलोनोस्कोपी
-सीटी कोलोनोग्राफी
-इमेजिंग स्कैन्स

www.myupchar.com से जुड़े ऐम्स के डॉ. उमर अफरोज के अनुसार, ये टेस्ट कोलोन कैंसर बनने से पहले पॉलिप्स की पहचान कर लेते हैं और कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने में मदद करते हैं।

ऐसे बचा जा सकता है कोलोरेक्टल कैंसर से:
-नियमित जांच: जिन लोगों को पहले कोलोरेक्टल कैंसर हुआ है, जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, जिनके परिवार में पहले इसके मरीज रह चुके हैं, उन्हें नियमित जांच करवाना चाहिए।
-पोषण: अधिक से अधिक फल, सब्जियों, कार्बोहाइड्रेट एवं फाइबर युक्त आहार लें। रेड और प्रोसेस्ड मीट का कम से कम सेवन करें। संतृप्त वसा से अच्छी गुणवत्ता वाले वसा युक्त खाद्य पदार्थ जैसे - एवोकैडो, जैतून का तेल, मछली के तेल और मेवों का सेवन करें।
व्यायाम: नियमित व्यायाम से कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को कम से कम किया जा सकता है।
बॉडीवेट: अधिक वजन या मोटापे के कारण कोलोरेक्टल सहित कई कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/colorectal-cancer

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखा गया है। 

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